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सरकारी हॉस्पिटल में भी ले सकेंगे ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, मोबाइल बताएगा कब आएगा नंबर

Fri, 29 Dec 2017 02:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 29 Dec 2017 02:01 PM IST
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online appointment facilities will be launched in government hospitals
डेमो

लखनऊ के सरकारी अस्पतालों में अब इलाज के लिए पहले पर्चा काउंटर, उसके बाद ओपीडी की लंबी कतारों में खड़ा नहीं रहना पड़ेगा। निजी अस्पतालों की तरह अब सरकारी अस्पतालोें में भी अपॉइंटमेंट की सुविधा मिलेगी।

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ओपीडी में ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था चालू होने के बाद प्रदेश सरकारी की ई-हॉस्पिटल योजना के अगले चरण में जल्द ही इन सुविधाओं की भी शुरूआत होगी। यह जानकारी प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को बलरामपुर अस्पताल में आयोजित फायर फाइटिंग सिस्टम व अटल विश्रामालय के उद्घाटन समारोह में दी। 
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उन्होंने बताया कि मरीजों को उनके मोबाइल के जरिए नंबर आने में कितना समय बचा है, इस बात की भी जानकारी मिलती रहेगी। इससे मरीज को घंटों पहले अस्पताल नहीं आना पड़ेगा और भीड़भाड़ पर भी अंकुश लग सकेगा। समारोह में मेयर संयुक्ता भाटिया ने कहा कि संक्रमण से सबसे अधिक रोग होते हैं। ऐसे में अपने आसपास सफाई रख कर इससे बचा जा सकता है। 
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स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से सुविधाएं नहीं मिल पातीं जिससे केजीएमयू, पीजीआई व लोहिया संस्थान पर बोझ बढ़ जाता है। लेकिन अब जल्द ही सरकारी अस्पतालों में संस्थानों जैसा इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा जिससे इन अस्पतालों की भी संस्थानों जैसी ब्रांडिंग हो सके। 

 

फायरप्रूफ हुआ बलरामपुर अस्पताल

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अग्निशमन संरचना का लोकार्पण करते स्वास्थ्य मंत्री - फोटो : amar ujala
स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने स्वीकारा कि ग्रामीण इलाकों में डॉक्टर जाना नहीं चाहते। यही वजह है कि वहां डॉक्टरों की कमी है। इसके लिए अब टेक्नोलॉजी के जरिए मरीजों को गांव में ही इलाज दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए 700 मशीनें खरीदी जाएंगी। टेली कॉन्फ्रें सिंग के जरिए ट्रेंड एएनएम व आशा बहू मरीजों की समस्याओं को शहरी विशेषज्ञों को बताएंगी।

ग्रामीण अस्पतालों में की गई खून की जांच व एक्सरे रिपोर्ट भी अपलोड कर विशेषज्ञों को दिखाई जा सकेंगी। इससे डॉक्टर दवा का पर्चा अपलोड कर देंगे जिससे मरीज को दवा भी मिल जाएगी। बताया, कि ब तक यह सुविधा ओडिसा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश व आंध्रप्रदेश जैसे राज्यों में चल रही है।

बलरामपुर अस्पताल में फायर फाइटिंग सिस्टम की शुरूआत स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने की। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद अब बलरामपुर अस्पताल फायर प्रूफ हो गया। दो साल में 4 करोड़ 95 लाख रुपये से बनाए गए इस सिस्टम का निर्माण कार्य यूपीआरएनएन कंपनी ने कराया है।

इसमें अस्पताल की ओपीडी, वार्डों इमरजेंसी, पैथोलॉजी, जांच केंद्रों समेत पूरे परिसर में 76 होज बॉक्स लगाए गए हैं। इसमें से 46 अंदर व 30 बाहर की ओर हैं। इसके लिए पूरे परिसर में पाइपलाइन की भी सप्लाई है। आग लगने पर तुरंत इन बॉक्सों में लगे पाइप को निकालते ही ऑटोमैटिक पानी चलने लगेगा और आग पर काबू पाया जा सकेगा। अस्पताल परिसर में 900 अलार्म भी लगवाए गए हैं।

छह डॉक्टरों समेत वेंटीलेटर की मांग

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डेमो - फोटो : डेमो
बलरामपुर अस्पताल में तीमारदारों को अब अटल विश्रामालय में बिना किसी शुल्क के ही सुविधा मिल सकेगी। स्वास्थ्य मंत्री ने अटल विश्रामालय का भी शुभारंभ किया। यह विश्रामालय अस्पताल में 1995 से बना था। लेकिन जर्जर हो चुका था। अस्पताल प्रशासन ने इसका पुन: निर्माण करा इसकी शुरूआत की है।

तीमारदारों को पहले यहां रहने के लिए पैसे देने पड़ते थे वहीं शुल्क नहीं पड़ेगा। गद्दे व कंबल समेत 36 बेड पर मरीजों को सुविधा मिल सकेगी।वीरांगना अवंतीबाई (डफरिन) महिला अस्पताल में भी 12 बेड की नई कंगारू मदर केयर यूनिट का शुभारंभ किया गया।

नए केएमसी वार्ड के बाद अस्पताल में 24 बेडों पर केएमसी की सुविधा मिल सकेगी। मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने अस्पताल की हाईटेक की गई पैथोलॉजी व इमरजेंसी वार्ड का भी उद्घाटन किया। अस्पताल की सुपरिंटेंडेंट इन चार्ज डॉ. सविता भट्ट ने मरीजों के  बेहतर इलाज के लिए छह डॉक्टरों की मांग की।

एसआईसी भट्ट ने मंत्री से अस्पताल में तीन गायनकोलॉजिस्ट (स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ) व तीन ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर) की मांग की। मंत्री ने अस्पताल को जल्द वेंटीलेटर की सुविधा देने को कहा। अब सरकारी अस्पतालों में मल्टीकलर व पेंटिंग से निखरी दीवारें भी मरीजों को जीने की प्रेरणा देंगी।

मंत्री सिद्धार्थनाथ ने कहा कि रंगों से भी मरीजाें के दिमाग पर असर होता है। ऐसे में अस्पतालाें की दीवारों पर हल्के पीले व पुराने तरह का डल गुलाबी रंग मरीजों को और भी दुखी कर देते हैं। ऐसे में अगर अस्पताल की दीवाराें पर कई तरह के रंगों से पेंटिंग व जीवन से भरी कृतियां बनाई जाएं तो यह मरीज के दिमाग पर सकारात्मक प्रभाव डालेंगी। 
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