शुल्क भरपाई योजना में गड़बड़ी: शिक्षण संस्थानों को बचने के लिए सप्ताह भर में देने होंगे प्रमाण
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शुल्क भरपाई योजना में गड़बड़ी के आरोपी संस्थानों को सप्ताह भर के भीतर अपने निर्दोष होने का प्रमाणपत्र देना होगा। ऐसा न कर पाने पर राज्यस्तरीय समिति उन्हें काली सूची में डाल देगी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद समिति ने यह फैसला किया है।
पिछले दिनों छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना का लाभ लेने के लिए फर्जी छात्र दिखाने पर सहारनपुर के आठ शिक्षण संस्थानों को नोटिस दिया गया था। वहां के डीएम की जांच में इन संस्थानों में भयंकर गड़बड़ियां मिली थीं। इस पर इनके विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति या शुल्क भरपाई का लाभ देने पर रोक लगा दी गई।
इन संस्थानों ने सत्र 2016-17 में अपने यहां पीजीडीएम कोर्स में सैकड़ों विद्यार्थियों को योजना का लाभ दिलाने के लिए उनके आवेदन फॉर्म अग्रसारित किए थे। उच्चस्तर पर शिकायत की गई थी कि इन संस्थानों ने फर्जी छात्र दिखाए हैं। इस पर सहारनपुर के डीएम को जांच कराने के निर्देश दिए गए। डीएम की ओर से भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकतर छात्रों के मोबाइल नंबर बंद मिले। जिनके फोन उठे, उन्होंने पीजीडीएम कोर्स में दाखिला न लेने की बात कही।
सोमवार को समाज कल्याण निदेशक जेपी चौरसिया की अध्यक्षता में गठित राज्यस्तरीय समिति ने संस्थानों का पक्ष सुना। उनके प्रबंधन का कहना था कि उन्होंने जिन विद्यार्थियों को योजना का लाभ दिलाया, उन्होंने प्रवेश लिया था। एक भी फर्जी विद्यार्थी को लाभ नहीं मिला।
संस्थाानों को दिया गया सप्ताह भर का समय
इस पर राज्यस्तरीय समिति ने कहा कि जिन विद्यार्थियों को डीएम की रिपोर्ट में फर्जी बताया गया है, उनका नाम- पता, रिजल्ट की फोटो कॉपी और मोबाइल नंबर उसे उपलब्ध कराया जाए। इस कार्य के लिए संस्थानों को सप्ताह भर का समय दिया गया है।
समाज कल्याण विभाग के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि अगर सप्ताह भर में संतोषजनक जवाब देने में संस्थान प्रबंधन असफल रहा तो उन्हें काली सूची में डाला जाएगा। बता दें कि काली सूची में डालने पर संस्थान को अगले पांच साल तक योजना का लाभ नहीं दिया जाता है। इसकी सूचना भी छात्रवृत्ति के पोर्टल पर प्रदर्शित की जाती है।