सराहनीय : 20 घंटे छात्रा पर रखी ऑनलाइन नजर, बस की ट्रैकिंग कर सुरक्षित घर पहुंचाया
शोहदों से परेशान छात्रा ने राजस्थान के वन स्टॉप सेंटर को कॉल किया। वहां से जानकारी पर लखनऊ की टीम ने भाई संग उसे रेस्क्यू किया। छात्रा शोहदों से परेशान थी। उन्हीं से परेशान होकर भाई-बहन ने पढ़ाई छोड़ने का फैसला किया।
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राजस्थान के कोटा से 901 किमी की दूरी तय करने के लिए गोरखपुर निवासी भाई-बहन बस में सवार हुए। इसमें चढ़े तीन शोहदे इन्हें परेशान करने लगे। इस पर छात्रा ने राजस्थान के वन स्टॉप सेंटर को सूचना दी, जहां से लखनऊ को जानकारी दी गई। इसके बाद यहां की प्रशासनिक अधिकारी सहित तीन सदस्यीय टीम छात्रा व उसके भाई से लगातार 20.30 घंटे संपर्क में रही। इस दौरान बस की ट्रैकिंग होती रही। मंगलवार को दोनों को लखनऊ में सुरक्षित उतारकर सेंटर ले जाया गया। यहां बयान दर्ज कराने के बाद बस से गोरखपुर भेज दिया। रात में दोनों सुरक्षित पिता के पास पहुंच गए।
वन स्टॉप सेंटर की मैनेजर अर्चना सिंह के मुताबिक उन्हें बताया गया कि गोरखपुर की छात्रा व उसका भाई कोटा में मेडिकल की कोचिंग करते हैं। छात्रा को तीन युवक परेशान कर रहे थे। इनसे तंग आकर भाई-बहन ने पढ़ाई छोड़ने का फैसला लिया और सोमवार को ट्रेवेल्स एजेंसी की बस पर चढ़े। थोड़ी दूर पर शोहदे भी बस में चढ़ गए और छात्रा को दुष्कर्म व जान से मारने की धमकी दी। विरोध पर एक शोहदा पिस्तौल दिखाने लगा।
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इस पर छात्रा ने राजस्थान के वन स्टॉप सेंटर को कॉल कर सूचना दी। वहां से रात 11.30 बजे अर्चना सिंह को जानकारी दी गई। इसके बाद तत्काल वन स्टॉप सेंटर की सिपाही रंजना व रेस्क्यू टीम सदस्य मिताली अवस्थी को लगाया गया। अर्चना भी लगातार छात्रा के संपर्क में थी।
व्हाट्सएप, एसएमएस से रखा संपर्क
अर्चना सिंह के मुताबिक शोहदों को संदे0ह न हो, इसके लिए व्हाट्सएप व एसएमएस का सहारा लिया गया। वह छात्रा के मोबाइल पर लगातार मैसेज कर जानकारी लेती रहीं। एक टीम ऑनलाइन बस की ट्रैकिंग कर रही थी। मंगलवार सुबह 8.45 बजे बस ट्रांसपोर्टनगर स्थित शहीद पथ के मोड़ पर पहुंचने से एक घंटे पहले ही वन स्टॉप सेंटर की टीम पहुंच गई थी। इसके बाद छात्रा व उसके भाई को सुरक्षित उतारकर सेंटर ले जाया गया। यहां बयान दर्ज करवाकर पिता से बात करवाई गई।
तीन युवक लगातार कर रहे थे परेशान
छात्रा ने बताया कि तीनों युवक उसके हॉस्टल के सामने पीजी में रहते हैं। उसने वार्डेन से शिकायत की, पर कुछ न हुआ। भाई से बातचीत की और फिर पिता को बताया। उन्होंने घर लौटने के लिए कह दिया। अर्चना सिंह के मुताबिक दोपहर एक बजे भाई-बहन को आलमबाग बस स्टैंड पहुंचाकर बस में बैठाया गया। चालक व परिचालक को निर्देश दिया गया कि दोनों को सुरक्षित गोरखपुर में इनके पिता को सुपुर्द करें। टीम चालक, परिचालक से फोन पर लगातार संपर्क में रही। मंगलवार रात करीब आठ बजे दोनों पिता के पास सुरक्षित पहुंचे। तीनों ने वन स्टॉप सेंटर की टीम को धन्यवाद दिया।