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वेंटिलेटर के लिए एक और मरीज ने तोड़ा दम: आईसीयू के रास्ते में ही उखड़ गईं सांसें, नहीं सुधरी व्यवस्था
Sun, 23 Jul 2023 03:06 PM IST
ishwar ashish
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sun, 23 Jul 2023 03:06 PM IST
सार
हाल-ए-बलरामपुर अस्पताल: शुक्रवार को मरीज की मौत के बाद जिम्मेदारों ने कहा था कि अब स्ट्रेचर मरीज से आईसीयू नहीं भेजेंगे। 24 घंटे बाद भी याद नहीं रहा। इमरजेंसी से करीब 300 मीटर दूर आईसीयू के लिए गंभीर मरीज को स्ट्रेचर पर भेज दिया...।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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विस्तार
बलरामपुर अस्पताल में वेंटिलेटर के लिए एक और मरीज फैसल उर्फ गुड्डू (28) ने दम तोड़ दिया। गुड्डू को भी इमरजेंसी से स्ट्रेचर पर आईसीयू में शिफ्ट किया जा रहा था। इमरजेंसी से करीब 300 मीटर दूर आईसीयू के रास्ते में ही मरीज की नाक से खून बहने लगा तो स्टाफ उसे लेकर फिर इमरजेंसी की ओर मुड़ा। वहां कुछ देर में ही उसकी सांसें उखड़ गईं।
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खदरा के रहने वाले फैसल उर्फ गुड्डू को शुक्रवार को गंभीर हालत में इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा था। शनिवार शाम हालत गंभीर होने पर स्टाफ ने मरीज को आईसीयू में भेजने का फैसला लिया। स्टाफ स्ट्रेचर पर मरीज को लेकर आईसीयू में शिफ्ट करा रहा था। आधे रास्ते पहुंचते ही मरीज की नाक से तेजी से खून बहने लगा। घबराया स्टाफ मरीज को आईसीयू के बजाय फिर से इमरजेंसी ले आया। वहां डॉक्टरों ने मरीज की जान बचाने की कोशिश की मगर कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीज लिवर की गंभीर बीमारी से ग्रस्त था। वह गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हुआ था। वहीं परिजनों ने इलाज में कोताही का आरोप लगाया है।
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निदेशक डॉ. एके सिंह ने सिर्फ दावे किए, व्यवस्था नहीं सुधारी
शुक्रवार दोपहर खदरा के ही रहने वाले खालिद (82) को बेहद नाजुक हालत में स्ट्रेचर से आईसीयू में शिफ्ट किया जा रहा था। खालिद की मौत के बाद निदेशक डॉ. एके सिंह ने कहा था-इमरजेंसी से अति गंभीर मरीज को आईसीयू भेजने पर धूप से होकर गुजरना पड़ता है। उन्होंने कहा था, अब ऐसे मरीजों को स्ट्रेचर के बजाय एंबुलेंस से भेजा जाएगा। पर, उन्होंने दावा तो कर दिया, व्यवस्था नहीं सुधारी।
तबीयत बिगड़ने पर तीमारदार ने आईसीयू ले जाने से किया मना
बलरामपुर अस्पताल के सीएमएस डॉ. अतुल मेहरोत्रा का कहना है कि मरीज को आईसीयू में शिफ्ट कराया जा रहा था। इसी दौरान उसकी हालत बिगड़ गई थी। इसके बाद तीमारदार ने आईसीयू ले जाने से मना कर दिया था। इमरजेंसी में इलाज के दौरान मरीज की मौत हो गई।