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वन नेशन, वन इलेक्शन: अभी तो हम एक मतदाता सूची भी नहीं बना सके, पायलट प्रोजेक्ट पूरा होने का इंतजार
Sun, 03 Sep 2023 08:56 AM IST
शाहरुख खान
सचिन मुद्गल, अमर उजाला, लखनऊ
सचिन मुद्गल, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 03 Sep 2023 08:56 AM IST
सार
उत्तर प्रदेश में एक मतदाता सूची बनाने का काम भी परवान नहीं चढ़ सका। जानकार बताते हैं कि करीब एक दशक पहले विधानसभा, पंचायत चुनाव और निकाय चुनाव की एक मतदाता सूची तैयार करने की चर्चा शुरू हुई थी। लेकिन उसके बाद 2021 में पंचायत चुनाव, 2022 में विधानसभा चुनाव और 2023 में फिर निकाय चुनाव आने के कारण एक मतदाता सूची बनाने का काम सफल नहीं हो सका
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विस्तार
देश में वन नेशन-वन इलेक्शन को लेकर कवायद शुरू हो गई है, लेकिन प्रदेश में बीते सात-आठ साल में विधानसभा, पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव की एक मतदाता सूची बनाने का काम भी परवान नहीं चढ़ सका।
जानकार बताते हैं कि करीब एक दशक पहले विधानसभा, पंचायत चुनाव और निकाय चुनाव की एक मतदाता सूची तैयार करने की चर्चा शुरू हुई थी। भारत निर्वाचन आयोग को प्रस्ताव भी भेजा गया था। मुजफ्फरनगर की खतौली और बाराबंकी को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया।
इसमें मुख्य निर्वाचन अधिकारी, राज्य निर्वाचन आयोग और दोनों जिला प्रशासन के स्तर से कार्यवाही होनी है। पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार शुक्ला का कहना है कि बाराबंकी में एक मतदाता सूची बनाने का प्रयास हुआ था, लेकिन उसके बाद 2021 में पंचायत चुनाव, 2022 में विधानसभा चुनाव और 2023 में फिर निकाय चुनाव आने के कारण एक मतदाता सूची बनाने का काम सफल नहीं हो सका।
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पायलट प्रोजेक्ट पूरा होने का इंतजार
राज्य निर्वाचन आयोग के विशेष कार्याधिकारी एसके सिंह का कहना है कि बाराबंकी में एक मतदाता सूची का कार्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी के स्तर से होना है। दोनों मतदाता सूची के डाटा का मिलान सहित अन्य प्रक्रिया पूरी करनी है। बाराबंकी और मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा में इसका प्रयास किया जा रहा है। लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हुआ है।
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जानकार बताते हैं कि करीब एक दशक पहले विधानसभा, पंचायत चुनाव और निकाय चुनाव की एक मतदाता सूची तैयार करने की चर्चा शुरू हुई थी। भारत निर्वाचन आयोग को प्रस्ताव भी भेजा गया था। मुजफ्फरनगर की खतौली और बाराबंकी को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया।
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इसमें मुख्य निर्वाचन अधिकारी, राज्य निर्वाचन आयोग और दोनों जिला प्रशासन के स्तर से कार्यवाही होनी है। पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार शुक्ला का कहना है कि बाराबंकी में एक मतदाता सूची बनाने का प्रयास हुआ था, लेकिन उसके बाद 2021 में पंचायत चुनाव, 2022 में विधानसभा चुनाव और 2023 में फिर निकाय चुनाव आने के कारण एक मतदाता सूची बनाने का काम सफल नहीं हो सका।
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पायलट प्रोजेक्ट पूरा होने का इंतजार
राज्य निर्वाचन आयोग के विशेष कार्याधिकारी एसके सिंह का कहना है कि बाराबंकी में एक मतदाता सूची का कार्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी के स्तर से होना है। दोनों मतदाता सूची के डाटा का मिलान सहित अन्य प्रक्रिया पूरी करनी है। बाराबंकी और मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा में इसका प्रयास किया जा रहा है। लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हुआ है।
यूपी सरकार ने 2018-19 में ही दी थी सहमति
योगी सरकार ने 2018-19 में ही वन नेशन-वन इलेक्शन पर अपनी सहमति दे दी थी। सरकार ने उस दौरान तत्कालीन कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की थी। कमेटी की संस्तुतियों को राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को भी भेजा था। क्षमता और सुरक्षा व्यवस्था का आकलन करना होगा
योगी सरकार ने 2018-19 में ही वन नेशन-वन इलेक्शन पर अपनी सहमति दे दी थी। सरकार ने उस दौरान तत्कालीन कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की थी। कमेटी की संस्तुतियों को राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को भी भेजा था। क्षमता और सुरक्षा व्यवस्था का आकलन करना होगा
राज्य निर्वाचन आयोग के पूर्व आयुक्त एसके अग्रवाल का कहना है कि वन नेशन-वन इलेक्शन का उद्देश्य तब ही सफल होगा जब लोकसभा, विधानसभा, पंचायत और निकाय सभी चुनाव एक साथ कराए जाएं। इसके लिए क्षमता और सुरक्षा व्यवस्था का आकलन जरूरी है।