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बाईक बोट घोटाले में एक और गिरफ्तारी, दिल्ली एनसीआर में हुई छापेमारी
Mon, 21 Dec 2020 07:06 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 21 Dec 2020 07:06 PM IST
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प्रवर्तन निदेशालय
- फोटो : social media
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बाईक बोट घटाले व आम्रपाली समूह से जुड़ी जाँच के सिलसिले में दिल्ली व एनसीआर में आधा दर्जन जगहों पर छापा मारा। इस अभियान में बाईक बोट घोटाले के एक वांछित आरोपी को गिरफ्तार किया गया। हापुड़ से गिरफ्तार आरोपी मनोज त्यागी को निदेशालय कि टीम ने लखनऊ में पीएमएलए कोर्ट में पेश किया। निदेशालय अब उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगा।
ईडी ने रविवार को दिल्ली नोएडा, गाजियाबाद और हापुड़ में छह स्थानों पर छापा मारा। यह अभियान बाइक बोट घोटाले और आम्रपाली समूह से जुड़े मनी लान्ड्रिंग के दो अलग-अलग मामलों की जांच के सिलसिले में चलाया गया। ईडी ने आम्रपाली समूह से जुड़ी जांच के सिलसिले में दक्षिणी दिल्ली स्थित एक कंपनी और गाजियाबाद स्थित एक फर्म में छापा मारा, जबकि बाइक बोट घोटाले में चार जगह छापा मारा गया।
प्रवर्तन निदेशालय के हत्थे चढा मनोज त्यागी एफ7 ब्रॉडकास्ट प्राइवेट लिमिटेड का पूर्व निदेशक बताया जा रहा है। त्यागी बाइक बोट घोटाले के मुख्य आरोपी विजेंद्र सिंह हुड्डा के सबसे करीबियों में से एक था और उसके करोड़ों रुपये ठिकाने लगाने में मदद कर चुका था। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार त्यागी से निदेशालय इस मामले के कई राज जानने की उम्मीद कर रहा है।
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निदेशालय के अधिकारियों ने बताया कि रविवार को छापों के दौरान बाइक बोट घोटाले से जुड़े बहुत सारे दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और 9.5 लाख रुपये की नकदी भी जब्त की गई। अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए त्यागी की भूमिका बाइक बोट की प्रमोटर कंपनी गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड के सिलसिले में संदेह के दायरे में है।
निदेशालय के अधिकारियों का कहना है कि त्यागी ने मामले से जुड़े तथ्य व सबूत छिपाकर एजेंसी को गुमराह करने की कोशिश की थी। जांच के दौरान सामने आया कि त्यागी लगातार हुड्डा के संपर्क में था और उसके निर्देशों पर कामकाज कर रहा था, लेकिन उसने ईडी के सामने पूछताछ के दौरान यह बात छिपाई थी। ईडी के मुताबिक, रविवार को इसी घोटाले में साहा इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर व निदेशक अनिल कुमार साहा के ठिकाने पर भी छापा मारा गया।
जाँच में सामने आया है कि त्यागी की कंपनी एफ7 ब्रॉडकास्ट में बाइक बोट से जुड़ी विभिन्न कंपनियों ने करीब 13.41 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। इसके अलावा इस कंपनी में विभिन्न शैक्षिक संस्थानों और ट्रस्ट से भी करीब 2.63 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। निदेशालय के अफसरों का कहना है कि यह पैसा भी बाइक बोट निवेशकों से एकत्र फंड से ही ट्रांसफर किया गया था। बताया गया कि बाइक बोट घोटाले के मास्टरमाइंड संजय भाटी ने भी पूछताछ के दौरान त्यागी का नाम लिया था। संजय ने बताया था कि उसकी तरफ से वितीय लेनदेन के लिए हस्ताक्षरित सभी चेक त्यागी ने ही लिए थे।
आम्रपाली मामले में दो जगह छापामारी
बाईक बोट घोटाले के साथ ही प्रवर्तन निदेशालय ने आम्रपाली समूह से जुड़े मामले की जाँच के तहत दो जगह छापे मारे। यह छापे आम्रपाली समूह को सप्लाई करने वाले मेसर्स भागीरथी ट्यूबस और मेसर्स जौरा इंफ्राटेक पराईवेत लिमिटेड से जुड़े ठिकानों पर मारे गए। गौरतलब है कि इस मामले में निदेशालय ने पिछले दिनों कंपनी के मुख्य वित अधिकारी चंद्र प्रकाश वाधवा को गिरफ्तार किया था जिससे रिमांड पर पूछताछ की जा रही है।
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ईडी ने रविवार को दिल्ली नोएडा, गाजियाबाद और हापुड़ में छह स्थानों पर छापा मारा। यह अभियान बाइक बोट घोटाले और आम्रपाली समूह से जुड़े मनी लान्ड्रिंग के दो अलग-अलग मामलों की जांच के सिलसिले में चलाया गया। ईडी ने आम्रपाली समूह से जुड़ी जांच के सिलसिले में दक्षिणी दिल्ली स्थित एक कंपनी और गाजियाबाद स्थित एक फर्म में छापा मारा, जबकि बाइक बोट घोटाले में चार जगह छापा मारा गया।
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प्रवर्तन निदेशालय के हत्थे चढा मनोज त्यागी एफ7 ब्रॉडकास्ट प्राइवेट लिमिटेड का पूर्व निदेशक बताया जा रहा है। त्यागी बाइक बोट घोटाले के मुख्य आरोपी विजेंद्र सिंह हुड्डा के सबसे करीबियों में से एक था और उसके करोड़ों रुपये ठिकाने लगाने में मदद कर चुका था। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार त्यागी से निदेशालय इस मामले के कई राज जानने की उम्मीद कर रहा है।
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निदेशालय के अधिकारियों ने बताया कि रविवार को छापों के दौरान बाइक बोट घोटाले से जुड़े बहुत सारे दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और 9.5 लाख रुपये की नकदी भी जब्त की गई। अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए त्यागी की भूमिका बाइक बोट की प्रमोटर कंपनी गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड के सिलसिले में संदेह के दायरे में है।
निदेशालय के अधिकारियों का कहना है कि त्यागी ने मामले से जुड़े तथ्य व सबूत छिपाकर एजेंसी को गुमराह करने की कोशिश की थी। जांच के दौरान सामने आया कि त्यागी लगातार हुड्डा के संपर्क में था और उसके निर्देशों पर कामकाज कर रहा था, लेकिन उसने ईडी के सामने पूछताछ के दौरान यह बात छिपाई थी। ईडी के मुताबिक, रविवार को इसी घोटाले में साहा इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर व निदेशक अनिल कुमार साहा के ठिकाने पर भी छापा मारा गया।
जाँच में सामने आया है कि त्यागी की कंपनी एफ7 ब्रॉडकास्ट में बाइक बोट से जुड़ी विभिन्न कंपनियों ने करीब 13.41 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। इसके अलावा इस कंपनी में विभिन्न शैक्षिक संस्थानों और ट्रस्ट से भी करीब 2.63 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। निदेशालय के अफसरों का कहना है कि यह पैसा भी बाइक बोट निवेशकों से एकत्र फंड से ही ट्रांसफर किया गया था। बताया गया कि बाइक बोट घोटाले के मास्टरमाइंड संजय भाटी ने भी पूछताछ के दौरान त्यागी का नाम लिया था। संजय ने बताया था कि उसकी तरफ से वितीय लेनदेन के लिए हस्ताक्षरित सभी चेक त्यागी ने ही लिए थे।
आम्रपाली मामले में दो जगह छापामारी
बाईक बोट घोटाले के साथ ही प्रवर्तन निदेशालय ने आम्रपाली समूह से जुड़े मामले की जाँच के तहत दो जगह छापे मारे। यह छापे आम्रपाली समूह को सप्लाई करने वाले मेसर्स भागीरथी ट्यूबस और मेसर्स जौरा इंफ्राटेक पराईवेत लिमिटेड से जुड़े ठिकानों पर मारे गए। गौरतलब है कि इस मामले में निदेशालय ने पिछले दिनों कंपनी के मुख्य वित अधिकारी चंद्र प्रकाश वाधवा को गिरफ्तार किया था जिससे रिमांड पर पूछताछ की जा रही है।