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बिल्डरों की बाधा दूर, जून 2021 तक पूरे हो सकेंगे एक लाख अधूरे आवास
Wed, 04 Dec 2019 05:31 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 04 Dec 2019 05:31 AM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता वाली प्रदेश कैबिनेट ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में अपूर्ण ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं को पूरा करने व होम बायर्स को राहत पहुंचाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दे दी।
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इससे जून-2021 तक करीब एक लाख अधूरे आवास बनकर तैयार हो जाने की उम्मीद है। इसके अलावा बिना भूमि अधिग्रहण किए डवलपर को जमीन बेंचने के आरोपी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मंजूरी दे दी है।
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औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने कैबिनेट निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि योगी सरकार ने होम बायर्स व बिल्डर्स की समस्याओं के समाधान के लिए शुरू से ही प्रयासरत रही है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए एक मंत्रिसमूह भी बनाया था।
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इसके अलावा केंद्र सरकार के सचिव शहरी आवास की अध्यक्षता में बनी कमेटी व रेरा यूपी की ओर से इस संबंध में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। सभी सुझावों पर गौर करने के बाद कैबिनेट ने इस समस्या के समाधान के लिए नीति तय कर दी है।
इस नीति के तहत नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में आवंटी व विकासकर्ताओं को कुछ परिस्थितियों में प्राधिकरणों द्वारा शून्य अवधि (जीरो पीरियड) मंजूर की जाएगी।
मसलन, बिल्डर्स को किसी आदेश में विसंगति के कारण, एनजीटी या सरकार के किसी आदेश की वजह से या जमीन तक पहुंचने के लिए रास्ता न होने अथवा अन्य किसी तरह के विवाद की वजह से प्रोजेक्ट पूरा करने में देरी हुई तो वह अवधि ‘जीरो पीरियड’ के रूप में स्वीकार की जाएगी।
महाना ने बताया कि आवंटी व विकासकर्ता प्राधिकरण को यह शपथपत्र भी देंगे कि इस नीति के अंतर्गत जो भी सुविधा व लाभ उसे प्राप्त होंगे, उससे संबंधित कोई भी धनराशि होम बायर्स से नहीं ली जाएगी। एक सवाल के जवाब में महाना ने बताया कि बैंकों से लिए गए ऋण पर जीरो पीरियड में राहत संबंधी कोई निर्णय नहीं हुआ है। इस संबंध में केंद्र सरकार विचार कर रही है।
अधिग्रहण किए बिना ही जमीन बेंचने वाले कर्मी नपेंगे
महाना ने बताया कि यह बात भी सामने आई है कि पिछली सरकार के समय में जल्दबाजी में बिना अधिग्रहण किए ही जमीन बेंच दी गई। इससे भी विवाद पैदा हुए और प्रोजेक्ट पूरे नहीं हो सके। उन्होंने बताया कि ऐसे सभी जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।
अधूरे प्रोजेक्ट पूरा करने को को-डवलपर का लेंगे साथ
जिन विकासकर्ताओं व आवंटियों द्वारा रुकी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए उचित प्रयास नहीं किए, ऐसी परियोजनाओं को पूरा कराने के लिए प्राधिकरणों को अधिकार दिया गया है। प्राधिकरण को-डेवलपर द्वारा उन परियोजनाओं को पूर्ण कराने की कार्यवाही करेंगे।
इन्हें मिलेगा ‘जीरो पीरियड’ का लाभ
- शून्य अवधि की सुविधा ऐसे विकासकर्ताओं को ही मिलेगी जो फ्लैट बायर्स के हितों को संरक्षित करने के लिए जून-2021 तक परियोजना पूर्ण करने का लिखित आश्वासन देते हैं।
- यदि विकासकर्ता द्वारा 30 जून, 2021 तक परियोजना पूरी नहीं की जाती है तो शून्य अवधि से संबंधित सुविधा निरस्त कर दी जाएगी।
- जून-2021 तक परियोजना पूर्ण करने पर प्राधिकरणों द्वारा समय विस्तारण शुल्क से छूट दी जाएगी। यदि परियोजना पूरी नहीं की जाती है तो समय विस्तारण शुल्क से जुड़ी छूट निरस्त कर दी जाएगी।
- जिस अवधि के लिए शून्यकाल मंजूर किया जाएगा, उस अवधि को निर्माण के लिए स्वीकृत समयसीमा में शामिल नहीं किया जाएगा।
- अन्य सभी परियोजनाओं के लिए प्राधिकरणों के स्तर पर बनाई नीति ही लागू रहेगी।
- प्राधिकरणों को जो समय विस्तारण शुल्क प्राप्त हो चुका है उसकी कोई वापसी अथवा समायोजन नहीं किया जाएगा।
लाभ के लिए दो महीने में करना होगा आवेदन
यह नीति सिर्फ रेजिडेन्शियल ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी पर लागू होगी। योजना का लाभ उठाने के लिए आवंटी व विकासकर्ता को संबंधित प्राधिकरण में शासनादेश जारी होने की तिथि से दो माह के अंदर आवेदन करना होगा।