झटका: यूपीटीयू ने 25,000 छात्रों की पढ़ाई पर लगाई रोक
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जांच के लिए गठित टीम की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि प्रदेश में 110 इंजीनियरिंग कॉलेज बिना संबद्घता ही पढ़ाई करवा रहे थे, जिस पर यूपीटीयू ने प्रतिबंध लगा दिया है।
उप्र प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) ने 110 इंजीनियरिंग कॉलेजों के करीब 25 हजार छात्रों की पढ़ाई पर रोक लगा दी है। ये कॉलेज बिना संबद्धता के ही चलाए जा रहे हैं।
इसका खुलासा तब हुआ जब 44 इंजीनियरिंग कॉलेजों की जांच के लिए गठित कमेटी ने पड़ताल शुरू की।
डॉ. जेपी सैनी की अध्यक्षता में गठित जांच कमेटी ने जब फाइलें खंगालनी शुरू की तो गड़बड़ी सामने आती चली गई और ऐसे कॉलेजों की संख्या 110 तक पहुंच गई।
कॉलेजों से मांगा गया जवाब
कुलपति डॉ. आरके खांडल ने सख्त रुख अपनाते हुए इनकी आगे की पढ़ाई रोकने का निर्णय किया है। अब सभी कॉलेजों से इस मामले में जवाब मांगा जाएगा।
उसके बाद कोई अंतिम फैसला होगा। स्टूडेंट्स के भविष्य पर भी आखिरी फैसला इसके बाद ही किया जाएगा। अभी सिर्फ उनकी पढ़ाई को रोका गया है।
फिलहाल इस पूरे मामले में रजिस्ट्रार पद से हटाए गए यूएस तोमर को ही दोषी बताया जा रहा है।
उन्होंने इन इंजीनियरिंग कॉलेजों की फाइलें दबाए रखीं और समय रहते प्रक्रिया पूरी नहीं की। एक के बाद एक यूएस तोमर के कारनामे सामने आ रहे हैं।
जांच कमेटी के अफसर हैरान
खुद जांच कमेटी के अध्यक्ष डॉ. जेपी सैनी इस गड़बड़झाले को देखकर हैरान हैं। अभी आगे और अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।
इससे यूनिवर्सिटी प्रशासन इन्कार नहीं कर रहा है। मालूम हो कि सत्र 2013-14 में इंजीनियरिंग कॉलेजों की संबद्धता के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 15 मई अंतिम तारीख तय की थी।
इसके बाद संबद्धता के लिए जब 44 इंजीनियरिंग कॉलेजों की फाइलें पेश की गईं तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना को देखते हुए उन्हें रोक दिया गया।
इसके बाद इन 44 कॉलेजों के स्टूडेंट्स को प्रथम व द्वितीय सेमेस्टर में प्रोविजनल दाखिला देकर परीक्षा में बैठने दिया गया। इनके भविष्य पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। मामला खुलने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जांच के लिए कमेटी बनाई।
बिना संबद्घता काउंसिलिंग में शामिल
कमेटी ने जब पूरे प्रकरण की पड़ताल की तो कॉलेजों की संख्या बढ़कर 110 हो गई।
दरअसल, जब 44 कॉलेजों की संबद्धता की फाइलें वापस कर दी गईं तो बाकी अन्य कॉलेजों की फाइलें संबद्धता कमेटी के सामने रखी ही नहीं गईं।
इन्हें सीधे दाखिले के लिए काउंसलिंग में शामिल करवा दिया गया। प्राविधिक शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों ने भी इस मामले में कोई तत्परता नहीं दिखाई।
मांगा जा रहा है जवाब
फिलहाल बीटेक, एमटेक, एमफॉर्मा आदि कोर्स में पढ़ रहे स्टूडेंट्स का भविष्य फंस गया है। अब यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इन कॉलेजों को तलब कर उनका जवाब लेना शुरू कर दिया है।
कुछ कॉलेजों ने बयान दिया है कि उन्होंने तो तय समय पर अपनी प्रक्रिया पूरी कर दी थी लेकिन आगे क्या हुआ, इस पर बहुत ध्यान इसलिए नहीं दिया क्योंकि उन्हें दाखिला लेने के लिए काउंसलिंग में शामिल करने की छूट मिल गई थी।
उन्हें पता नहीं था कि उनके साथ धोखाधड़ी हो रही है। यूनिवर्सिटी प्रशासन अब स्टूडेंट्स की पढ़ाई पर रोक लगाकर और कॉलेजों का पक्ष जानकर दोषी अधिकारी पर कार्रवाई करेगा।
एमटेक व एमफॉर्मा के सभी छात्र अवैध
जिन 110 इंजीनियरिंग कॉलेजों के करीब 25 हजार छात्रों की पढ़ाई पर रोक लगी है उनमें एमटेक व एमफॉर्मा का कोई भी छात्र वैध नहीं है। जिन संस्थानों ने एमटेक व एमफॉर्मा में दाखिले लिए हैं उनके यहां संबद्धता ही नहीं है।
पूरे मामले का भंडाफोड़ होने के बाद यूपीटीयू प्रशासन भी सकते में है। वह रजिस्ट्रार पद से हटाए गए यूएस तोमर को दोषी मान रहा है, क्योंकि संबद्धता की फाइलें यूनिवर्सिटी से शासन तक उन्हीं के इशारों पर नाचती रही।
इस मामले में यूपीटीयू के कुलपति डॉ. आरके खांडल का कहना है कि इंजीनियरिंग कॉलेजों की संबद्धता के नाम पर अभी तक जो खेल होता आया है, उसका पूरी तरह भंडाफोड़ हो चुका है। 44 नहीं बल्कि कॉलेजों की संख्या 110 के लगभग पहुंच गई है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन पूरे मामले में काफी सख्त रुख अपनाए हुए है। हम दोषी अधिकारी को किसी भी कीमत पर माफ नहीं करेंगे। स्टूडेंट्स के भविष्य पर कोई भी फैसला अब आगे कानूनी राय लेकर ही किया जाएगा।