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इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक करोड़ फैसले होंगे ऑनलाइन, जानें-क्यों किया जा रहा है ये

Fri, 19 Jan 2018 01:46 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 19 Jan 2018 01:46 AM IST
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one crore decisions of allahabad high court to go on line.
- फोटो : amar ujala

मुकदमों की संख्या के लिहाज से दुनिया के सबसे बड़े कोर्ट में शुमार इलाहाबाद हाईकोर्ट और उसकी लखनऊ खंडपीठ अगले आठ महीनों में अपने 1 करोड़ फैसलों को ऑनलाइन करेगा। ये निर्णय हाईकोर्ट की 1860 में स्थापना के बाद से अब तक के हैं।

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इन निर्णयों के करीब 50 करोड़ करोड़ पृष्ठों को स्कैन किया जा रहा है। वेरिफाई व फाइलों को डिजिटली साइन करके इन्हें हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। इसका फायदा वादकारियों और वकीलों से लेकर आम नागरिकों व अध्ययनकर्ताओं तक को मिलेगा।
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हाईकोर्ट के जस्टिस दिलीप गुप्ता, जस्टिस विवेक चौधरी, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस देवेंद्र कुमार अरोरा और जस्टिस अंजनी कुमार मिश्रा ने गुरुवार को यहां न्यायिक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान (जेटीआरआई) में आयोजित प्रेसवार्ता में यह जानकारी दी। वहीं न्यायपालिका की कंप्यूटर कमेटी की पहली नेशनल कॉन्फ्रेंस जेटीआरआई में शनिवार को शुरू होगी। इसमें सुप्रीम कोर्ट और देश के 24 हाईकोर्ट की कंप्यूटर कमेटियों से जुड़े जज व न्यायिक अधिकारी शामिल होंगे।
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जेटीआरआई के जज इंचार्ज जस्टिस दिलीप गुप्ता ने बताया कि कॉन्फ्रेंस में सभी हाईकोर्ट के वे सदस्य शामिल होंगे जो संबंधित कोर्ट की कंप्यूटराइजेशन कमेटी से जुड़े हैं। 20 जनवरी को उद्घाटन समारोह में सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी के चेयरमैन जस्टिस मदन बी लोकुर शामिल होंगे। वे देश के सभी न्यायालयों के डिजिटलाइजेशन की निगरानी समिति के प्रमुख हैं।

कॉन्फ्रेंस को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस दिलीप बाबासाहेब भोसले की पहल बताया जा रहा है। पहले दिन पांच वर्किंग सेशन भी होंगे, जो न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया में नई तकनीक के उपयोग और उसे प्रभावी बनाने पर केंद्रित रहेंगे। 21 जनवरी को समापन समारोह में जस्टिस एएम खानविलकर जजों को संबोधित करेंगे।

आगे लक्ष्य : जिला अदालतों के निर्णय भी होंगे डिजिटलाइज

one crore decisions of allahabad high court to go on line.

अब तक हाईकोर्ट के निर्णयों की 24 लाख से अधिक फाइलों के 14.67 करोड़ पेज स्कैन हो चुके हैं। वहीं 35 करोड़ से अधिक पेज स्कैन होने हैं। इस काम को छह से आठ महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जस्टिस गुप्ता ने बताया कि जिला अदालतों के निर्णयों को भी डिजिटलाइज किया जा रहा है।

हाईकोर्ट ने इसके लिए न्यायिक अधिकारी आरएन यादव को सेंट्रल प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर बनाया है। यूपी बेहद बड़ा राज्य है। यहां 75 जिलों के लिए 72 जिला अदालतें, 78 आउटलाइन अदालतें (बड़े जिले में जिला अदालतों की शाखाएं), 18 रेलवे कोर्ट हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट को इसी हफ्ते नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड से जोड़ा गया है।

इसके जरिए मामलों की जानकारी तत्काल देश भर में हासिल की जा सकती है। यूपी की जिला अदालतों में डिजिटलाइजेशन में कोई खामी होने पर उन्हें तत्काल ठीक कराया जाता है। ग्रिड पर उपलब्ध जानकारियों में 98 प्रतिशत एक्यूरेसी आंकी गई है।

पेपरलेस बेंच भी होगी शुरू
कॉन्फ्रेंस के पहले दिन जस्टिस मदन बी लोकुर लखनऊ खंडपीठ में एक ई-कोर्ट (पेपरलेस कोर्ट) की डिवीजन बेंच का शुभारंभ करेंगे। 19 अगस्त 2017 को जस्टिस लोकुर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट और लखनऊ खंडपीठ में देश का पहला ई-कोर्ट शुरू किया था, इसकी एक-एक बेंच चल रही हैं। निकट भविष्य में सभी बेंच ई-कोर्ट होंगी। इससे मुकदमों के अलग से डिजिटलाइजेशन की जरूरत खत्म हो जाएगी।

डिजिटलाइजेशन इसलिए जरूरी

one crore decisions of allahabad high court to go on line.

1860 से अब तक इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक करोड़ से अधिक निर्णय आ चुके हैं, जिनकी फाइलों से अभिलेखागार भरे हुए हैं। जस्टिस गुप्ता ने बताया कि अभिलेखागार से किसी मुकदमे की कॉपी मंगवाना काफी मुश्किल हो चुका था। जगह इतनी कम बची थी कि स्टाफ इन कक्षों में मुकदमों की फाइलों पर चलते हुए वांछित फाइल को तलाश रहे थे। वहीं, इन फाइलों को कभी न कभी नष्ट होना ही है, ऐसे में इन्हें बचाने के लिए डिजिटलाइजेशन सही रास्ता है। जज और वकील लैपटॉप पर तत्काल इन फाइलों को पढ़ सकेंगे।

अब सॉफ्टवेयर दे रहा तारीख
जस्टिस विक्रम नाथ ने बताया कि डिजिटलाइजेशन से मुकदमों की अगली तारीखें सॉफ्टवेयर के जरिये दी जा रही हैं। ऐसे मामले, जो अनडेटेड रहते हैं या जिनमें दो या चार हफ्ते बाद सुनवाई होनी है, उनमें हाईकोर्ट का सीआईसी 1.0 सॉफ्टवेयर खुद ही अगली तारीख देता है। हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट में दो प्रतिशत मामले ही अनडेटेड हैं, जबकि कई राज्यों में यह आंकड़ा 40 प्रतिशत तक है।

65 प्रतिशत फंड का इस्तेमाल  
जस्टिस गुप्ता ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार से इलाहाबाद हाईकोर्ट को वित्त वर्ष 2017-18 के लिए जारी फंड का 65 प्रतिशत उपयोग किया जा चुका है। मार्च तक इसका अधिकतम उपयोग कर लिया जाएगा।

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