गरजे तो खूब मगर बरसे बिना ही निकल गए ओमप्रकाश राजभर
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योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने शनिवार को रैली में अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की। इसके लिए वह कई महीने से प्रदेश भर में भ्रमण कर रहे थे। रमाबाई आंबेडकर धरना स्थल पर उम्मीद से कम भीड़ के बीच उन्होंने तेवर तो खूब दिखाए, पर इस्तीफा नहीं दिया। ‘अमर उजाला’ ने पहले ही खुलासा कर दिया था कि राजभर रैली में इस्तीफा देने वाले नहीं हैं।
पार्टी के 16वें स्थापना दिवस समारोह पर हुई रैली में राजभर ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर पिछड़ों और दलितों का विरोधी होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वह सरकार से अतिपिछड़ों के 27 फीसदी आरक्षण को तीन श्रेणियों पिछड़ा, अति पिछड़ा व सर्वाधिक पिछड़ा व दलितों के 22.5 प्रतिशत आरक्षण को दलित, अति दलित व महादलित में बांटने की बात करते हैं तो वे मंदिर-मजिस्द और हिंदू-मुस्लिम की बात करने लगते हैं। वे इन्हें हिस्सा नहीं देना चाहते।
भीड़ से संवाद वाले अंदाज में राजभर ने कहा, मैं सरकार में मंत्री बनकर रुपये कमाने नहीं आया। गरीबों की लड़ाई लड़ने आया हूं। इस सरकार से मन भर गया है। भाजपा का गुलाम बनकर नहीं रह सकता।
उन्होंने भीड़ से इस्तीफा देने पर सवाल किया तोआवाज गूंज उठी, ‘ओमप्रकाश तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं।’ लगा, राजभर इस्तीफे का एलान कर ही देंगे, पर उन्होंने कहा...अच्छा आप नहीं चाहते कि मैं इस्तीफा दूं...लेकिन आगे संघर्ष बहुत कड़ा होगा। रैली को पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी संबोधित किया।
भैंस के आगे बीन बाजे...
राजभर ने कहा कि गुजरात, बिहार सहित कई राज्यों में शराबबंदी है लेकिन यूपी में मद्यनिषेध व शराब की बिक्री दोनों होती है। उन्होंने लोगों से पूछा कि यहां भी पूर्ण शराबबंदी होनी चाहिए या नहीं? राजभर ने पूछा, आप अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा चाहते हैं या मंदिर-मस्जिद चाहते हैं? एससी-एसटी के बच्चों को मास्टर, सिपाही, एसपी, कलेक्टर बनाने के लिए पढ़ाई, हॉस्टल से कोचिंग तक की सुविधा है लेकिन ओबीसी व सामान्य गरीबों के लिए ऐसी सुविधा नहीं है। भाजपा सरकार का हाल ‘भैंस के आगे बीन बाजे, भैंस करे पागुर’ वाला है।
अमित शाह वादाखिलाफी कर रहे
छह-छह महीने में बदले मुख्यमंत्री
राजभर ने कहा कि चुनाव एक बार होता है। मायावती, अखिलेश, भाजपा, कांग्रेस किसी की भी सरकार आती है, पांच वर्ष रहती है। एक ही वर्ग के लोग पूरे समय कुर्सी पर रहते हैं। इसलिए हर छह महीने में मुख्यमंत्री बदलना चाहिए। हर जाति के मुख्यमंत्री को मौका मिलना चाहिए।
राजभर के मुद्दे
- पिछड़ों व एससी के आरक्षण में अति पिछड़ों व अति दलितों को हिस्सेदारी दी जाए।
- सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के मुताबिक एसी-एसटी एक्ट से जुड़े आरोपों में सीओ स्तर के अधिकारी की जांच के बाद मुकदमा दर्ज हो।
- पुलिस की ड्यूटी आठ घंटे की हो। 100 किमी. के दायरे में तैनाती मिले। वर्ष में 120 दिन की छुट्टी। यदि छुट्टी न दें तो वेतन देना पड़ेगा। साइकिल भत्ता की जगह मोटरसाइकिल भत्ता मिले।
- प्रदेश का विभाजन हो और पूर्वांचल, मध्यांचल, पश्चिमांचल व बुंदेलखंड राज्य बने।
- गुजरात की तरह प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी हो।
- सुगम न्याय के लिए हाईकोर्ट की पश्चिमी बेंच की स्थापना हो।