पिछड़ों को आरक्षण में आरक्षण की रिपोर्ट पर राजभर बोले, पुराने तथ्यों को इधर से उधर कर बनाई रिपोर्ट
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आरक्षण को तीन भागों में बांटने की सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर के पास भेज दी गई है। हालांकि, इस रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के लिए इसे पिछड़ा वर्ग आयोग को भेजने पर भी विचार किया जा रहा है। ऐसा हुआ तो इस पर जल्द कोई फैसला नहीं हो पाएगा, क्योंकि अभी तक पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन ही नहीं हुआ है।
वहीं, ओमप्रकाश राजभर का कहना है कि वर्ष 2001 की सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट के तथ्यों को इधर से उधर करके ही इस रिपोर्ट को तैयार किया गया है, लेकिन वे इसे जल्द लागू किए जाने की मांग करेंगे।
प्रदेश सरकार ने पिछड़ों के आर्थिक, सामाजिक व शैक्षणिक अध्ययन और नौकरियों में उनकी भागीदारी पर रिपोर्ट देने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश राघवेंद्र कुमार की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति ने पिछड़े वर्ग के लिए दिए जा रहे 27 प्रतिशत आरक्षण को तीन हिस्सों में बांटने की सिफारिश की है। पिछड़ों को सात फीसदी आरक्षण, अति पिछड़ों को 11 फीसदी और सर्वाधिक पिछड़ों को 9 फीसदी आरक्षण देने की सिफारिश की गई है।
उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, पिछड़ा वर्ग में 12 जातियां, अति पिछड़ा में 59 और सर्वाधिक पिछड़ा में 79 जातियों को रखा गया है। जानकारों का कहना है कि अगर इस रिपोर्ट को लागू किया जाता है तो जहां अति पिछड़ी और सर्वाधिक पिछड़ी जातियां फायदे में रहेंगी, वहीं पिछड़े वर्ग में प्रस्तावित की गईं यादव, कुर्मी, ग्वाल और सुनार जातियों को नुकसान होगा। शासन के सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट का परीक्षण किया जा रहा है। कुछ अधिकारियों का यह भी कहना है कि लोकसभा चुनाव से पहले सरकार शायद ही इस रिपोर्ट पर कोई निर्णय ले।
संशोधन बाद में होते रहेंगे, पहले लागू हो रिपोर्ट
मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट जल्द लागू की जानी चाहिए। फिलहाल इससे संतुष्ट होने या न होने का सवाल नहीं है। लागू होने पर संशोधन तो बाद में भी होते रहेंगे।
यह रिपोर्ट कैबिनेट में पास कराकर ही लागू हो सकती है। इसलिए मैं जल्द ही यह प्रक्रिया पूरी करने की मांग करूंगा। मैं दिल्ली में हूं, अगर मेरे दफ्तर में रिपोर्ट आई होगी तो तत्काल इसे सक्षम उच्च स्तर के लिए भेज दिया जाएगा। रिपोर्ट को विचार के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग को भेजने का औचित्य समझ में नहीं आता।