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नवाबी दौर के राजस्व दस्तावेज बचाएगी जर्मन तकनीक

Wed, 21 Aug 2019 01:39 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 21 Aug 2019 01:39 AM IST
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old revenue documents restore by german technic
ज्ञान सक्सेना
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लखनऊ। नवाबी काल से जुड़ी भू संपत्तियों के दस्तावेजों को अब जर्मन तकनीक के सहारे सुरक्षित व संरक्षित किया जाएगा। इसके लिए जिला प्रशासन स्टांप व निबंधन विभाग के साथ मिलकर वक्फ, ट्रस्ट और ऐतिहासिक महत्व से जुड़ी भू-संपत्तियों के खस्ताहाल राजस्व दस्तावेजों को डिजिटाइज्ड करेगा। सौ साल से भी अधिक पुराने ऐसे दस्तावेजों को संरक्षित करने से वक्फ व हुसैनाबाद ट्रस्ट के स्वामित्व से जुड़ी भू-संपदा पर होने वाली अवैध कब्जेदारी को भी चिह्नित करने में मदद मिलेगी। यह जानकारी हुसैनाबाद ट्रस्ट के सचिव व एडीएम सिटी पश्चिम संतोष कुमार वैश्य ने दी।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित कार्ययोजना में राजधानी में मौजूद नवाबी दौर के सौ साल से पुराने राजस्व दस्तावेज के साथ रजिस्ट्री, खसरा, खतौनी से संबंधित दस्तावेज व स्वामित्व से जुड़े प्रपत्रों को जर्मन बेस तकनीक से डिजिटाइज्ड कर विशेषज्ञों की गठित तकनीकी कमेटी की निगरानी में संरक्षित किया जाएगा। प्रशासन इसके क्रियान्वयन पर खर्च होने वाले बजट प्रस्ताव जल्द शासन को भेजेगा। स्वीकृति मिलते ही काम शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि इस श्रेणी में चिह्नित अधिकांश राजस्व दस्तावेज, निबंधन प्रपत्र व स्वामित्व दस्तावेज उर्दू या अरबी भाषा में दर्ज हैं। रिकॉर्ड रूम में रखे इनमें से अधिकांश दस्तावेज इतने खस्ताहाल स्थिति में पहुंच गए हैं जिन्हें छूने मात्र से उनके क्षतिग्रस्त हो जाने का खतरा है।
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ऑनलाइन निरीक्षण के लिए होंगे उपलब्ध
डिजिटाइज्ड हो जाने के बाद ऐसी संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों को ऑनलाइन निरीक्षण के लिए उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे इनके ऐतिहासिक महत्व को दुनिया के सामने प्रभावी स्तर पर लाने में भी मदद मिलेगी।
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कलेक्ट्रेट में बनेगा केंद्रीयकृत कक्ष
कमेटी की निगरानी में पुराने रिकॉर्डों को स्कैन कर डिजिटाइज्ड कर सुरक्षित बनाने के लिए अलग से केंद्रीयकृत कक्ष का आवंटन भी कलेक्ट्रेट में कराया जाएगा।
2005 तक के दस्तावेजों का काम पूरा
राजधानी के स्टांप व निबंधन विभाग में बतौर पायलट प्रोजेक्ट वर्ष 1990 तक के सभी निबंधन प्रपत्र और उनसे जुड़े दस्तावेजी अभिलेखों को जर्मन तकनीक पर आधारित मशीन से स्कैन कर डिजिटाइज्ड कराने का काम चल रहा है। स्टांप व निबंधन विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, 2005 तक के राजस्व दस्तावेज स्कैन कर डिजिटाइज्ड कराने का कार्य पूरा हो चुका है। इसके बाद 1990 तक के निबंधन से जुड़े पुराने दस्तावेजों को डिजिटाइज्ड करने का कार्य चल रहा है।
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