लग्जरी कार चाहते हैं यूपी कमिश्नर-कलेक्टर
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प्रदेश के कमिश्नर और कलेक्टर साहबान भी मंत्रियों और विधायकों की तरह लग्जरी वाहन चाहते हैं, पर सरकार शायद ही ‘इनोवा’ की उनकी मुराद पूरी कर पाए।
संकेत हैं कि एंबेसडर की जगह टाटा सफारी या टाटा आरिया खरीदने की अनुमति दी जा सकती है। इस पर विचार-विमर्श चल रहा है।
दरअसल, सरकारी विभागों में एंबेसडर कार का इस्तेमाल लंबे अरसे से होता रहा है। प्रशासनिक अफसर इसे शान की सवारी मानते हैं, लेकिन पिछले दिनों एंबेसडर कार का उत्पादन बंद हो गया।
अब कलेक्टर और कमिश्नर नया वाहन भी ऐसा ही चाहते हैं जो उनकी शान के अनुकूल हो। फील्ड के बड़े अफसरों ने अपनी पसंद तलाशी तो वे मंत्रियों और विधायकों की तरह इनोवा जैसे वाहनों पर पहुंचकर ठिठके।
जानकार बताते हैं कि अलीगढ़, गोंडा, ललितपुर और अंबेडकरनगर से नए वाहन खरीदने की अनुमति मांगी गई है। राजस्व विभाग इस पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
इसमें सामने आया कि इनोवा शासन से एंबेसडर के विकल्प में वाहन खरीदने के लिए स्वीकृत लागत से करीब दोगुने की पड़ जाती है। ऐसे में इसकी मंजूरी बेहद मुश्किल है।
अफसर इसलिए चाहते हैं इनोवा
कमिश्नर और कलेक्टरों का तर्क है उनके साथ ड्राइवर, अर्दली और सुरक्षाकर्मी को मिलाकर कम से तीन का स्टाफ हर वक्त होता है।
क्षेत्र भ्रमण के दौरान वहां की जरूरत से जुड़े कागजात भी साथ रखने पड़ते हैं। सात लाख रुपये का कोई भी ठीक-ठाक वाहन फोर सीटर से ऊपर नहीं होता।
वहीं, छोटे पहिये वाले वाहनों से टूटी-फूटी सड़कों और बाढ़ के दौरान ग्रामीण इलाकों में आना-जाना मुश्किल होगा। वहीं, टोएटा की इनोवा हर जगह आसानी से पहुंच सकती है और इसमें जरूरी स्टाफ भी आ जाएगा।
शासन ने उपजिलाधिकारियों और अपर जिलाधिकारियों के लिए टाटा सूमो और टाटा सूमो गोल्ड खरीदने की अनुमति देने का फैसला किया है।
हाल ही कुशीनगर, गोंडा, गाजीपुर, अलीगढ़, अमरोहा, झांसी, पीलीभीत के लिए एक-एक, लखीमपुर खीरी व मेरठ के लिए दो-दो, वाराणसी के लिए तीन और बुलंदशहर व रायबरेली के लिए चार-चार टाटा सूमो गोल्ड खरीदने की अनुमति दी गई है।