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अफसरों ने माना मुजफ्फरनगर दंगे में हुई चूक
विष्णू मोहन/अमर उजाला,लखनऊ
Updated Wed, 19 Feb 2014 08:58 AM IST
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विभिन्न कार्यों के दौरान फील्ड में, खास तौर पर दंगे आदि की स्थिति में पुलिस के सामने आने वाली दिक्कतों की चर्चा के दौरान आला पुलिस अफसरों ने मंगलवार को यह माना कि मुजफ्फरनगर दंगे में चूक हुई।
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बंद कमरे में हुए वरिष्ठ पुलिस अफसरों के सम्मेलन में इस बात का साफ जिक्र हुआ कि मुजफ्फरनगर के कबाल में हुई घटना के बाद गिरफ्तार किए लोगों को छोड़ा जाना और डीएम व एसएसपी को हटाए जाने से लोग भड़क उठे।
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यह चर्चा मंगलवार को पुलिस वीक के अंतिम दिन रेडियो पुलिस मुख्यालय के सभागार में आयोजित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सम्मेलन में हुई।
अफसरों का कहना था कि ऐसे मौके पर किसी वर्ग या समुदाय नहीं बल्कि शहर या क्षेत्र के मिजाज को समझना जरूरी होता है।
जल्दीबाजी में लिए गए फैसलों का प्रभाव उल्टा हो जाता है दंगे के समय राज्य की कानून-व्यवस्था से जुड़े एक आईपीएस अधिकारी ने पुलिस के सामने फील्ड में आने वाली दिक्कतों का जिक्र किया।
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कबाल मामले में गिरफ्तार लोगों को छोड़ा जाना और फिर एडीएम व एसएसपी का हटाया जाना लोगों को उल्टा संदेश दे गया। इससे लोग भड़क उठे जिससे हालात और खराब हुए।
इस मौके पर जब आईजी स्तर के एक अधिकारी ने नंगला मंदौड़ में सभा के दौरान हुई घटना के बारे में कहा कि संबंधित एसओ व सीओ ने इसकी सही जानकारी ऊपर तक नहीं दी।
इस पर तत्कालीन एडीजी कानून-व्यवस्था अरुण कुमार ने उनकी बात काट दी और कहा कि यह सही नहीं है, सूचना दी गई थी, तभी डीएम व एसएसपी मौके पर जा रहे थे।
एक हत्या की छह एफआईआर
आगरा के आईजी आशुतोष पांडेय ने जब मुजफ्फरनगर दंगे में सामने आई गलतियों का जिक्र करा तो वहां मौजूद अधिकारी चौंक पड़े। उन्होंने बताया कि उन्होंने पूरे मामले का अध्ययन किया है।
यह पाया कि कई मामलों में एक ही घटना की एक से अधिक एफआईआर दर्ज कराई गईं। हत्या के एक मामले में तो छह एफआईआर हुई।
सभी मामलों में घटनास्थल अलग, वादी अलग, नामजद अलग और समय अलग दर्शाया गया। एफआईआर भी अलग-अलग थानों में दर्ज कराई गई। सिर्फ मृतक समान था।
मृतकों को हत्यारा बता किया गया नामजद
आईजी ने अपने संबोधन में कहा कि पूरे जिले में पुलिस के सामने जबर्दस्त कंफ्यूजन की स्थिति बनी हुई थी। जांच में सामने आया है।
लगभग 48 ऐसे मामले दर्ज हुए, जिनमें लोगों ने मुआवजे आदि का लाभ उठाने के लिए या रंजिश में फर्जी तथ्यों का हवाला देते हुए मुकदमे दर्ज करा दिए।
बताया कि कबाल मामले में एक एफआईआर दर्ज हुई, जिसमें तीन माह पहले मर चुके एक व्यक्ति को नामजद कर दिया गया था।
ऐसे ही छह साल से विधवा पेंशन ले रही एक महिला ने शिकायत दर्ज करा दी थी कि दंगाइयों ने उसके पति का अपहरण कर हत्या कर दी।
जबकि एक महिला ने फर्जी सूचना दर्ज करा दी थी विपक्षी और दंगाई उसके नाबालिग बेटी को उठा ल गए। जांच में पाया गया कि महिला ने खुद ही अपनी बेटी को एक रिश्तेदार के यहां छिपा दिया था।
छह सौ एफआईआर में छह हजार हुए नामजद
अपने संबोधन में आईजी ने जिक्र किया कि दंगे में मुजफ्फरनगर में एक-दो नहीं बल्कि छह सौ एफआईआर दर्ज कराई गईं, जिनमें छह हजार से अधिक लोगों को नामजद किया गया।
आईज़ी ने कहा कि ऐसे हालात में यह तय करना होता है कि कौन सी शिकायत सही है और कौन सी गलत। दबाव में मुकदमे दर्ज करने से समस्या का हल नहीं निकलता।
रायट स्कीम योजना के महव्य पर दिया गया बल
वक्ताओं ने इस मौके पर रकायट स्कीम के महत्व पर बल दिया। कहा कि इस योजना को पहले से तैयार रखने के कई फायदे हैं।
सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसी भी मामले की सूचना मिलते ही त्वरित एक्शन शुरू हो जाता है। कई बार समय से एक्शन न होने की वजह से छोटी सी बात भड़क कर बड़ा घटना में बदल जाती है।
डीजीपी ने कहा नवयुवकों को दिया जाए मौका
अत्याधुनिक पुलिस कंट्रोल रूम और सीसीटीएनएस योजना के तहत किए जा रहे कार्य और इनसे होने वाले लाभ का प्रस्तुतीकरण समाप्त होने के बाद डीजीपी रिजवान अहमद ने पुलिस का आचरण थाना स्तर से ही सुधरना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों से इसे सुधारने को कहा। यह भी कहा कि 18-20 साल के युवकों के खिलाफ फौरन कार्रवाई करने से बेहतर है, उन्हें एक बार मौका दिया जाए।