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अनाथ बच्चों की मदद में प्रमाणपत्रों का रोड़ा, किसी के पास कोरोना से मौत होने के दस्तावेज नहीं तो कोई आय प्रमाणपत्र के लिए लगा रहा दौड़

Sun, 13 Jun 2021 01:52 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 13 Jun 2021 01:52 AM IST
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Obstruction of documens in orphans help
राजन परिहार
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लखनऊ। कोरोना से अभिभावकों को खोकर अनाथ हुए बच्चे सरकारी मदद की आवेदन प्रक्रिया में उलझ गए हैं। कोई कोविड प्रूफ जुटाकर मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए दौड़ रहा है तो कोई आय प्रमाणपत्र के लिए परेशान है।
राजधानी में अपनों को खोने वाले बच्चों की संख्या 178 तक चिह्नित हो चुकी है, लेकिन इनमें से सरकारी मदद के लिए आवेदन अभी 19 ने ही किया है। यह स्थिति तब है जब डीएम अभिषेक प्रकाश ने बीते दिनों जिले स्तर पर गठित टास्क फोर्स की बैठक में पहले से चिह्नित कोविड-19 से प्रभावित/अनाथ 105 बच्चों का सत्यापन कर अभिभावकों के खाते के साथ विवरण 10 जून तक डीपीओ कार्यालय उपलब्ध कराने के लिए कहा था। डीपीओ सुधाकर शरण पांडेय ने बताया कि उनके यहां अभी तक 19 आवेदन जमा किए गए हैं। इनका सत्यापन कर पात्रों को मदद की जाएगी। गौरतलब है कि अभिभावकों या माता-पिता या फिर माता और पिता में से किसी की मृत्यु से प्रभावित बच्चों को चिह्नित कर सरकार ने उनकी शिक्षा, जीविका व चिकित्सा के लिए मदद करने की घोषणा की है।
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ये दिक्कतें आ रहीं
आवेदन पत्र के साथ मुख्य रूप से दो लाख रुपये तक की आय का प्रमाणपत्र लगाना है। साथ ही अभिभावक की मृत्यु कोविड या पोस्ट कोविड कारणों से हुई है, इसके लिए कोरोना टेस्ट रिपोर्ट भी देनी है। इसके तहत एंटीजेन, आरटीपीसीआर, ब्लड रिपोर्ट या फिर सीटी स्कैन रिपोर्ट मान्य है, लेकिन कई बच्चों के यहां ये रिपोर्ट भी नहीं हैं। ऐसे में वे कोरोना से मौत का प्रूफ नहीं दे पा रहे हैं। कुछ आय प्रमाणपत्र बनवाने को भटक रहे हैं।
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मां की मौत के नहीं मिल रहे कागज
रहीमनगर निवासी छात्र के माता, पिता व बाबा की मौत अप्रैल में हो गई। 13 अप्रैल को बाबा की सामान्य मौत हुई। उसी दिन निजी अस्पताल में भर्ती मां की भी मृत्यु हो गई। उनके लिए दौड़-भाग कर रहे पिता की भी तबियत बिगड़ी और 21 अप्रैल को उन्हें भी महामारी ने छीन लिया। छात्र के पास आवेदन के लिए पिता की कोविड से मौत के साक्ष्य तो हैं, लेकिन मां की मौत के कागज नहीं मिल रहे। इस संबंध में सीडब्ल्यूसी की मेंबर मजिस्ट्रेट डॉ. संगीता शर्मा का कहना है कि आवेदनकर्ता कई समस्याएं लेकर आ रहे हैं। मृत्यु प्रमाणपत्र बनने में समय लग रहा है। आय प्रमाणपत्र मिलने में दिक्कत की शिकायत आम हो गई है। कोशिश है कि जहां ज्यादा परेशानी आ रही है, वहां एफिडेविट के आधार पर मदद की संस्तुति होगी। डीपीओ ने कहा कि चिह्नित बच्चों से आवेदन के लिए हम लगातार संपर्क में हैं। हर संभव मदद की जा रही है। कोविड के दौरान ही नहीं पोस्ट कोविड मौत के मामले में भी बच्चों को मदद का प्राविधान है। उनके पास कोई भी कोविड प्रूफ मिलने पर आवेदन पत्र भराया जा रहा है। दिक्कत उन केस में आ रही है, जहां कोई जांच रिपोर्ट ही नहीं है।
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