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ऐसा करने से इलाज के बावजूद भी हो जाती है गुर्दा रोगियों की मौत

Sun, 06 Dec 2015 05:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 06 Dec 2015 05:00 PM IST
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nutrition guideline for kidney patients

गुर्दा रोगी अपनी मर्जी से खाना-पीना छोड़कर स्वस्थ होने का सपना देख रहे हैं तो ये उनके लिए खतरे की घंटी है। बिना डॉक्टर की सलाह के मनमाना भोजन लेने से गुर्दा रोगी कुपोषण के शिकार हो रहे हैं।

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दाल व अन्य प्रोटीन युक्त भोजन खाना छोड़ने से उनके शरीर में कमजोरी और रोग प्रतिरक्षण तंत्र कमजोर हो जाता है, इससे मरीज कई अन्य बीमारियों की चपेट में आ जाता है। डायलिसिस और इलाज के बावजूद उसकी मौत हो जाती है।
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एसजीपीजीआई में सोसाइटी ऑफ रीनल न्यूट्रीशन की शनिवार को आयोजित कॉन्फ्रेंस में अपोलो हॉस्पिटल कानपुर की गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना भदौरिया ने ये जानकारी दी।
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डॉ. अर्चना ने बताया कि मरीजों को जैसे ही पता चलता है कि उनका सीरम क्रिएटनिन बढ़ रहा है। वैसे ही वे दालें खाना छोड़ देते हैं, रोटी भी बंद हो जाती है। शुरुआत में खाना छोड़ देने से मरीज का जी मिचलाना और उल्टी बंद हो जाती है।

इसे वो गुर्दे का ठीक होना समझते हैं, जबकि खाना बंद कर देने से मरीज कुपोषण का शिकार हो जाता है, जो उसकी मौत का कारण बनता है। मरीज को भोजन करना बंद नहीं करना चाहिए।

नियंत्रित मात्रा में लें नमर और पानी

nutrition guideline for kidney patients

यदि मरीज शुद्ध शाकाहारी है तो उसके लिए भोजन बंद करना और भी घातक हो जाता है, क्योंकि उसे भोजन में दाल, पनीर और दूध से ही प्रोटीन मिलता है। वहीं रोजाना मीट खाने वाले व्यक्ति को खाने में प्रोटीन मिलता रहता है।

डॉ. अर्चना ने बताया कि 0.6 ग्राम प्रति किलोग्राम शारीरिक वजन के हिसाब से प्रोटीन जरूरी है। यदि इतना प्रोटीन शरीर को नहीं मिलता है तो मांसपेशिया कमजोर होना शुरू हो जाती हैं।

डॉ. अर्चना भदौरिया ने बताया कि गुर्दा रोगी के लिए सिर्फ नमक और पानी को नियंत्रित मात्रा में लेना जरूरी है। उसे अपने डॉक्टर के निर्देश के अनुसार ही नमक और पानी का सेवन करना चाहिए।

मरीज को मिक्स डाइट लेनी चाहिए, जिससे उसे सभी पोषक तत्व जरूरत के अनुसार मिलते रहें। 40 साल से ऊपर के लोगों को साल में एक बार सीरम क्रिएटनिन, शुगर, ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन, रुटीन यूरिन की जांच करानी चाहिए।

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