{"_id":"2851eff8ccba07594cddb0262b297308","slug":"nurses-problem-get-solved-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"KGMU: मुख्यमंत्री आए तो दूर हुई नर्सों की समस्या","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
KGMU: मुख्यमंत्री आए तो दूर हुई नर्सों की समस्या
अमित यादव/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 20 Sep 2014 03:07 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केजीएमयू में जनरल नर्सिंग मिडवाइफरी (जीएनएम) का प्रशिक्षण ले रहीं प्रशिक्षु नर्सों की अपनी बदहाली की दास्तां मुख्यमंत्री तक पहुंचाने की मुहिम रंग लाई।
विज्ञापन
शुक्रवार को केजीएमयू पहुंचे प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा वीएस भुल्लर ने नर्सिंग स्कूल का कुलपति प्रो. रविकांत के साथ निरीक्षण किया। प्रशिक्षु नर्सोँ से बात की।
विज्ञापन
इसके बाद उनकी कक्षाएं मॉडर्न टीचिंग ब्लॉक में शुरू करने का आदेश दिया गया। नौ माह से बाकी स्टाइपेंड भी छात्राओं को शाम को भुगतान कर दिया गया। यही नहीं, सभी प्रशिक्षुओं को परिचय पत्र भी देने के लिए कहा।
विज्ञापन
मालूम हो कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की 77 छात्राओं को केजीएमयू में प्रशिक्षण दिया जाता है। 2014-15 सत्र में हॉस्टल न होने से केजीएमयू ने स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर प्रशिक्षण बंद करने के लिए कहा था।
लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने छात्र-छात्राओं के रहने की स्वयं व्यवस्था करने का आश्वासन देकर प्रशिक्षण शुरू करा दिया। जब कक्षाओं के बाद छात्राओं को वार्ड में ड्यूटी में दिक्कत आने लगी तो फिर हॉस्टल की मांग उठने लगी।
इस संकट को दूर करने के लिए 15 अगस्त को झंडारोहण के लिए नर्सिंग स्कूल पहुंचे चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विजय कुमार ने बीड़ा उठाया और उन्होंने कैम्पस में ही बने नर्सिंग हॉस्टल के दो कमरे उन्हें आवंटित कर दिए।
इससे छात्राएं वहां आराम कर सकें। प्रशिक्षु नर्सोँ को इससे कुछ राहत मिली, लेकिन कक्षाओं की बदहाली, गंदे वॉशरूम और स्टाइपेंड न मिलने से छात्राएं परेशान थीं।
18 सितंबर को मुख्यमंत्री जब केजीएमयू पहुंचे तो उनके लौटने के वक्त सभी छात्राएं रास्ते में डट गईं। पुलिस व केजीएमयू प्रशासन ने उन्हें सीएम तक पहुंचने का मौका ही नहीं दिया।
इसके बावजूद मीडिया के जरिए ये जानकारी मुख्यमंत्री तक पहुंच गई। उन्होंने प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा नर्सिंग छात्राओं से मिलकर उनकी दिक्कतों को दूर करने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद छात्राओं को बेहतर लेक्चर थिएटर और स्टाइपेंड दोनों मिल गए। यही नहीं, समस्याओं के निस्तारण के लिए प्रतिदिन दोपहर 3.30 से 4 बजे के दौरान कुलपति से मिलने की व्यवस्था भी करा दी गई।