फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Number of corona infected may go high in rainy season

बारिश के मौसम में पीक पर पहुंच सकता है कोरोना संक्रमण, बढ़ सकती है वायरस की ग्रोथ

Thu, 11 Jun 2020 12:28 PM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 11 Jun 2020 12:28 PM IST
विज्ञापन
Number of corona infected may go high in rainy season
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

क्या बारिश के मौसम में कोरोना वायरस का असर पीक पर पहुंच सकता है? बहरहाल चिकित्सा विशेषज्ञों का यही मानना है। उनका तर्क है कि बारिश के दिनों में आर्द्रता वायरस के ग्रोथ को बढ़ा सकती है। वहीं अहमदाबाद के साथ ही कई देशों में पानी में वायरस की मौजूदगी पाए जाने से भी विशेषज्ञ चिंतित हैं। इसको लेकर बहस हो रही है कि क्या पानी से भी संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है? 

विज्ञापन


क्या कोरोना वायरस की मौजूदगी पानी में हो सकती है?
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ गांधीनगर ने हाल ही में अहमदाबाद में विभिन्न जगहों से जुटाए सीवेज वाटर के सैंपल में सार्स-कोव-2 के जींस की मौजूदगी पाई। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि एक ही फेमिली के पैथोजेन (बैक्टीरिया या वायरस) के फैलने का तरीका भी एक जैसा होता है।
विज्ञापन


आईआईटी के अध्ययनकर्ताओं ने भी इसीलिए देश में हॉटस्पॉट इलाकों में सीवेज के पानी की जांच कराने की आवश्यकता जताई, ताकि पता लगाया जा सके कि कहीं कोविड-19 की उपस्थिति तो पानी में नहीं है। इससे पहले डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि कोरोना पानी से नहीं फैलता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


लेकिन ऑनलाइन जर्नल केडब्लूआर के 24 मार्च के अंक में नीदरलैंड के वैज्ञानिकों ने दावा किया कि उनके यहां वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में कोरोना वायरस के तीन सक्रिय जींस मिले। इसी तरह से यूके के सेंटर फॉर ईकोलॉजी एंड हाइड्रोलॉजी की रिपोर्ट में भी कहा गया कि कोरोना वायरस  मल या गंदे पानी में भी कुछ वक्त तक सक्रिय रहता है। हांगकांग में भी हुए एक अध्ययन में पानी और कोरोना वायरस के बीच संबंध पाया गया था।

पानी के जरिए वायरस का कैसे फैलाव हो सकता है?

Number of corona infected may go high in rainy season
डॉ टीन ढोल - फोटो : amar ujala
चिकित्सा विशेषज्ञ मानते हैं कि वायरस पानी की फुहारों के जरिए हवा में फैल सकता है। इस प्रक्रिया को शॉवरहेड्स एयरोसॉल ट्रांसमिशन कहते हैं। ऐसे में संक्रमित पानी या सीवेज के लीकेज के दौरान पैदा होने वाली ड्रॉपलेट्स हवा में तैरते हुए संक्रमण का कारण बन सकती हैं। पीजीआई के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. टीएन ढोल कहते हैं कि अपने यहां पेयजल सिस्टम बेहद कमजोर है। लीकेज की समस्याएं बहुत होती हैं। ऐसे में समस्याएं बढ़ सकती हैं।

सवाल- वायरस के बढ़ने में आर्द्रता का क्या रोल होता है?
जवाब- डॉ. टीएन ढोल इस सवाल पर कहते हैं कि बरसात के दिन वायरस और बैक्टीरिया के लिए सबसे मुफीद होते हैं। उमस के दौरान इनकी ग्रोथ तेजी से होती है। इसलिए अगले तीन माह चुनौती भरे हो सकते हैं।


 सवाल-  क्या हो सकते हैं बचाव के तरीके?
 जवाब- डॉ. टीएन ढोल इस सवाल पर कहते हैं कि हॉटस्पॉट वाले इलाकों, अस्पतालों से जल निकासी वाली जगह, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, सीवर आदि के आसपास क्लोरिनेशन को बढ़ाना होगा। ताकि जल की अशुद्धि से होने वाली समस्याओं से बचा जा सके। पानी सप्लाई लाइन में लीकेज की समस्याएं न होने पाएं इसकी व्यवस्था की जानी चाहिए। जलभराव वाले क्षेत्रों में निकासी व्यवस्था दुरुस्त करनी होगी।

बारिश बाद क्या कोरोना का असर खत्म होगा?

Number of corona infected may go high in rainy season
डॉ जीके सिंह - फोटो : amar ujala

एम्स पटना के पूर्व निदेशक और एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. जीके सिंह इस सवाल पर कहते हैं कि अनलॉक होने के बाद संक्रमण बढ़ेगा। पर, ज्यादातर लोगों के संक्रमित होने से हर्ड इम्युनिटी बढ़ेगी और वायरस बेअसर होने लगेगा। मानसून सीजन के बाद वायरस का असर कम हो सकता है।

ऐसे में इससे डरने के बजाय कमजोर इम्यूनिटी वालों को सावधान रहना होगा। अभी तक जितने भी लोग चपेट में आए हैं उनमें मृत्यु दर बेहद कम है

किडनी, लिवर, कैंसर के मरीजों को रहना होगा सतर्क 

Number of corona infected may go high in rainy season
डॉ अनिल गंगवार - फोटो : amar ujala

एसजीपीजीआई के गैस्ट्रोलॉजिस्ट डॉ. अनिल गंगवार बताते हैं कि बारिश में हर साल पेट के मरीज करीब 30 फीसदी बढ़ जाते है। इसकी मुख्य वजह पानी में वायरस और बैक्टीरिया की ग्रोथ होती है। कोरोना वायरस को लेकर भी विदेशी रिपोर्टों में बारिश के दौरान ग्रोथ की बात कही जा रही है।

 

चूंकि यह पहली बार आया है इसलिए इस पर अभी स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता।  वायरस का जो नेचर होता है उससे भी देखा जाए तो बारिश के दौरान इसकी ग्रोथ से इंकार नहीं किया जा सकता। खासतौर से किडनी, लिवर, कैंसर सहित कमजोर इम्यूनिटी वालों को सावधान रहना होगा। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed