बारिश के मौसम में पीक पर पहुंच सकता है कोरोना संक्रमण, बढ़ सकती है वायरस की ग्रोथ
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क्या बारिश के मौसम में कोरोना वायरस का असर पीक पर पहुंच सकता है? बहरहाल चिकित्सा विशेषज्ञों का यही मानना है। उनका तर्क है कि बारिश के दिनों में आर्द्रता वायरस के ग्रोथ को बढ़ा सकती है। वहीं अहमदाबाद के साथ ही कई देशों में पानी में वायरस की मौजूदगी पाए जाने से भी विशेषज्ञ चिंतित हैं। इसको लेकर बहस हो रही है कि क्या पानी से भी संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है?
क्या कोरोना वायरस की मौजूदगी पानी में हो सकती है?
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ गांधीनगर ने हाल ही में अहमदाबाद में विभिन्न जगहों से जुटाए सीवेज वाटर के सैंपल में सार्स-कोव-2 के जींस की मौजूदगी पाई। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि एक ही फेमिली के पैथोजेन (बैक्टीरिया या वायरस) के फैलने का तरीका भी एक जैसा होता है।
आईआईटी के अध्ययनकर्ताओं ने भी इसीलिए देश में हॉटस्पॉट इलाकों में सीवेज के पानी की जांच कराने की आवश्यकता जताई, ताकि पता लगाया जा सके कि कहीं कोविड-19 की उपस्थिति तो पानी में नहीं है। इससे पहले डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि कोरोना पानी से नहीं फैलता है।
लेकिन ऑनलाइन जर्नल केडब्लूआर के 24 मार्च के अंक में नीदरलैंड के वैज्ञानिकों ने दावा किया कि उनके यहां वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में कोरोना वायरस के तीन सक्रिय जींस मिले। इसी तरह से यूके के सेंटर फॉर ईकोलॉजी एंड हाइड्रोलॉजी की रिपोर्ट में भी कहा गया कि कोरोना वायरस मल या गंदे पानी में भी कुछ वक्त तक सक्रिय रहता है। हांगकांग में भी हुए एक अध्ययन में पानी और कोरोना वायरस के बीच संबंध पाया गया था।
पानी के जरिए वायरस का कैसे फैलाव हो सकता है?
सवाल- वायरस के बढ़ने में आर्द्रता का क्या रोल होता है?
जवाब- डॉ. टीएन ढोल इस सवाल पर कहते हैं कि बरसात के दिन वायरस और बैक्टीरिया के लिए सबसे मुफीद होते हैं। उमस के दौरान इनकी ग्रोथ तेजी से होती है। इसलिए अगले तीन माह चुनौती भरे हो सकते हैं।
सवाल- क्या हो सकते हैं बचाव के तरीके?
जवाब- डॉ. टीएन ढोल इस सवाल पर कहते हैं कि हॉटस्पॉट वाले इलाकों, अस्पतालों से जल निकासी वाली जगह, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, सीवर आदि के आसपास क्लोरिनेशन को बढ़ाना होगा। ताकि जल की अशुद्धि से होने वाली समस्याओं से बचा जा सके। पानी सप्लाई लाइन में लीकेज की समस्याएं न होने पाएं इसकी व्यवस्था की जानी चाहिए। जलभराव वाले क्षेत्रों में निकासी व्यवस्था दुरुस्त करनी होगी।
बारिश बाद क्या कोरोना का असर खत्म होगा?
एम्स पटना के पूर्व निदेशक और एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. जीके सिंह इस सवाल पर कहते हैं कि अनलॉक होने के बाद संक्रमण बढ़ेगा। पर, ज्यादातर लोगों के संक्रमित होने से हर्ड इम्युनिटी बढ़ेगी और वायरस बेअसर होने लगेगा। मानसून सीजन के बाद वायरस का असर कम हो सकता है।
ऐसे में इससे डरने के बजाय कमजोर इम्यूनिटी वालों को सावधान रहना होगा। अभी तक जितने भी लोग चपेट में आए हैं उनमें मृत्यु दर बेहद कम है
किडनी, लिवर, कैंसर के मरीजों को रहना होगा सतर्क
एसजीपीजीआई के गैस्ट्रोलॉजिस्ट डॉ. अनिल गंगवार बताते हैं कि बारिश में हर साल पेट के मरीज करीब 30 फीसदी बढ़ जाते है। इसकी मुख्य वजह पानी में वायरस और बैक्टीरिया की ग्रोथ होती है। कोरोना वायरस को लेकर भी विदेशी रिपोर्टों में बारिश के दौरान ग्रोथ की बात कही जा रही है।
चूंकि यह पहली बार आया है इसलिए इस पर अभी स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता। वायरस का जो नेचर होता है उससे भी देखा जाए तो बारिश के दौरान इसकी ग्रोथ से इंकार नहीं किया जा सकता। खासतौर से किडनी, लिवर, कैंसर सहित कमजोर इम्यूनिटी वालों को सावधान रहना होगा।