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बंदूक नहीं, अब रिवॉल्वर-पिस्टल बनी युवाओं की पसंद, रुतबा गांठने के लिए लगी होड़
Thu, 08 Aug 2019 04:42 PM IST
ishwar ashish
ज्ञान सक्सेना/अमर उजाला, लखनऊ
ज्ञान सक्सेना/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 08 Aug 2019 04:42 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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केस-1
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रिवॉल्वर के लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले 32 वर्षीय चिनहट निवासी अजय कुमार परचून की दुकान चलाते हैं। लाइसेंस की जरूरत के बारे में पूछने पर बताया कि दुकान ठीक से नहीं चलती। रिवॉल्वर का लाइसेंस मिल जाने पर सिक्योरिटी एजेंसी में अच्छे वेतन पर नौकरी मिल जाएगी।
केस-2
मोहनलालगंज क्षेत्र के 32 वर्षीय निरंजन सोनकर ने भी रिवॉल्वर के लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। दस्तावेजों की जांच हुई तो बैंक खाते की छायाप्रति में मात्र डेढ़ हजार रुपये दर्ज मिले। पूछताछ में आवेदक ने कहा, लाइसेंस बनने के बाद पैसों का इंतजाम कर लेगा।
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बीती अक्तूबर से शस्त्र लाइसेंस बनवाने पर लगी रोक हटने के बाद आवेदकों की संख्या बढ़ती जा रही है। आवेदन करने वाले उम्रदराज लोगों में जहां 315 व 12 बोर की बंदूक की चाह दिख रही है तो पिस्टल व रिवॉल्वर युवाओं की पसंद बनी है।
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इनमें रुतबा गांठने को रिवॉल्वर और रोजी-रोटी की जरूरत के काम के लिए पिस्टल का लाइसेंस बनवाने की होड़ ज्यादा है। वहीं, बड़ी संख्या में ऐसे आवेदक भी शस्त्र लाइसेंस बनवाने की कतार में हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति खस्ताहाल है। रोक हटने के बाद से नौ माह में लाइसेंस आवेदकों की संख्या 15 हजार तक पहुंच गई है।
शस्त्र रखने के शौकीनों की भीड़ में 25 से 35 साल के युवा
प्रतीकात्मक तस्वीर
कलेक्ट्रेट के शस्त्र अनुभाग में आवेदन पत्रों की स्क्रीनिंग में बड़ी संख्या में ऐसे आवेदक भी मिल रहे हैं जिनकी जान को किसी से कोई खतरा नहीं है। ये सिर्फ रौब गांठने के लिए रिवॉल्वर के लाइसेंस की दौड़ में हैं। शस्त्र रखने के शौकीनों की भीड़ में बड़ी संख्या 25 से 35 साल के युवा आवेदकों की है।
इनमें से करीब 70 फीसदी ने पिस्टल या रिवॉल्वर के लाइसेंस के लिए आवेदन किया है, जबकि डबल बैरल, सिंगल बैरल बंदूक के मात्र 30 फीसदी आवेदक हैं। अधेड़ उम्र के ग्रामीण अंचल से जुड़े आवेदक ही इनमें शामिल हैं।
इनमें से करीब 70 फीसदी ने पिस्टल या रिवॉल्वर के लाइसेंस के लिए आवेदन किया है, जबकि डबल बैरल, सिंगल बैरल बंदूक के मात्र 30 फीसदी आवेदक हैं। अधेड़ उम्र के ग्रामीण अंचल से जुड़े आवेदक ही इनमें शामिल हैं।
महिलाओं को भी चाहिए रिवॉल्वर-पिस्टल
प्रतीकात्मक तस्वीर
30 जून तक शस्त्र लाइसेंस के आवेदकों की संख्या 15 हजार तक पहुंच गई है। इसमें 14 हजार नए और चार हजार पुराने आवेदक हैं। इनमें 350 महिलाएं भी हैं। इन्होंने निजी या कारोबारी सुरक्षा को कारण बताकर पिस्टल या रिवॉल्वर के लाइसेंस के लिए आवेदन किया है।
पूरी सावधानी के साथ आवेदन पत्रों की जांच की जा रही है। वास्तविक जरूरत के आधार पर ही शस्त्र लाइसेंस जारी हो रहा है। हर सप्ताह सिर्फ दस आवेदकों के मामले ही निस्तारित किए जा रहे हैं, जिससे सिर्फ शौक पूरा करने को आवेदन करने वालों को लाइसेंसी शस्त्र न मिलने पाए। राजधानी में पहले से 56 हजार शस्त्र लाइसेेंसधारी हैं। - कौशल राज शर्मा, डीएम
पूरी सावधानी के साथ आवेदन पत्रों की जांच की जा रही है। वास्तविक जरूरत के आधार पर ही शस्त्र लाइसेंस जारी हो रहा है। हर सप्ताह सिर्फ दस आवेदकों के मामले ही निस्तारित किए जा रहे हैं, जिससे सिर्फ शौक पूरा करने को आवेदन करने वालों को लाइसेंसी शस्त्र न मिलने पाए। राजधानी में पहले से 56 हजार शस्त्र लाइसेेंसधारी हैं। - कौशल राज शर्मा, डीएम