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यूपी के 3.74 लाख शिक्षकों को नहीं मिल पा रहा एनपीएस का फायदा

Sun, 30 Apr 2017 10:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 30 Apr 2017 10:13 AM IST
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 NPS benefits for teachers in Uttar Pradesh.
डेमो पिक

बेसिक शिक्षा परिषद अपने 3.74 लाख शिक्षकों को न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) का लाभ नहीं दे पा रही है। सरकार ने इसके लिए काफी पहले बजट जारी कर दिया है, पर अधिकतर शिक्षकों के मामले में अभी तक कागजी औपचारिकताएं ही पूरी नहीं हुई हैं। बार-बार रिमाइंडर भेजने के बावजूद शिक्षा विभाग के जिलास्तरीय अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

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यूपी के करीब 1.58 लाख बेसिक स्कूलों में 5 लाख 85 हजार 232 शिक्षक पढ़ा रहे हैं। नियमानुसार, 1 अप्रैल 2005 या उसके बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन स्कीम के बजाय एनपीएस का लाभ दिया जाना है। इस दायरे में प्रदेश में 3 लाख 74 हजार शिक्षक आ रहे हैं।
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सपा सरकार ने 1 अप्रैल 2016 से इस मद में कटौती का आदेश दिया था। यहां बता दें कि एनपीएस के तहत 10 फीसदी राशि शिक्षकों के वेतन से कटेगी, जबकि इतना ही अंशदान राज्य सरकार का होगा।
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सूत्रों के मुताबिक, अभी तक बहुत ही थोड़े शिक्षकों को इस योजना का लाभ मिल पाया है। अधिकतर शिक्षकों के मामले में कागजी कार्रवाई ही पूरी नहीं हो पाई है। उन्हें परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर (प्रान) भी एलाट नहीं हो पाया है।

ये है असली वजह

 NPS benefits for teachers in Uttar Pradesh.
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इस मामले में बेसिक शिक्षा परिषद के एक वित्त एवं लेखाधिकारी ने नाम न छापने के आग्रह के साथ बताया कि इस आदेश को लागू करने के लिए तारीख तो तय कर दी गई, पर कटौती की गणना के लिए सॉफ्टवेयर कुछ दिन पहले ही मुहैया कराया गया।

सातवें वेतनमान की गणना के लिए दिए गए सॉफ्टवेयर में ही एनपीएस की कटौती के हिसाब-किताब की व्यवस्था की गई है। चूंकि, प्रत्येक शिक्षक की एनपीएस के तहत कटौती की गणना अलग-अलग करनी है, इसलिए मैनुअली यह काम कर पाना मुमकिन नहीं था। इसलिए स्कीम को लागू करने में देरी हो रही है।

रुचि न लेने वाले खंड शिक्षाधिकारियों पर होगी कार्रवाई
बेसिक शिक्षा परिषद के वित्त नियंत्रक मणिशंकर पांडेय ने बताया कि प्रत्येक शिक्षक के व्यक्तिगत हस्ताक्षर से प्रान एलाट होना है, इसलिए स्कीम लागू करने में थोड़ा वक्त लग रहा है।

प्रान के लिए हर शिक्षक से फॉर्म भरवाने की मूल जिम्मेदारी खंड शिक्षाधिकारियों की है। इसलिए उन्हें इस बाबत कड़ा पत्र जारी कर दिया गया है। जो भी खंड शिक्षाधिकारी इस काम में रुचि नहीं लेंगे, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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