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अब विंग कंस्ट्रक्शंस विकसित करेगा रोहतास की टाउनशिप
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अब विंग कंस्ट्रक्शंस विकसित करेगा रोहतास की टाउनशिप
रोहतास समूह की सुल्तानपुर रोड पर मौजूद टाउनशिप में फंसे 2500 से अधिक आवंटियों को अगले छह महीने में कब्जा मिलना शुरू हो जाएगा।
इसके लिए टाउनशिप के पहले चरण में 25 एकड़ के प्रोजेक्ट का पंजीकरण भी रेरा में हो गया है।
अब रोहतास समूह की जगह मुख्य विकासकर्ता विंग कंस्ट्रक्शंस एंड डवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड इस प्रोजेक्ट को अगले दो साल में पूरा करेगा। रेरा ने भी नए विकासकर्ता को दो साल का समय दिया है।
रेरा की शुक्रवार को हुई बैठक में प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी गई। पंजीकरण के लिए रोहतास प्रोजेक्ट्स लिमिटेड और विंग कंस्ट्रक्शंस ने संयुक्त उपक्रम बनाकर नए सिरे से रेरा में आवेदन किया था।
मंजूरी के बाद अब बिल्डर कंपनी टाउनशिप में विकास कार्य पूरे करवाकर औपचारिक रूप से आवंटन, अनुबंध और कब्जा दे पाएगी।
रोहतास ने बिना रेरा में पंजीकरण और विकास कार्य शुरू कराने के लिए डीपीआर एलडीए से पास कराए ही करीब 2500 खरीदारों को भूखंड बेच दिए थे।
पांच साल से अधिक समय से लोग रोहतास क्रीसेंट के नाम से विकसित हो रही टाउनशिप में भूखंड खरीदकर कब्जे के लिए भटक रहे हैं।
रेरा सचिव अबरार अहमद ने बताया कि रोहतास क्रीसेंट के नाम से प्रोजेक्ट को संख्या यूपीरेरापीआरजे771626 से पंजीकृत कर लिया गया है।
रेरा में प्रोजेक्ट को लेकर करीब 600 शिकायतें दर्ज हैं। पंजीकरण से प्रोजेक्ट पूरा करने में अब मदद मिलेगी।
इससे पहले 29 जुलाई 2010 को इसी प्रोजेक्ट के लिए आवेदन में कमियां मानते हुए पंजीकरण निरस्त कर दिया गया था।
प्रमुख आपत्तियों को तीन दिन और बाकी के लिए 15 दिन का समय बिल्डर कंपनी को दिया गया। आपत्तियां दूर न होने पर इस आदेश के अनुपालन में बिल्डर कंपनी का आवेदन निरस्त हो गया।
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दोबारा आवेदन के लिए तीन महीने का समय दिया गया था। कंपनी ने संयुक्त उपक्रम बना इस बार आवेदन किया।
इसमें विंग कंस्ट्रक्शन को मुख्य विकासकर्ता और रोहतास प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को विकासकर्ता के रूप में बताया गया। आवेदन की समीक्षा के बाद प्रोजेक्ट पंजीकृत कर लिया गया है।
विंग कंस्ट्रक्शंस के साथ काम कर रहा रोहतास
रेरा की सख्ती के बाद रोहतास समूह ने विंग कंस्ट्रक्शंस के साथ एक अनुबंध किया था। इसी अनुबंध में विंग कंस्ट्रक्शंस की सुल्तानपुर रोड पर ही मौजूद लखनऊ ग्रीन्स टाउनशिप में रोहतास क्रीसेंट के कई खरीदारों के भूखंड समायोजित कर कब्जा दिया गया। यह प्रोजेक्ट भी रोहतास क्रीसेंट के पास ही है। अब विंग कंस्ट्रक्शंस पूरे रोहतास क्रीसेंट प्रोजेक्ट को ही विकसित करने के लिए मुख्य विकासकर्ता के रूप में सामने आया है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि अप्रत्यक्ष रूप से रोहतास क्रीसेंट अब विंग कंस्ट्रक्शंस का ही प्रोजेक्ट हो गया है। सभी तकनीकी अनुमति जैसे मानचित्र स्वीकृति रोहतास प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के नाम होने से औपचारिक रूप से ही रोहतास समूह अब साथ में रहेगा।
रेरा ने डेडलाइन भी तय कर दी
रेरा ने प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए डेडलाइन भी तय कर दी है। 25 एकड़ के पहले फेज को छह महीने में पूरा करना होगा। इसके बाद बाकी प्रोजेक्ट को अगले दो साल में पूरा करना होगा। रेरा ने रोहतास के आवंटियों को राहत दिलाने के लिए अपने कांसीलेशन कंसलटेंट मणि प्रसाद मिश्रा और एलडीए के अधिकारियों की तारीफ भी की, जिससे प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ा जा सका है। रोहतास समूह के निदेशकों पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई शुरू होने के बाद प्रोजेक्ट फंसने की आशंका पैदा हो गई थी।
दो महीने में 38 प्रोजेक्ट पंजीकृत
रेरा में दो महीने के अंदर 38 प्रोजेक्टों को पंजीकृत किया गया है। इसके अलावा 18 आवेदनों को रेरा ने उचित नहीं मानते हुए निरस्त भी किया है। इन आवेदकों के पास तीन महीने का समय होगा।
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रोहतास समूह की सुल्तानपुर रोड पर मौजूद टाउनशिप में फंसे 2500 से अधिक आवंटियों को अगले छह महीने में कब्जा मिलना शुरू हो जाएगा।
इसके लिए टाउनशिप के पहले चरण में 25 एकड़ के प्रोजेक्ट का पंजीकरण भी रेरा में हो गया है।
अब रोहतास समूह की जगह मुख्य विकासकर्ता विंग कंस्ट्रक्शंस एंड डवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड इस प्रोजेक्ट को अगले दो साल में पूरा करेगा। रेरा ने भी नए विकासकर्ता को दो साल का समय दिया है।
रेरा की शुक्रवार को हुई बैठक में प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी गई। पंजीकरण के लिए रोहतास प्रोजेक्ट्स लिमिटेड और विंग कंस्ट्रक्शंस ने संयुक्त उपक्रम बनाकर नए सिरे से रेरा में आवेदन किया था।
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मंजूरी के बाद अब बिल्डर कंपनी टाउनशिप में विकास कार्य पूरे करवाकर औपचारिक रूप से आवंटन, अनुबंध और कब्जा दे पाएगी।
रोहतास ने बिना रेरा में पंजीकरण और विकास कार्य शुरू कराने के लिए डीपीआर एलडीए से पास कराए ही करीब 2500 खरीदारों को भूखंड बेच दिए थे।
पांच साल से अधिक समय से लोग रोहतास क्रीसेंट के नाम से विकसित हो रही टाउनशिप में भूखंड खरीदकर कब्जे के लिए भटक रहे हैं।
रेरा सचिव अबरार अहमद ने बताया कि रोहतास क्रीसेंट के नाम से प्रोजेक्ट को संख्या यूपीरेरापीआरजे771626 से पंजीकृत कर लिया गया है।
रेरा में प्रोजेक्ट को लेकर करीब 600 शिकायतें दर्ज हैं। पंजीकरण से प्रोजेक्ट पूरा करने में अब मदद मिलेगी।
इससे पहले 29 जुलाई 2010 को इसी प्रोजेक्ट के लिए आवेदन में कमियां मानते हुए पंजीकरण निरस्त कर दिया गया था।
प्रमुख आपत्तियों को तीन दिन और बाकी के लिए 15 दिन का समय बिल्डर कंपनी को दिया गया। आपत्तियां दूर न होने पर इस आदेश के अनुपालन में बिल्डर कंपनी का आवेदन निरस्त हो गया।
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दोबारा आवेदन के लिए तीन महीने का समय दिया गया था। कंपनी ने संयुक्त उपक्रम बना इस बार आवेदन किया।
इसमें विंग कंस्ट्रक्शन को मुख्य विकासकर्ता और रोहतास प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को विकासकर्ता के रूप में बताया गया। आवेदन की समीक्षा के बाद प्रोजेक्ट पंजीकृत कर लिया गया है।
विंग कंस्ट्रक्शंस के साथ काम कर रहा रोहतास
रेरा की सख्ती के बाद रोहतास समूह ने विंग कंस्ट्रक्शंस के साथ एक अनुबंध किया था। इसी अनुबंध में विंग कंस्ट्रक्शंस की सुल्तानपुर रोड पर ही मौजूद लखनऊ ग्रीन्स टाउनशिप में रोहतास क्रीसेंट के कई खरीदारों के भूखंड समायोजित कर कब्जा दिया गया। यह प्रोजेक्ट भी रोहतास क्रीसेंट के पास ही है। अब विंग कंस्ट्रक्शंस पूरे रोहतास क्रीसेंट प्रोजेक्ट को ही विकसित करने के लिए मुख्य विकासकर्ता के रूप में सामने आया है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि अप्रत्यक्ष रूप से रोहतास क्रीसेंट अब विंग कंस्ट्रक्शंस का ही प्रोजेक्ट हो गया है। सभी तकनीकी अनुमति जैसे मानचित्र स्वीकृति रोहतास प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के नाम होने से औपचारिक रूप से ही रोहतास समूह अब साथ में रहेगा।
रेरा ने डेडलाइन भी तय कर दी
रेरा ने प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए डेडलाइन भी तय कर दी है। 25 एकड़ के पहले फेज को छह महीने में पूरा करना होगा। इसके बाद बाकी प्रोजेक्ट को अगले दो साल में पूरा करना होगा। रेरा ने रोहतास के आवंटियों को राहत दिलाने के लिए अपने कांसीलेशन कंसलटेंट मणि प्रसाद मिश्रा और एलडीए के अधिकारियों की तारीफ भी की, जिससे प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ा जा सका है। रोहतास समूह के निदेशकों पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई शुरू होने के बाद प्रोजेक्ट फंसने की आशंका पैदा हो गई थी।
दो महीने में 38 प्रोजेक्ट पंजीकृत
रेरा में दो महीने के अंदर 38 प्रोजेक्टों को पंजीकृत किया गया है। इसके अलावा 18 आवेदनों को रेरा ने उचित नहीं मानते हुए निरस्त भी किया है। इन आवेदकों के पास तीन महीने का समय होगा।