मुस्लिमों ने मांगा अखिलेश्ा से इस्तीफा
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मुजफ्फरनगर दंगे के लिए प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराए जाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का उलेमा और मुस्लिम संगठनों ने स्वागत किया है।
साथ ही उन्होंने सूबे के मुख्यमंत्री से नैतिकता के आधार पर त्यागपत्र दिए जाने की मांग की है।
कोर्ट के आदेश पर दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने कहा कि मुस्लिम संगठन और उलेमा शुरू से ही प्रदेश सरकार की नाकामियों को जिम्मेदार मान रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट ने भी अब इस पर अपनी मुहर लगा दी है।
राजनैतिक लाभ के लिए हुए दंगे
मजलिस इत्तेहाद-ए-मिल्लत के अध्यक्ष मौलाना तारिक कासमी ने कहा कि मुजफ्फरनगर और शामली में हुए दंगे सुनियोजित तरीके से राजनैतिक लाभ उठाने के लिए कराए गए थे।
इसलिए सरकार को अपनी विफलता की जिम्मेदारी लेते हुए सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को नैतिकता के आधार पर अपना त्यागपत्र दे देना चाहिए।
अरबी के विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी ने कहा कि दंगों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला लिया है, उससे मुसलमानों का कोर्ट पर और अधिक विश्वास बढ़ गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें ताकि भविष्य में इस प्रकार के दंगों की पुनरावृत्ति न हो सके।
उलमाओं ने भी शुरू की सियासत
राजधानी के शिया व सुन्नी उलमा अब सियासी मैदान में उतर आए हैं। कोई सामने से तो कोई पीछे से राजनीतिक हिस्सेदारी कर रहा है। शहर के बड़े व छोटे उलमा ही नहीं कई संगठन भी इस चुनावी सियासत में उलझे हैं।
राजधानी के शिया व सुन्नी उलमा जिसमें प्रमुखता से कुछ नाम चुनावी दंगल में असरदार साबित होते हैं उनमें शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे सादिक, मौलाना कल्बे जव्वाद, ईदगाह इमाम मौलाना खालिद रशीद के साथ ही मौलाना आगा रूही हैं।
वहीं राजनीतिक दलों में खुलकर समर्थन को लेकर मौलाना जलाल हैदर, मौलाना इकबाल कादरी आदि उलमा पार्टियों के साथ-साथ चल रहे हैं।
शहर के उलमा धार्मिक आड़ में कहीं विरोध करके और कहीं समर्थन करके लोकसभा चुनाव में अपना-अपना असरदार प्रयास करने में जुटे हैं।
ऐसे जुड़े हैं सियासत में
बृहस्पतिवार को राजधानी में एक कार्यक्रम के दौरान मौलाना डॉ. कल्बे सादिक ने मौजूदा सरकारों को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि जनता की आवाज बिना कान वाली सरकारों तक पहुंचने वाली नहीं है।
मौलाना ने इन सरकारों की तुलना बिना कान वाले सांप से करते हुए मुसलमानों से अपील की है कि ऐसी सरकार चुनें जिसके कान हों और जनता के दर्द व जरूरत की समझ हो।
मौलाना ने अपने बयान से कांग्रेस व सपा से नाराजगी जता दी और अन्य दलों का समर्थन कर दिया। शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद लगातार कांग्रेस विरोधी मुहिम चलाकर कांग्रेस व भाजपा के विरोध में वोट देने की अपील कर चुके हैं।
मौलाना का कहना है कि भाजपा व कांग्रेस को छोड़ किसी भी अन्य दल को वोट दें। उधर, मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली की मानें तो उनका किसी दल विशेष से कोई नाता नहीं है। वे सिर्फ सांप्रदायिक शक्तियों के विरोधी हैं।
भाजपा के खिलाफ वोट का इशारा
साफ है कि भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ वोट का इशारा है। दूसरी तरफ मौलाना जलाल हैदर नकवी ने खुलकर बसपा का समर्थन करते हुए बसपा की सदस्यता अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ ले ली।
मौलाना आगा रूही व मौलाना यासूब अब्बास भी भाजपा के करीबी बताए जा रहे हैं। उनके साथ काफी बड़ा मुस्लिम तबका भाजपा का समर्थक माना जाता है।
मौलाना यासूब का कहना है कि वे चुनाव को लेकर आल इंडिया शिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड की कार्यकारिणी के बाद ही कोई ऐलान करेंगे।
साथ की गैर राजनीतिक मुसलिम संगठन जिसमें दारुल उलूम देवबंद सहारनपुर भी सियासत से दो चार हो चुका है। उसने राजनीतिक दलों व प्रत्याशियों से मिलने से मना कर नई तरह से धर्म के नाम पर चुनावी सियासत का चोला ओढ़ लिया है।