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रामलला के पुजारियों के अब बहुरेंगे दिन, ट्रस्ट करेगा नई व्यवस्था

Fri, 28 Feb 2020 03:46 AM IST
दुष्यंत शर्मा नितिन मिश्र, अयोध्या
नितिन मिश्र, अयोध्या Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 28 Feb 2020 03:46 AM IST
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Now the days of the priests of Ramlala will be changed
रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास - फोटो : अमर उजाला

राममंदिर निर्माण के लिए श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का गठन होने के बाद अब रामलला के पुजारियों के दिन भी बहुरने वाले हैं। अभी तक विराजमान रामलला के मुख्य पुजारी समेत अन्य पुजारियों को बेहद कम पारिश्रमिक मिलता है। कई बार कमिश्नर को अर्जी के बाद भी वृद्धि नहीं हो पाई। यहीं नहीं रामलला के राग-भोग में भी धनाभाव का असर था। अब रामलला के नए बुलेट प्रूफ फाइबर के अस्थाई भवन में शिफ्ट होने के साथ ट्रस्ट व्यवस्था सुधारने की तैयारी में है। अब सारी व्यवस्था ट्रस्ट के हाथ में होगी। 

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राममंदिर के पुजारियों की व्यवस्था भी अब ट्रस्ट नए सिरे से तय करेगा। ऐसे में वर्षों तंगी झेल रहे रामलला के पुजारियों के दिन बहुरने के आसार बढ़ गए हैं। अब रामलला के पुजारियों के पारिश्रमिक समेत राग-भोग में भी कोई कमी नहीं आएगी। अब तक कोर्ट के निर्देशानुसार साल दर साल महंगाई से तुलना करके बजट बनाना पड़ता था। 
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रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास कहते हैं कि अयोध्या के हनुमानगढ़ी, कनकभवन, नागेश्वरनाथ आदि किसी भी मंदिर की तुलना में यहां का खर्च बहुत कम था, जैसे-तैसे राग-भोग और पुजारियों का जीवन यापन होता रहा। मुख्य पुजारी के रूप में उन्हें 13 हजार व चार अन्य पुजारियों को आठ-आठ हजार रुपये मासिक दिया जाता है। इसके अलावा कार्यरत 4 कर्मचारियों को तो मात्र छह-छह हजार रुपये दिए जाते हैं। 
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पुजारियों का यह पारिश्रमिक सरकार के न्यूनतम वेतन अधिनियम की तुलना में भी कम है। बताया कि राग-भोग के लिए हर माह मात्र 30 हजार रुपये मिलते हैं। रामलला समेत अन्य विराजमान विग्रहों के वस्त्र आदि के लिए पिछले वर्ष रामनवमी पर 51 हजार रुपये मिला था जबकि वस्त्र से लेकर पंचमेवा, पांच तरह की पंजीरी, पंचामृत आदि में खर्च 56 हजार हुआ था। रामनवमी पर इसके पहले 42 हजार ही मिलता था। ऐसे में हर दिन के लिए तय अलग-अलग सात वस्त्र बनवाना, फटने पर उसे बदलते रहना मुश्किल होता था। कई बार पुराने वस्त्र फट जाते थे। वहीं अयोध्या के तमाम मंदिर हैं जहां भगवान को रोज नए वस्त्र पहनाए जाते हैं।
 

अब नहीं होगी, पूजा-पाठ, राग-भोग की चिंता 

विराजमान रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास कहते हैं कि राममंदिर का नया ट्रस्ट बन चुका है, इससे अच्छा और क्या होगा। अब सब कुछ नए ट्रस्ट को तय करना है। रामलला ने टाट में रहकर 10 करोड़ सरकार को दिए हैं, जब भव्य मंदिर बनेगा तो यह रकम कई गुना बढ़ जाएगी। तब पुजारी से लेकर पूजा-पाठ, राग-भोग वस्त्र आदि की कोई चिंता करने की जरूरत नहीं होगी।

निर्मोही अखाड़े ने मांगा पूजा का अधिकार 
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य निर्मोही अखाडे़ के महंत दिनेंद्र दास ने ट्रस्ट की पहली बैठक में पूजा-पाठ का अधिकारी निर्मोही अखाड़े को देने की मांग उठाई है। उनका तर्क है कि निर्मोही अखाड़ा हमेशा से ही राममंदिर में पूजा-अर्चना करता रहा है, इसलिए उसे ही पूजा पाठ का अधिकार मिलना चाहिए। महंत दिनेंद्र दास कहते हैं कि इसमें कोई शक नहीं है कि नया ट्रस्ट बनने के बाद रामलला के पूजा-पाठ से लेकर राग-भोग की व्यवस्था में भी सुधार होगा। कहा कि पूजा का अधिकार किसे दिया जाएगा यह अभी तय नहीं है।

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