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निजी मेडिकल व डेंटल कॉलेज एकमुश्त नहीं ले सकेंगे शिक्षण शुल्क, चिकित्सा शिक्षा विभाग के निर्देश
Tue, 02 Jul 2019 05:12 AM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Tue, 02 Jul 2019 05:12 AM IST
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चिकित्सा शिक्षा विभाग ने निजी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों पर शिकंजा कसते हुए हॉस्टल व सिक्योरिटी फीस निर्धारित कर दी है। साथ ही शैक्षणिक व हॉस्टल फीस को हर वर्ष लेने के निर्देश भी दिए गए हैं। यानी कि अब एमबीबीएस व बीडीएस के छात्रों को पूरे पाठ्यक्रम की फीस एक साथ नहीं भरनी होगी।
इसके अलावा निजी मेडिकल-डेंटल कॉलेज सिक्योरिटी के रूप में एक बार ही अधिकतम तीन लाख रुपये ले सकेंगे। जबकि हॉस्टल फीस अधिकतम 1.50 लाख रुपये निर्धारित की गई है। प्रमुख सचिव रजनीश दुबे ने सोमवार को इससे संबंधित शासनादेश जारी कर दिया है।
शासन के अनुसार निजी क्षेत्र के मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में सिक्योरिटी व हॉस्टल शुल्क केनाम पर छात्रों से मनमाना शुल्क वसूलने की शिकायतें मिल रही थी। साथ ही पूरे एमबीबीएस या बीडीएस कोर्स का शुल्क हर साल लेने की जगह एक साथ लेने की शिकायतें शासन को मिली थी।
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इसके बाद प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. रजनीश दुबे ने शासन से निर्धारित शैक्षणिक शुल्क व अन्य शुल्क हर साल जमा कराने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. केके गुप्ता और संबंधित जिला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह निजी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में इस आदेश का पालन कराएं। प्रमुख सचिव ने किसी भी हालत में एडवांस में शुल्क न लिए जाने को निर्देश दिए हैं।
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इसके अलावा निजी मेडिकल-डेंटल कॉलेज सिक्योरिटी के रूप में एक बार ही अधिकतम तीन लाख रुपये ले सकेंगे। जबकि हॉस्टल फीस अधिकतम 1.50 लाख रुपये निर्धारित की गई है। प्रमुख सचिव रजनीश दुबे ने सोमवार को इससे संबंधित शासनादेश जारी कर दिया है।
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शासन के अनुसार निजी क्षेत्र के मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में सिक्योरिटी व हॉस्टल शुल्क केनाम पर छात्रों से मनमाना शुल्क वसूलने की शिकायतें मिल रही थी। साथ ही पूरे एमबीबीएस या बीडीएस कोर्स का शुल्क हर साल लेने की जगह एक साथ लेने की शिकायतें शासन को मिली थी।
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इसके बाद प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. रजनीश दुबे ने शासन से निर्धारित शैक्षणिक शुल्क व अन्य शुल्क हर साल जमा कराने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. केके गुप्ता और संबंधित जिला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह निजी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में इस आदेश का पालन कराएं। प्रमुख सचिव ने किसी भी हालत में एडवांस में शुल्क न लिए जाने को निर्देश दिए हैं।
छह कॉलेज पिछले सत्र की ही ले सकेंगे फीस
प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य डॉ. रजनीश दुबे ने चार निजी मेडिकल कॉलेजों और दो डेंटल कॉलेजों की वार्षिक फीस का भी निर्धारण किया है। सोमवार को उन्होंने बताया कि जीएस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल हापुड़, प्रसाद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज लखनऊ, कृष्ण मोहन मडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल मथुरा, सुभारती मेडिकल कॉलेज मेरठ, पूर्वांचल इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज गोरखपुर, सुभारती डेंटल कॉलेज मेरठ ने एमबीबीएस व बीडीएस पाठ्यक्रमों की 2019-20 सत्र की फीस निर्धारित करने का प्रस्ताव दिया था। प्रस्ताव पर विचार के बाद इन सभी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों को वर्ष 2018-19 सत्र के लिए निर्धारित शुल्क लेने की स्वीकृति दी गई है।