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ऐतिहासिक मूसाबाग के आसपास बसेगा आधुनिक लखनऊ, एलडीए ने तैयार किया ले-आउट
Mon, 12 Aug 2019 11:25 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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Published by: Amulya Rastogi
Updated Mon, 12 Aug 2019 11:25 PM IST
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एलडीए
- फोटो : amar ujala
राजधानी के ऐतिहासिक स्मारक मूसा बाग किला के संरक्षण के साथ इसके आसपास एलडीए आधुनिक लखनऊ की नींव रखेगा। यहां आवासीय भूखंड विकसित करने की जगह मूसाबाग स्मारक के आसपास होटल, शैक्षिक संस्थान और बहुमंजिला अपॉर्टमेंट बनाने के लिए जगह छोड़ी गई है। नजूल की जमीनों से कब्जा हटवाने के बाद खाली हुई आसपास की जमीनों के विकास के लिए नया ले-आउट एलडीए ने तैयार किया है।
मूसाबाग किले के पास एलडीए की करीब 22 हेक्टेयर जमीन है। इस पर सेक्टर-आई का विकास होना है। पूर्व में यहां छोटे आवासीय भूखंड काटे गए थे। इससे संरक्षित स्मारक मूसाबाग के आसपास मौजूद जमीनों के अतिक्रमण होने की आशंका पैदा हो गई। नजूल की जमीनों से किसी तरह मुआवजा देकर 36 साल में जमीन खाली करा पाया। अब एलडीए दोबारा यहां कोई मुश्किल नहीं चाहता। ऐसे में मूसाबाग के आसपास अब व्यावसायिक उपयोग और बहुमंजिला अपार्टमेंट बनाने की योजना बनाई गई है। ले-आउट को प्रशासनिक अनुमति भी मिल गई है।
बस अड्डा भी बनाया जाना प्रस्तावित
60 मीटर चौड़ी रिंगरोड पर मौजूद इस सेक्टर के शुरुआत में ही बस अड्डा के लिए जमीन आरक्षित की गई है। यह बस अड्डा जॉगर्स पार्क के पास होगा। बस अड्डा और मूसाबाग के बीच की खाली जमीन पर अब विकास एलडीए ने शुरू कर दिया है जिससे अंदरूनी सड़के और दूसरे अवस्थापना सुविधाओं के काम पूरे कराए जा सकें।
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मूसाबाग किले के पास एलडीए की करीब 22 हेक्टेयर जमीन है। इस पर सेक्टर-आई का विकास होना है। पूर्व में यहां छोटे आवासीय भूखंड काटे गए थे। इससे संरक्षित स्मारक मूसाबाग के आसपास मौजूद जमीनों के अतिक्रमण होने की आशंका पैदा हो गई। नजूल की जमीनों से किसी तरह मुआवजा देकर 36 साल में जमीन खाली करा पाया। अब एलडीए दोबारा यहां कोई मुश्किल नहीं चाहता। ऐसे में मूसाबाग के आसपास अब व्यावसायिक उपयोग और बहुमंजिला अपार्टमेंट बनाने की योजना बनाई गई है। ले-आउट को प्रशासनिक अनुमति भी मिल गई है।
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बस अड्डा भी बनाया जाना प्रस्तावित
60 मीटर चौड़ी रिंगरोड पर मौजूद इस सेक्टर के शुरुआत में ही बस अड्डा के लिए जमीन आरक्षित की गई है। यह बस अड्डा जॉगर्स पार्क के पास होगा। बस अड्डा और मूसाबाग के बीच की खाली जमीन पर अब विकास एलडीए ने शुरू कर दिया है जिससे अंदरूनी सड़के और दूसरे अवस्थापना सुविधाओं के काम पूरे कराए जा सकें।
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100 मीटर क्षेत्र रहेगा ‘नो कंस्ट्रक्शन जोन’
मूसाबाग स्मारक के आसपास 100 मीटर का क्षेत्र ‘नो कंस्ट्रक्शन जोन’ रहेगा। यहां किसी भी तरह के निर्माण की अनुमति नहीं होगी। एलडीए खुद भी इस जमीन का नियोजन नहीं कर रहा है। यह जमीन मूसाबाग स्मारक से ही संबद्ध रहेगी।
अतिक्रमण नहीं हो इसके लिए भी पहल
एलडीए के उद्यान विभाग को वीसी प्रभु एन सिंह ने पूर्व में एक प्रस्ताव बनाने का आदेश दिया था। अब यहां 100 मीटर के क्षेत्र में ग्रीनबेल्ट विकसित कर दी जाएगी। सेक्टर आई का विकास कार्य शुरू होने के साथ ही यहां ग्रीनबेल्ट विकसित करने का काम शुरू होगा। ऐसा इस क्षेत्र में किसी भी तरह के अतिक्रमण के भविष्य में होने से रोकने के लिए किया जा रहा है। किले का विकास कराने के लिए पुरातत्व विभाग को भी पत्र भेजा जाएगा।
मूसाबाग किला : फैक्ट फाइल
इतिहास में दर्ज सूचना के मुताबिक, मूसाबाग किले का निर्माण पांचवें नवाब सआदत अली खान ने 19वीं सदी की शुरुआत में में लामार्ट कॉलेज की बिल्डिंग कांस्टेंशिया और छतर मंजिल की वास्तुकला से प्रभावित होकर कराया। नदी किनारे हुए इस निर्माण में फ्रांस की वास्तुकला की झलक मिलती है। संरक्षण नहीं होने की वजह से अब यह इमारत खंडहर में बदलती जा रही है।
अतिक्रमण नहीं हो इसके लिए भी पहल
एलडीए के उद्यान विभाग को वीसी प्रभु एन सिंह ने पूर्व में एक प्रस्ताव बनाने का आदेश दिया था। अब यहां 100 मीटर के क्षेत्र में ग्रीनबेल्ट विकसित कर दी जाएगी। सेक्टर आई का विकास कार्य शुरू होने के साथ ही यहां ग्रीनबेल्ट विकसित करने का काम शुरू होगा। ऐसा इस क्षेत्र में किसी भी तरह के अतिक्रमण के भविष्य में होने से रोकने के लिए किया जा रहा है। किले का विकास कराने के लिए पुरातत्व विभाग को भी पत्र भेजा जाएगा।
मूसाबाग किला : फैक्ट फाइल
इतिहास में दर्ज सूचना के मुताबिक, मूसाबाग किले का निर्माण पांचवें नवाब सआदत अली खान ने 19वीं सदी की शुरुआत में में लामार्ट कॉलेज की बिल्डिंग कांस्टेंशिया और छतर मंजिल की वास्तुकला से प्रभावित होकर कराया। नदी किनारे हुए इस निर्माण में फ्रांस की वास्तुकला की झलक मिलती है। संरक्षण नहीं होने की वजह से अब यह इमारत खंडहर में बदलती जा रही है।
तैयार हो गया है लेआउट
मूसाबाग किला को ध्यान में रखते हुए विकास आसपास की जमीनों का कराया जा रहा है। यहां होटल, बहुमंजिला अपार्टमेंट, संस्थाओं के उपयोग के लिए बड़े भूखंड विकसित किए जाएंगे। इसका ले-आउट तैयार हो गया है।
- प्रताप शंकर मिश्रा, अधिशासी अभियंता, एलडीए
- प्रताप शंकर मिश्रा, अधिशासी अभियंता, एलडीए