फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   now maggi in again controversy in lucknow

यूपी में कौन कर रहा मैगी को जांच से बचवाने की साजिश?

Wed, 03 Jun 2015 11:35 AM IST
Updated Wed, 03 Jun 2015 11:35 AM IST
विज्ञापन
now maggi in again controversy in lucknow

मैगी में खतरनाक केमिकल्स मिलने के बाद पूरे देश में अभियान चलाकर इसकी जांच कराने का अभियान चल रहा है। सैंपल लिए जा रहे हैं और जांच रिपोर्ट आने के बाद कुछ राज्यों ने इस पर प्रतिबंध लगाने का भी ऐलान कर दिया है।

विज्ञापन


लेकिन राजधानी में चार मई को लिए गए नमूने की जांच अभी तक नहीं हो पाई है। दरअसल लखनऊ की लैब में इनकी जांच करने वाली मशीन ही खराब है। जबकि लैब से जुड़े अधिकारी मशीन खराब होने की हकीकत को छिपा कर जल्द ही जांच रिपोर्ट जारी करने का झांसा दे रहे हैं।
विज्ञापन


एफएसडीए की राजधानी स्थित लैब से जुड़े जिम्मेदार इस बाबत कुछ भी बताने से इन्कार कर रहे हैं, हालांकि नाम न उजागर करने की शर्त पर एफएसडीए मुख्यालय से जुड़े कुछ जिम्मेदार बताते हैं कि लैब में लेड जांचने वाली मशीन खराब है। वहीं, एफएसडीए के सहायक आयुक्त फूड विजय बहादुर का कहना है कि लैब प्रभारी ने बीते सप्ताह मशीन खराब होने की जानकारी दी थी। मशीन दुरुस्त कराई जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


बाराबंकी से लिए गए मैगी नूडल्स के नमूनों के रिफरल लैब की जांच में सेहत के लिए जानलेवा पाया गया था। इसके बाद एफएसडीए मुख्यालय के निर्देश पर ही 4 मई को रेंडम सर्वे के तहत अलग-अलग जगहों से मैगी के 12 नमूने लेकर लखनऊ की लैब को भेजे गए थे। एक्ट के प्रावधान और बच्चों की सेहत से जुड़े मामले को देखते हुए रिपोर्ट 14 दिनों में दी जानी थी, लेकिन लैब के अधिकारी करीब एक माह से टालमटोल कर रहे हैं।

आठ को आएंगी जांच वाली मशीने

now maggi in again controversy in lucknow

खाद्य नमूनों में लेड और एमसीजी (मोनोसोडियम ग्लूकामेट) की मात्रा को त्वरित जांचने के लिए हाईटेक मशीन मंगाई जा रही है। यह मशीन 8 जून तक लैब में स्टाल होगी। इसके बाद ऐसे नमूनों की जांच त्वरित स्तर पर होने से नमूना रिपोर्ट आने में लेटलतीफी को भी रोका जा सकेगा।

एफएसडीए की सुस्ती के चलते राजधानी के लोग मिलावटी सामान खाने का मजबूर हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि एफएसडीए ने डेढ़ माह के दौरान कार्रवाई के नाम पर सिर्फ 36 नमूने ही सील किए। अब उन नमूने की जांच रिपोर्ट मिलने में लेटलतीफी हो रही है। एक अप्रैल से 19 मई तक शहर में 15 अलग-अलग जगहों से 36 नमूने लिए गए थे।

लैब की सुस्त जांच के चलते लैब रिपोर्ट में मार्च और अप्रैल के पहले पखवाड़े में लिए गए 20 नमूनों की जांच रिपोर्ट ही उस अवधि में मिली।इसमें से 9 नमूने जांच रिपोर्ट में फेल बताए गए। पुराने और नए नमूनों की फेल जांच रिपोर्ट के आधार पर 17 वाद संबंधित कोर्ट में दायर किए गए। वर्तमान में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम के यहां फेल आए खाद्य नमूनों से जुड़े 996 और एडीएम पूर्वी कोर्ट में 124 वाद निस्तारण को लंबित हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed