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एलडीए भी अपनी कॉलोनियों में वसूलेगा ‘मेंटेनेंस फीस’, निजी बिल्डरों की राह पर प्राधिकरण
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एलडीए भी अपनी कॉलोनियों में वसूलेगा ‘मेंटेनेंस फीस’, निजी बिल्डरों की राह पर प्राधिकरण
लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) अपनी आवासीय योजनाओं में बनी कॉलोनियों में निजी बिल्डरों की तरह मेंटेनेंस फीस की वसूली करेगा।
इसके लिए दरें आवासीय भू-उपयोग में 3.40 रुपये प्रति वर्गमीटर और व्यावसायिक भू-उपयोग में 6.80 रुपये प्रति वर्गमीटर हो सकती हैं।
वहीं स्कूलों को मेंटेनेंस फीस में राहत दी गई है। ऐसे भूखंडों पर व्यावसायिक भू-उपयोग की दरों का केवल 10 प्रतिशत ही देना होगा। एलडीए अब अनुमति के लिए आवास विभाग को अपना प्रस्ताव भेज रहा है।
एलडीए अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा समय में गोमतीनगर विस्तार, सीजी सिटी, जानकीपुरम विस्तार, मानसरोवर योजना का विकास होने के बाद भी रखरखाव का काम प्राधिकरण के ही पास है।
इन योजनाओं में मौजूदा समय में दो दर्जन से अधिक कालोनियां हैं। इन कॉलोनियों में करीब तीन लाख की आबादी अभी रहती है।
वहीं, इसके अलावा भविष्य में बसंतकुंज, मोहान रोड योजना में भी कॉलोनियों का रखरखाव एलडीए के ऊपर होगा। नई योजनाओं में कब्जा देने के बाद से ही मेंटेनेंस फीस लागू हो जाएगी।
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यहां रहने वाले लोगों के लिए आवश्यक सेवाओं जैसे सफाई, सड़कों की मरम्मत, पार्क की देखरेख, स्ट्रीटलाइट की मरम्मत जैसे काम एलडीए को कराने होते हैं। इसमें हर साल करोड़ों रुपये का खर्च एलडीए अपने बजट या अवस्थापना निधि से करता है।
15 साल से अधिक समय हैंडओवर में लग रहा
एलडीए से आवास विभाग को जा रहे पत्र में कहा गया है कि यूपी नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 34 में कॉलोनियों का विकास कर नगर निगम को हैंडओवर किए जाने का प्रावधान है। हैंडओवर करने तक एलडीए को ही रखरखाव करना होता है। कॉलोनियों को हैंडओवर करने में औसतन 15 साल से अधिक समय तक लग जा रहा है। इससे एलडीए के ऊपर आर्थिक बोझ बढ़ता है। ऐसे में मेंटेनेंस फीस लिए जाने की तैयारी की गई है।
गाजियाबाद पहले ही लागू कर चुका
एलडीए अधिकारियों का कहना है कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण पहले ही अपने बोर्ड से प्रस्ताव पास कर मेंटनेंस फीस लेना शुरू कर चुका है। हर महीने यह शुल्क वहां प्राधिकरण अपने आवंटियों से वसूल करता है। एलडीए भी उसी पैटर्न पर मेंटेनेंस फीस आवंटियों से लेना चाहता है। दरें तय करने के लिए केंद्र सरकार के कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स को आधार बनाया गया है।
इन कॉलोनियों पर लागू होगी फीस
जानकीपुरम विस्तार के सभी सेक्टर्स, गोमतीनगर विस्तार के सभी सेक्टर्स, सीजी सिटी के नॉर्थ व साउथ ब्लॉक, मानसरोवर योजना के सेक्टर ओ व पी।
विधिक राय के बाद बनी नियमावली
एलडीए ने अपनी कॉलोनियों में मेंटेनेंस फीस लगाने के लिए विधिक राय भी ली है। इसके बाद ही लखनऊ विकास प्राधिकरण के विकसित योजनाओं में आवश्यक सेवाओं के अनुरक्षण हेतु विनियम-2019 नाम से नियमावली तैयार की गई है। एलडीए की बोर्ड बैठक में भी इसके लिए प्रस्ताव रखा गया। यहां आवास विभाग से अनुमति लिए जाने के लिए निर्देश एलडीए को मिले हैं। अब आवास विभाग को पत्र एलडीए भेज रहा है। आवास विभाग ने ही 21 साल पहले खुद ही दरें निर्धारित करते हुए प्राधिकरणों को इसे लागू करने का विकल्प दिया था।
आवास विभाग से अनुमति का इंतजार
वीसी, एलडीए, प्रभु एन सिंह ने बताया कि आवास विभाग को पत्र भेजा जा रहा है, जिससे मेंटेनेंस फीस की दरों को अंतिम रूप दिया जा सके। आवास विभाग से अनुमति मिलते ही मेंटेनेंस फीस को लागू कर दिया जाएगा। इससे एलडीए को कॉलोनियों के रखरखाव के लिए नियमित रूप से बजट मिलना शुरू हो जाएगा।
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लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) अपनी आवासीय योजनाओं में बनी कॉलोनियों में निजी बिल्डरों की तरह मेंटेनेंस फीस की वसूली करेगा।
इसके लिए दरें आवासीय भू-उपयोग में 3.40 रुपये प्रति वर्गमीटर और व्यावसायिक भू-उपयोग में 6.80 रुपये प्रति वर्गमीटर हो सकती हैं।
वहीं स्कूलों को मेंटेनेंस फीस में राहत दी गई है। ऐसे भूखंडों पर व्यावसायिक भू-उपयोग की दरों का केवल 10 प्रतिशत ही देना होगा। एलडीए अब अनुमति के लिए आवास विभाग को अपना प्रस्ताव भेज रहा है।
एलडीए अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा समय में गोमतीनगर विस्तार, सीजी सिटी, जानकीपुरम विस्तार, मानसरोवर योजना का विकास होने के बाद भी रखरखाव का काम प्राधिकरण के ही पास है।
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इन योजनाओं में मौजूदा समय में दो दर्जन से अधिक कालोनियां हैं। इन कॉलोनियों में करीब तीन लाख की आबादी अभी रहती है।
वहीं, इसके अलावा भविष्य में बसंतकुंज, मोहान रोड योजना में भी कॉलोनियों का रखरखाव एलडीए के ऊपर होगा। नई योजनाओं में कब्जा देने के बाद से ही मेंटेनेंस फीस लागू हो जाएगी।
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यहां रहने वाले लोगों के लिए आवश्यक सेवाओं जैसे सफाई, सड़कों की मरम्मत, पार्क की देखरेख, स्ट्रीटलाइट की मरम्मत जैसे काम एलडीए को कराने होते हैं। इसमें हर साल करोड़ों रुपये का खर्च एलडीए अपने बजट या अवस्थापना निधि से करता है।
15 साल से अधिक समय हैंडओवर में लग रहा
एलडीए से आवास विभाग को जा रहे पत्र में कहा गया है कि यूपी नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 34 में कॉलोनियों का विकास कर नगर निगम को हैंडओवर किए जाने का प्रावधान है। हैंडओवर करने तक एलडीए को ही रखरखाव करना होता है। कॉलोनियों को हैंडओवर करने में औसतन 15 साल से अधिक समय तक लग जा रहा है। इससे एलडीए के ऊपर आर्थिक बोझ बढ़ता है। ऐसे में मेंटेनेंस फीस लिए जाने की तैयारी की गई है।
गाजियाबाद पहले ही लागू कर चुका
एलडीए अधिकारियों का कहना है कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण पहले ही अपने बोर्ड से प्रस्ताव पास कर मेंटनेंस फीस लेना शुरू कर चुका है। हर महीने यह शुल्क वहां प्राधिकरण अपने आवंटियों से वसूल करता है। एलडीए भी उसी पैटर्न पर मेंटेनेंस फीस आवंटियों से लेना चाहता है। दरें तय करने के लिए केंद्र सरकार के कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स को आधार बनाया गया है।
इन कॉलोनियों पर लागू होगी फीस
जानकीपुरम विस्तार के सभी सेक्टर्स, गोमतीनगर विस्तार के सभी सेक्टर्स, सीजी सिटी के नॉर्थ व साउथ ब्लॉक, मानसरोवर योजना के सेक्टर ओ व पी।
विधिक राय के बाद बनी नियमावली
एलडीए ने अपनी कॉलोनियों में मेंटेनेंस फीस लगाने के लिए विधिक राय भी ली है। इसके बाद ही लखनऊ विकास प्राधिकरण के विकसित योजनाओं में आवश्यक सेवाओं के अनुरक्षण हेतु विनियम-2019 नाम से नियमावली तैयार की गई है। एलडीए की बोर्ड बैठक में भी इसके लिए प्रस्ताव रखा गया। यहां आवास विभाग से अनुमति लिए जाने के लिए निर्देश एलडीए को मिले हैं। अब आवास विभाग को पत्र एलडीए भेज रहा है। आवास विभाग ने ही 21 साल पहले खुद ही दरें निर्धारित करते हुए प्राधिकरणों को इसे लागू करने का विकल्प दिया था।
आवास विभाग से अनुमति का इंतजार
वीसी, एलडीए, प्रभु एन सिंह ने बताया कि आवास विभाग को पत्र भेजा जा रहा है, जिससे मेंटेनेंस फीस की दरों को अंतिम रूप दिया जा सके। आवास विभाग से अनुमति मिलते ही मेंटेनेंस फीस को लागू कर दिया जाएगा। इससे एलडीए को कॉलोनियों के रखरखाव के लिए नियमित रूप से बजट मिलना शुरू हो जाएगा।