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लविवि कराएगा पीएचडी वाइवा की वीडियो रिकॉर्डिंग
Wed, 19 Jun 2019 01:44 AM IST
manoj tiwari
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: manoj tiwari
Updated Wed, 19 Jun 2019 01:44 AM IST
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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय चोरी-छिपे और मिलीभगत से होने वाले पीएचडी वाइवा पर रोक लगाने के लिए वाइवा की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने की तैयारी कर रहा है। रिकॉर्डिंग की सीडी बनवाकर इसे रिकॉर्ड में रखा जाएगा।
विश्वविद्यालय में कई बार चहेतों को पीएचडी कराने की शिकायत मिलती रही हैं। पीएचडी विद्यार्थियों की छमाही या फिर सालाना परीक्षा नहीं होती है। ऐसे में उनकी सच्चाई सामने नहीं आ पाती है। पीएचडी थीसिस जमा करने के बाद वाइवा होता है। वाइवा में शिक्षकों के साथ ही सभी शोधार्थियों और सामान्य विद्यार्थियाें को बैठने की अनुमति होती है। सबके पास शोध से संबंधित सवाल पूछने का मौका होता है। इसी वजह से चहेतों के वाइवा चोरी-छिपे ही निपटा दिये जाते हैं।
...लेकिन पीएचडी स्कॉलर का ब्योरा नहीं हुआ ऑनलाइन
यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों को उनके यहां के पीएचडी स्टूडेंट्स का ब्योरा ऑनलाइन करने को कहा है। लखनऊ विश्वविद्यालय में ऑनलाइन तो दूर पीएचडी स्कॉलर्स का ब्योरा ऑफलाइन तक उपलब्ध नहीं है। लविवि में पीएचडी स्टूडेंट्स के ब्यौरे के लिए 15 साल पहले तक वर्षवार एक किताब छापी जाती थी। इस किताब में रिसर्च स्कॉलर तथा उनके शोध शीर्षक की जानकारी होती थी। विवि ने यह प्रकाशन भी बंद कर दिया है। इस तरह से विवि के पीएचडी स्कॉलर्स का ब्योरा मिलना आसान नहीं है।
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विभागाध्यक्षों से करेंगे बात
पीएचडी वाइवा में कई बार सवाल उठाये जाते हैं। इसलिए हम पीएचडी वाइवा की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने की योजना तैयार कर रहे हैं। इस पर एक बार विभागाध्यक्षों से बात की जाएगी। इसके बाद यह व्यवस्था लागू हो जाएगी।
प्रो. एसपी सिंह, कुलपति, लविवि
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विश्वविद्यालय में कई बार चहेतों को पीएचडी कराने की शिकायत मिलती रही हैं। पीएचडी विद्यार्थियों की छमाही या फिर सालाना परीक्षा नहीं होती है। ऐसे में उनकी सच्चाई सामने नहीं आ पाती है। पीएचडी थीसिस जमा करने के बाद वाइवा होता है। वाइवा में शिक्षकों के साथ ही सभी शोधार्थियों और सामान्य विद्यार्थियाें को बैठने की अनुमति होती है। सबके पास शोध से संबंधित सवाल पूछने का मौका होता है। इसी वजह से चहेतों के वाइवा चोरी-छिपे ही निपटा दिये जाते हैं।
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...लेकिन पीएचडी स्कॉलर का ब्योरा नहीं हुआ ऑनलाइन
यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों को उनके यहां के पीएचडी स्टूडेंट्स का ब्योरा ऑनलाइन करने को कहा है। लखनऊ विश्वविद्यालय में ऑनलाइन तो दूर पीएचडी स्कॉलर्स का ब्योरा ऑफलाइन तक उपलब्ध नहीं है। लविवि में पीएचडी स्टूडेंट्स के ब्यौरे के लिए 15 साल पहले तक वर्षवार एक किताब छापी जाती थी। इस किताब में रिसर्च स्कॉलर तथा उनके शोध शीर्षक की जानकारी होती थी। विवि ने यह प्रकाशन भी बंद कर दिया है। इस तरह से विवि के पीएचडी स्कॉलर्स का ब्योरा मिलना आसान नहीं है।
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विभागाध्यक्षों से करेंगे बात
पीएचडी वाइवा में कई बार सवाल उठाये जाते हैं। इसलिए हम पीएचडी वाइवा की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने की योजना तैयार कर रहे हैं। इस पर एक बार विभागाध्यक्षों से बात की जाएगी। इसके बाद यह व्यवस्था लागू हो जाएगी।
प्रो. एसपी सिंह, कुलपति, लविवि