अखिलेश सरकार को देना होगा 10 लाख रुपए का हर्जाना
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हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक अहम फैसले में कहा है कि स्कूल-कॉलेजों, अस्पतालों या समाज सेवा से जुड़े संस्थानों की जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा है कि अधिग्रहण उन्हीं हालात में किया जा सकता है, जबकि देशहित में ऐसा करना अपरिहार्य हो। अदालत ने इसके साथ ही राजधानी के ला-मार्टीनियर बॉयज कॉलेज की जमीन के अधिग्रहण के लिए 31 साल पहले शुरू की गई कार्यवाहियों को रद्द कर दिया।
साथ ही यूपी सरकार और आवास एवं विकास परिषद समेत अन्य पक्षकारों पर 10 लाख रुपये का हर्जाना ठोका है। यह रकम कॉलेज ट्रस्ट को मिलेगी।
न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह व न्यायमूर्ति अरविंद कुमार त्रिपाठी द्वितीय की खंडपीठ ने फैसले में कहा कि यूपी हाउसिंग बोर्ड और सरकार की ओर से कॉलेज की जमीन का अधिग्रहण करने के लिए जारी किए नोटिस और अधिसूचनाएं जनहित में नहीं हैं।
यह अधिग्रहण कानून की प्रकिया का दुरुपयोग और मनमाना लगता है। कोर्ट ने ला-मार्टीनियर कॉलेज बोर्ड की याचिका को मंजूर करते हुए इसमें चुनौती दिए गए नोटिसों, अधिसूचनाओं व आदेशों को रद्द कर दिया।
कोर्ट ने साफ कहा कि कॉलेज से जुड़ी जमीन के जायज इस्तेमाल करने में दखल न दिया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि दो माह में हर्जाने की रकम न जमा किए जाने पर डीएम इसकी तीन माह में वसूली कर रकम कोर्ट में जमा कराएंगे।
ये था मामला
ला-मार्टीनियर कॉलेज के बोर्ड केएसी ग्रेस समेत तीन सदस्यों की ओर से वर्ष 1983 में दायर की गई याचिका में वर्ष 1982 और इसके बाद कॉलेज की जमीन का अधिग्रहण करने के लिए जारी किए गए नोटिसों, अधिसूचना और संबंधित आदेशों को रद्द किए जाने की गुजारिश की गई थी।
याचियों की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप नारायण माथुर ने इन्हें कानून की मंशा के खिलाफ बताया तो यूपी आवास एवं विकास परिषद समेत अन्य पक्षकारों की तरफ से याचिका का विरोध किया गया।
इस मामले पर हाईकोर्ट ने कहा है कि जब तक देश की सुरक्षा के मद्देनजर या राष्ट्रहित में जरूरी न हो या आपातकाल न हो, शिक्षा, मेडिकल या चैरिटी के कामों से जुड़े संस्थानों की जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाना चाहिए।
क्या सरकार ने जबरन ली हैं किसानों की जमीनें?
इधर एक दूसरे मामले में भी हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को जानकारी तलब की है। ये मामला है रामपुर में बन रही मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी का।
प्रदेश सरकार पर आरोप है कि उन्होंने इसके लिए किसानों से जबरन जमीनें ली हैं। इस मामले में एक अवमानना याचिका दाखिल की गई है।
याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति आरडी खरे ने डीएम रामपुर और प्रदेश सरकार को इस मामले पर 30 अक्तूबर तक जानकारी देने को कहा है।
याचिका ग्रामसभा सिंगन खेड़ा मजरा अलियागंज के मो. हसन और पांच अन्य ने दाखिल की है।
याचियों के अधिवक्ता प्रमोद कुमार सिन्हा के मुताबिक जौहर विवि के आसपास के गांवों के किसानों से जमीनें जबरन ली जा रही हैं और इसके बदले में उनको कोई मुआवजा भी नहीं दिया जाता।