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अब सिर्फ दो रुपए में पता लगेगा कैंसर का इंफेक्शन

Fri, 05 Dec 2014 06:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 05 Dec 2014 06:11 PM IST
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now breast cancer surgery cost is come down.

पहला इनोवेशनः ब्रेस्ट कैंसर होने पर बगल के नीचे की कोशिकाओं (लिम्फ नोड) में संक्रमण पता करने के लिए अलग-अलग विदेशी डाई का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी कीमत भारत में 1100 रुपये और अमेरिका में 500 डॉलर तक औसत है।

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पीजीआई में चिकित्सकों की टीम ने इसकी जगह मैथिलीन ब्ल्यू कलर डाई का उपयोग किया। जेनरिक डाई से इसका खर्च केवल दो रुपये प्रति मरीज आया। इंजेक्शन के रूप में इस डाई को कैंसर प्रभावित कोशिका को चिह्नित करने के लिए उपयोग किया जाता है।
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दूसरा इनोवेशनः ब्रेस्ट में ट्यूमर होने के बाद उसकी रेडियोथैरेपी की जाती है। इससे ट्यूमर सिकुड़कर कम होने लगता है। साइज कितना कम हो रहा है। यह जानने के लिए एक विदेशी कंपनी के उपकरण के साथ मार्जिन मार्कर लगाया जाता है।
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इसकी कीमत 1,000 रुपये से लेकर कई हजार तक में होती है। इसके लिए पीजीआई के सर्जन डॉ. गौरव अग्रवाल ने सिल्वर के तार का उपयोग किया। एक सेमी साइज के सिल्वर तार को विसंक्रमित करने के बाद लंबर पंक्चर सुई के साथ उपकरण बनाया गया।

केवल 15 रुपये के खर्च में यह पूरा काम हो गया। अब इस तरीके को एम्स जैसे संस्थान ने उपयोग करना शुरू किया है।

पीजीआई के डॉ. गौरव अग्रवाल ने किया ये कमाल

now breast cancer surgery cost is come down.
इन इनोवेशन के पीछे एसजीपीजीआई के एंडोक्राइन एंड ब्रेस्ट सर्जरी के प्रोफेसर डॉ. गौरव अग्रवाल रहे। सीडीआरआई में  बृहस्पतिवार को क्लीनिकल रिसर्च पर आयोजित कांफ्रेंस में पहुंचे प्रो. अग्रवाल ने बताया कि इस समय हमारी जरूरत न्यूनतम नुकसान और संसाधन के उपयोग की है। इनोवेशन के जरिए हमने इसी काम का आगाज किया है।

उनका कहना था कि डायग्नोसिस में इनोवेशन के साथ हम कम से कम सर्जरी पर भी काम कर रहे हैं। मरीजों को भी जागरूक किया जा रहा है। ब्रेस्ट सर्जरी के कुल मामलों में से 20 प्रतिशत ऐसे केस होते हैं जिन्हें सर्जरी किए बिना ही ठीक किया जा सकता है।

इसके बावजूद यह मरीज सर्जरी कराते हैं। हमारी कोशिशों की वजह से अब भी ब्रेस्ट कैंसर में 40 प्रतिशत में मैसेक्टमी (ब्रेस्ट निकालने का ऑपरेशन) नहीं कराते। अब लिम्फ नोड नहीं निकालने पर काम शुरू किया है। इससे 40 प्रतिशत मरीजों का हाथ खराब हो जाता है।अब केवल चिह्नित लिम्फ नोड को ही निकालने का ऑपरेशन होता है। जल्द ही केवल रेडियोथैरेपी से ही इसे ठीक किया जा सकेगा। इसके लिए क्लीनिकल रिसर्च अलग-अलग संस्थानों में चल रहा है। हम भी इस दिशा में काम कर रहे हैं।

प्रो. अग्रवाल ने कहा कि किसी महिला का अपनी बची जिंदगी बिना शरीर के एक  हिस्से के रहना आसान नहीं होता। यह मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से महत्वपूर्ण आवश्यकता है। 60 प्रतिशत तक ब्रेस्ट कैंसर के केस में ब्रेस्ट को बचाया भी जा सकता है।
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