यूपी चुनाव में अब दिग्गज भाजपाइयों का 'रियल टेस्ट'
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चार चरणों के बाद चुनावी जंग अब भगवा टोली के प्रमुख चेहरों के इलाकों में पहुंच गई है। कहीं से सियासी दिग्गज खुद मैदान में हैं तो कहीं उनके परिवार का कोई सदस्य चुनाव लड़ रहा है।
इनमें से कई चेहरों के इलाके में पिछले चुनाव में कमल खिल नहीं पाया था। सिर्फ इनसे जुड़ी सीट पर ही नहीं, कहीं-कहीं तो पूरे जिले में पार्टी का खाता नहीं खुला था। ऐसे में अपने इलाके में कमल खिलाना इनके लिए बड़ी चुनौती है।
वैसे तो केंद्रीय मंत्री होने के नाते राजनाथ सिंह व कलराज मिश्र तथा प्रदेश अध्यक्ष होने के कारण केशव प्रसाद मौर्य के लिए पूरे प्रदेश का ही चुनाव उनकी साख से जुड़ा है, पर जन्मभूमि और शुरुआती कर्मभूमि होने के नाते पूर्वांचल में भाजपा का बेहतर प्रदर्शन इनके लिए काफी मायने रखता है।
इनके अलावा केंद्र में मंत्री डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय, मनोज सिन्हा, अनुप्रिया पटेल व साध्वी निरंजन ज्योति के गृहजिलों के नतीजे भी इनकी प्रतिष्ठा का सवाल बन गए हैं।
कसौटी पर होंगे ये प्रमुख चेहरे
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह के गृहजिला मिर्जापुर में पांचवें चरण में चुनाव होना है। विधानसभा के पिछले चुनाव में इस जिले में भाजपा का खाता भी नहीं खुल पाया था। पार्टी ने इस बार ओमप्रकाश को इस इलाके में कमल खिलाने की जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं उनके पुत्र अनुराग सिंह खुद भी चुनार से मैदान में हैं।
यहां से ओमप्रकाश कई बार विधायक रह चुके हैं। जाहिर है, यहां के नतीजे सिंह की साख बताएंगे। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रमापति राम त्रिपाठी गोरखपुर के रहने वाले हैं। उनके बेटे शरद त्रिपाठी संत कबीरनगर से सांसद हैं।
पिछले चुनाव में गोरखपुर जिले की 9 सीटों में से भाजपा को महज तीन पर विजय मिली थी। यहां की कैम्पियरगंज सीट से राष्ट्रवादी कांग्रेस के टिकट पर चुने गए फतेह बहादुर बाद में भाजपा में आ गए थे। इस बार वे भाजपा के टिकट से मैदान में हैं।
यूं तो मुख्य रूप से गोरखपुर और आसपास की कमान भगवा टीम के प्रमुख चेहरे सांसद महंत आदित्यनाथ के हाथ रहती है, लेकिन यहां के प्रत्याशियों के साथ रमापति राम त्रिपाठी की भी परीक्षा है। भाजपा सांसद विनय कटियार के गृहजिले फैजाबाद की पांच में से सिर्फ एक सीट भाजपा को मिली थी। जाहिर है फैजाबाद का नतीजा इनकी प्रतिष्ठा से जुड़ा है।
इलाहाबाद में एक भी सीट नहीं जीत पाई थी भाजपा
डॉ. मुरली मनोहर जोशी भले ही कानपुर से सांसद हों, लेकिन उनके घर इलाहाबाद में मतदान अब होगा। पिछले चुनाव में इलाहाबाद में एक भी सीट भाजपा को नहीं मिली थी।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य के जिले कौशांबी में भी तीन सीटों में सिर्फ एक सीट पर ही कमल खिल पाया था, जहां खुद मौर्य जीते थे। इन जिलों की सीटों पर कब्जा जमाने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो के साथ कई केंद्रीय मंत्री भी अलग-अलग हिस्सों में दौरा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फतेहपुर में सभा कर चुके हैं।
खुद के दमखम का चलेगा पता
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सूर्यप्रताप शाही कुशीनगर के पथरदेवा से खुद चुनाव लड़ रहे हैं। पिछले चुनाव में कुशीनगर की सात सीटों में से सिर्फ एक ही भाजपा को मिली थी। शाही खुद भी नहीं जीत पाए थे।
कुशीनगर की पड़रौना सीट से पिछली बार बसपा के टिकट पर जीते स्वामी प्रसाद मौर्य इस बार वहीं से भाजपा के उम्मीदवार हैं। मौर्य के पुत्र उत्कर्ष रायबरेली के ऊंचाहार से मैदान में हैं।
प्रदेश महामंत्री विद्यासागर सोनकर गाजीपुर की सैदपुर(सु) सीट और अनुपमा जायसवाल बहराइच से चुनाव लड़ रही हैं।
प्रदेश उपाध्यक्ष रामनरेश रावत बछरावां से चुनाव लड़ रहे हैं। इन सीटों के नतीजे बताएंगे कि पार्टी का नेतृत्व संभालने वालों में कितना दमखम है।