फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   now abhishek mishra will contest from lucknow

जानिए, मुलायम ने लखनऊ में क्यों बदला मोहरा

Fri, 28 Mar 2014 04:13 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/ अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 28 Mar 2014 04:13 PM IST
विज्ञापन
now abhishek mishra will contest from lucknow

अशोक वाजपेयी पिछले डेढ़ साल से जी-जान से जुटे थे लेकिन अचानक सपा ने उनका टिकट काटकर अभिषेक मिश्र को दे दिया।

विज्ञापन


वाजपेयी जहां पुराने समाजवादी हैं वहीं अभिषेक मिश्र नए-नए विधायक बने हैं। हो सकता है सपा ने लखनऊ संसदीय सीट पर सियासी रणनीति के तहत फेरबदल किया हो।

लेकिन गैर भाजपा दलों के ब्राह्मण प्रत्याशियों की मौजूदगी में राजनाथ सिंह की लड़ाई परोक्ष तौर पर आसान बनती नजर आ रही है।

ऐसे में भाजपा से तमाम नाराजगी के बावजूद ब्राह्मण मत किसी एक प्रत्याशी के साथ एकजुट नहीं हो पाएंगे।

ब्राह्मणों को पाले में करने की जुगत

now abhishek mishra will contest from lucknow

दरअसल साढ़े तीन लाख ब्राह्मण मतदाताओं की उपस्थिति के कारण लखनऊ सीट पर ब्राह्मण मत कई चुनावों से निर्णायक हो गया है, जो अटल बिहारी वाजपेयी के चुनाव लड़ने तक पूरी तौर से भाजपा के साथ था।

मैदान से उनके हटने के साथ ही इस बड़े वोट बैंक में दरारें नजर आने लगीं।

भाजपा का गढ़ बन चुकी लखनऊ सीट पर पिछले लोकसभा चुनाव में अटल के मानस पुत्र कहे जाने वाले लालजी टंडन से कांग्रेस प्रत्याशी रीता बहुगुणा जोशी 38000 मतों हारीं।

इस पराजय से निष्कर्ष निकाला गया कि ब्राह्मणों ने भाजपा की जगह सजातीय प्रत्याशी को भी कम महत्व नहीं दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

मुलायम ने अपनाई विधान सभा में यह 'रणनीति'

now abhishek mishra will contest from lucknow

लखनऊ के इस मिजाज को मुलायम सिंह ने भी भांपा और विधानसभा चुनाव में दो सीटों पर ब्राह्मण प्रत्याशियों को उतारा।

दोनों अभिषेक मिश्र व शारदा प्रताप शुक्ला जीते भी।

लखनऊ सीट के इस जातीय चरित्र को समझते हुए लोकसभा चुनाव के लिए सपा ने अशोक वाजपेयी व बसपा ने नकुल दुबे के नाम की घोषणा काफी पहले कर दी थी।

रीता बहुगुणा पिछले चुनाव की रनर थी, सो कांग्रेस से उनका तो क्लेम बनता ही था।

विज्ञापन

मुस्लिमों और ब्राह्मणों के गठजोड़ का दिखेगा दम

now abhishek mishra will contest from lucknow

अटल की विरासत का वाहक बनने की चाहत के तहत राजनाथ सिंह ने लखनऊ से ही चुनाव लड़ने का फैसला किया।

पर टिकट वितरण के साथ कुछ ऐसा हुआ कि ब्राह्मणों के एक तबके में उनके प्रति नाराजगी का भाव मुखर होने लगा।

स्थिति यह उभर रही थी कि गैर भाजपा दलों का जो प्रत्याशी ब्राह्मणों में ज्यादा घुसपैठ करता दिखेगा, मुस्लिम वोट भी उसी ओर मुड़ेगा।

ऐसे में करीब साढ़े चार लाख मुस्लिम मतों और ब्राह्मणों का गठजोड़ कोई भी गुल खिला सकता था।

ये था वाजपेयी को हटाने का असल कारण

now abhishek mishra will contest from lucknow

बसपा के नकुल दुबे के पास सजातीय वोटों के साथ दलित वोटों का साथ है तो रीता बहुगुणा औरों की तुलना में मुसलमानों के ज्यादा करीब हैं।

इस कारण ब्राह्मणों का ज्यादा झुकाव रीता की तरफ हो सकता था। लगभग एक साल से राजधानी की धूल फांक रहे अशोक वाजपेयी प्रचार को रफ्तार नहीं पकड़ा पा रहे थे।

ऐसी स्थिति में मुसलमान टैक्टिकल वोटिंग की राह अपनाता और जो सबसे अधिक मजबूत ब्राह्मण प्रत्याशी दिखता उसकी तरफ मुड़ता।

सपा नेतृत्व ने इसी मनोविज्ञान को समझते हुए अपेक्षाकृत अधिक प्रभावी ब्राह्मण प्रत्याशी के तौर पर अभिषेक मिश्र को उतारा है।

कौन हैं अभिषेक मिश्रा

now abhishek mishra will contest from lucknow

अभिषेक ब्राहमणों के अलावा पढ़े-लिखों की नई पीढ़ी में अशोक बाजपेयी से ज्यादा स्वीकार्य हैं।

इसके अलावा वह लखनऊ के ही रहने वाले हैं। इनके आईएएस पिता जय शंकर मिश्रा लखनऊ में काफी समय तक तैनात रहे हैं।

अभिषेक का जनसंपर्क भी ठीक है, और शहर की कई विकास योजनाओं के पत्थरों में उनका नाम भी दर्ज है। इसलिए अशोक से ज्यादा प्रभावी साबित हो सकते हैं।

अभिषेक बोले, पूरी ताकत से लड़ूंगा

now abhishek mishra will contest from lucknow

पार्टी नेतृत्व का फैसला शिरोधार्य है। पूरी ताकत से लड़ेंगे। पूरी उम्मीद है, कामयाबी मिलेगी।

लखनऊ सांप्रदायिक मिजाज वाले किसी शख्स के सिर जीत का सेहरा नहीं बांधेगा।

चुनाव में मैं लखनऊ के ऐतिहासिक विकास का एजेंडा लेकर जाऊंगा। कोशिश करूंगा कि लखनऊ से अगला चुनाव लड़ने वाले अपना नामांकन दाखिल करने मेट्रो ट्रेन से जाएं।

शहर को एक उम्दा आईटी सिटी के तौर पर विकसित किया जाएगा।

विकास का स्वरूप कुछ ऐसा होगा कि आने वाले दिनों में लखनऊ के किसी युवक को नौकरी के लिए बंगलूरू, पुणे या गुड़गांव न जाना पड़े।

क्या कहना है वाजपेयी का

now abhishek mishra will contest from lucknow

पिछले 16 महीने से लखनऊ की गली-गली खाक छान रहा था। संतोष इस बात का है कि कार्यकर्ताओं और लखनऊ की जनता का भरपूर सहयोग व स्नेह मिला। मैं आज भी प्रचार में निकला था।

दोपहर करीब दो बजे खाना खाने घर आया था, तभी एक न्यूज चैनल से पता चला कि मेरा टिकट कट गया। अवाक् रह गया।

दुख इस बात का है कि नेतृत्व ने मुझसे बात किए बिना ऐसा फैसला किया।

मैं पार्टी का पुराना निष्ठावान सिपाही हूं, बुलाकर बात कर ली होती तो पार्टी के निर्णय की अवहेलना तो न करता।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed