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UP: रोडवेज में अब 75 फीसदी अनुबंधित बसें, प्रमुख सचिव ने जारी किया पत्र, पलट दिया यह नियम

Wed, 09 Nov 2022 08:56 AM IST
शाहरुख खान अमित मुद्गल, अमर उजाला, लखनऊ
अमित मुद्गल, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 09 Nov 2022 08:56 AM IST
सार

उत्तर प्रदेश में वर्तमान में रोडवेज में 75 प्रतिशत बसें उसकी खुद की है। 25 प्रतिशत बसें अनुबंध पर चलाई जा रही हैं। शासन ने अब इस नियम को पलटने का निर्णय किया है। 

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Now 75 percent buses will run on contract in roadways Principal Secretary Venkateshwar Lu issued a letter
उत्तर प्रदेश परिवहन - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम में अब अनुबंधन पर 75 प्रतिशत बसें चलेंगी। इस संबंध में परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव एल वेकटेश्वर लू ने निगम के प्रबंध निदेशक को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि 75 फीसदी बसें अनुबंधित और 25 फीसदी बसें निगम की यथाशीघ्र संचालित कराई जाएं।
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वर्तमान में रोडवेज में 75 प्रतिशत बसें उसकी खुद की है। 25 प्रतिशत बसें अनुबंध पर चलाई जा रही हैं। शासन ने अब इस नियम को पलटने का निर्णय किया है। इसके अलावा विभाग प्रमुख सचिव ने पत्र जारी कर बसों में साफ-सफाई रखने, चालक-परिचालक को यूनिफार्म में ड्यूटी करने व मधुर व्यवहार रखने, बस स्टेशनों में तमाम जरूरी सुविधाएं देने और निष्प्रयोज्य बसों को बेड़े से हटाने के लिए कहा है। 
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पत्र में ग्रामीण व दुर्गम क्षेत्रों के लिए उपयुक्त यात्रा सुविधा प्रदान करने को भी कहा गया है। गौरतलब है कि रोडवेज के बेड़े में कुल 11485 बसें हैं। इसके जरिए रोजाना 123.35 करोड़ यात्री 43.29 करोड़ किलोमीटर सफर करते हैं। इससे रोडवेज को सालाना 4473 करोड़ रुपये से अधिक की आय होती है।
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कर्मचारी परिषद ने कहा, इससे रोजी-रोटी पर खड़ा होगा संकट
रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री गिरीश चंद्र मिश्र का कहना है कि 75 फीसदी बसें अनुबंध पर चलाए जाने से रोडवेज के 55 हजार कर्मचारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। इतने बड़े निर्णय से पहले कर्मचारियों के पक्ष को भी सुना जाना चाहिए था और विषय विशेषज्ञों से अध्ययन भी कराना चाहिए था। उन्होंने कहा कि यह रोडवेज के निजीकरण की तैयारी है।

रोडवेज को और मजबूत करने की है तैयारी : दयाशंकर

हम डग्गामार बसों को अनुबंधित करने को कह रहे हैं। क्योंकि कोरोना के कारण पिछले दो साल बसें नहीं खरीद सके और अब भी इतनी बसें नहीं खरीद सकते, जितनी आवश्यकता है। छह हजार बसें तो पुराना कोटा पूरा करने के लिए चाहिए। रोडवेज कर्मचारियों का कोई नुकसान नहीं होने देंगे बल्कि नई नियुक्तियां करेंगे। रोडवेज में 900 सिपाहियों की भर्ती का प्रस्ताव भी चयन आयोग को भेजा है। यह रोडवेज के निजीकरण की नहीं बल्कि और मजबूत करने की तैयारी है। -दयाशंकर सिंह, परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
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