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बीबीएयू में समस्याओं को लेकर केंद्र व यूजीसी को नोटिस, सितंबर में होगी अगली सुनवाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 21 Aug 2018 03:46 PM IST
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हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने भीम राव अंबेडकर विश्वविद्यालय में व्याप्त समस्याओं का मुद्दा उठाते हुए दायर जनहित याचिका पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को नोटिस जारी किया है।
साथ ही केंद्र सरकार को पक्ष पेश करने के लिए कहा है। न्यायमूर्ति विक्रमनाथ व न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन ने आदेश हरिहर प्रसाद दीक्षित की जनहित याचिका पर दिए। इसमें याची ने इस केंद्रीय विश्वविद्यालय में गंभीर अनियमितताएं होने संबंधी यूजीसी विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पेश की है।
उसने विवि में ऐसे हालात के संबंध में कार्रवाई किए जाने की गुजारिश की थी। कोर्ट ने रिपोर्ट देखने के बाद मामले से याची को अलग करते हुए प्रकरण का स्वत: संज्ञान ले लिया था।
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अदालत ने अपने आदेश में उस रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि यह विश्वविद्यालय पूरी तरह नष्ट होने व ढहने के कगार पर है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार व वित्त अधिकारी किसी में आपस में तालमेल नहीं है। इनके बीच संबंध चौंकाने वाले हैं। यह भी कहा गया कि ये तीनों किसी सरकारी मसले पर भी आपस में बैठकर चर्चा नहीं कर सकते हैं और इनके बीच एक-दूसरे पर आरोप लगाए जाते रहते हैं।
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साथ ही केंद्र सरकार को पक्ष पेश करने के लिए कहा है। न्यायमूर्ति विक्रमनाथ व न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन ने आदेश हरिहर प्रसाद दीक्षित की जनहित याचिका पर दिए। इसमें याची ने इस केंद्रीय विश्वविद्यालय में गंभीर अनियमितताएं होने संबंधी यूजीसी विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पेश की है।
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उसने विवि में ऐसे हालात के संबंध में कार्रवाई किए जाने की गुजारिश की थी। कोर्ट ने रिपोर्ट देखने के बाद मामले से याची को अलग करते हुए प्रकरण का स्वत: संज्ञान ले लिया था।
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अदालत ने अपने आदेश में उस रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि यह विश्वविद्यालय पूरी तरह नष्ट होने व ढहने के कगार पर है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार व वित्त अधिकारी किसी में आपस में तालमेल नहीं है। इनके बीच संबंध चौंकाने वाले हैं। यह भी कहा गया कि ये तीनों किसी सरकारी मसले पर भी आपस में बैठकर चर्चा नहीं कर सकते हैं और इनके बीच एक-दूसरे पर आरोप लगाए जाते रहते हैं।
केंद्र के वकील को पक्ष रखने को कहा
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- फोटो : amar ujala
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि चाहे वह हॉस्टल हो या अन्य सुविधाएं, इन्हें घटिया व अस्वीकार्य परिस्थितियों में चलाया जा रहा है। इन तीनों के आपसी संबंधों की वजह के विश्वविद्यालय में प्रशासनिक गतिविधियां पंगु हो गई हैं।
अदालत ने कहा कि रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इतनी गंभीर अनियमितताएं एक केंद्रीय विश्वविद्यालय में नहीं होनी चाहिए। वह भी ऐसे विश्वविद्यालय में जिसकी स्थापना डॉ. बीआर आंबेडकर के ऊंचे लक्ष्यों व आदर्शों को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई 10 सितम्बर की तिथि को तय करते हुए इस बीच केंद्र के वकील को रिपोर्ट के संबंध में पक्ष रखने को कहा है।
अदालत ने कहा कि रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इतनी गंभीर अनियमितताएं एक केंद्रीय विश्वविद्यालय में नहीं होनी चाहिए। वह भी ऐसे विश्वविद्यालय में जिसकी स्थापना डॉ. बीआर आंबेडकर के ऊंचे लक्ष्यों व आदर्शों को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई 10 सितम्बर की तिथि को तय करते हुए इस बीच केंद्र के वकील को रिपोर्ट के संबंध में पक्ष रखने को कहा है।