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संयुक्त चिकित्सालय का हाल: पांच महिला डॉक्टर, महीने में पांच डिलीवरी भी नहीं हो रहीं

Sun, 22 May 2022 03:34 PM IST
ishwar ashish माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sun, 22 May 2022 03:34 PM IST
सार

अस्पताल में संस्थागत प्रसव कराने का रिकॉर्ड बेहद खराब है। आरोप है कि महिला विशेषज्ञ के रात में मौजूद न होने पर उन्हें ऑन काल पर बुलाया जाता है। इस दौरान अस्पताल में आने वाली गर्भवतियों को डॉक्टर न होने का हवाला देकर लौटाया जा रहा है।

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Not even five delivery are done in Thakurganj sanyukta chikitsalaya.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय में पांच महिला विशेषज्ञ होने के बावजूद यहां आने वाली गर्भवतियों को रेफर किया जा रहा है। इसे लेकर तीमारदारों ने शिकायत भी दर्ज कराई है। स्थिति यह है कि यहां माहभर में पांच डिलीवरी भी नहीं हो रही हैं। यही वजह है कि यहां प्रसव का प्रतिशत हर माह तीन से चार रहता है। यह रिकॉर्ड अन्य अस्पतालों के मुकाबले बेहद कम है।

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टीबी संयुक्त चिकित्सालय 150 बेड का अस्पताल है। अस्पताल में संस्थागत प्रसव कराने का रिकॉर्ड बेहद खराब है। आरोप है कि महिला विशेषज्ञ के रात में मौजूद न होने पर उन्हें ऑन काल पर बुलाया जाता है। इस दौरान अस्पताल में आने वाली गर्भवतियों को डॉक्टर न होने का हवाला देकर लौटाया जा रहा है। सीएमएस डॉ. आनंद बोध ने बताया कि सिजेरियन माह में तीन से चार हो रहे हैं। महिला विशेषज्ञों को संस्थागत प्रसव बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
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महिला अस्पतालों पर बढ़ रहा बोझ
डफरिन, झलकारीबाई व क्वीन मेरी अस्पतालों में गर्भवतियों के ऑपरेशन व नॉर्मल डिलीवरी के लिए बड़ा बोझ है। यहां कभी-कभी बेड का संकट हो जाता है। इन अस्पताल के प्रभारियों का कहना है कि जिले के संयुक्त चिकित्सालय रात में प्रसव नहीं कराते हैं। सिजेरियन केस होने पर उसे तुरंत महिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। यही हाल सीएचसी व बीएमसी अस्पतालों का भी है। वहां से भी हर रोज रात के वक्त सिजेरियन केस महिला अस्पतालों में रेफर किए जा रहे हैं, जबकि यह ऑपरेशन संयुक्त चिकित्सालय व नगरीय-ग्रामीण सीएचसी स्तर पर भी हो सकते हैं। एक अनुमान के मुताबिक, रात के वक्त करीब पूरे जिले से करीब तीन से चार केस रेफर होकर आते हैं।

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