हवा में कम घुला जहर पर शोर बेशुमार
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पिछले वर्ष के तुलना में इस बार दीपावली पर वायुमंडल में हानिकारक तत्वों में 7.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
तो शहर के कई इलाकों में पिछले कुछ दिनों के मुकाबले त्यौहार वाली रात 40 से 10 फीसदी अधिक कानफोड़ू शोर दर्ज किया गया।
यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के आंकड़ों में ये सच सामने आए हैं। वैसे वायु प्रदूषण में गिरावट को लेकर वैज्ञानिकों ने संतोष जताया है।
उनका कहना है कि भले ही यह अंतर बड़ा नहीं है, लेकिन वायु प्रदूषण में मिले इस सुधार को भविष्य में बेहतर सुधार के संकेत के तौर पर देखा जाना चाहिए।
रिहायशी इलाकों में दिखा सुधार
यूपीपीसीबी की केंद्रीय लैब ने सोमवार को दीपावली के बाद वायु प्रदूषण के आंकड़ों की रिपोर्ट जारी की।
रिपोर्ट के मुताबिक, पटाखों की वजह से होने वाले प्रदूषण में कमी आई है।
इसमें सांस के रास्ते शरीर में चले जाने वाले सूक्ष्म कण (पार्टिक्यूलेट मैटर, पीएम-10) के साथ सल्फर डाई ऑक्साइड (एसओटू) और नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड (एनओटू) में काफी गिरावट आई है।
आंकड़ों के मुताबिक, पीएम-10 में जहां रिहाइशी इलाके में 4.8 प्रतिशत की कमी मिली है। वहीं एनओटू में 7.7 प्रतिशत की कमी दिखी। कॉमर्शियल क्षेत्र में भी पीएम-10 में 3.2 प्रतिशत की गिरावट हुई।
वहीं एनओटू में यह कमी 5.8 प्रतिशत की रही। एसओटू में रिहाइशी और जगह क्रमश: 7.3 प्रतिशत और 2.6 प्रतिशत की कमी देखी गई है।
यूपीपीसीबी के वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. अशोक वर्मा का कहना है कि वायु प्रदूषण में कमी आकाश में दगाने जाने वाले पटाखों के ज्यादा इस्तेमाल से भी हो सकता है।
अनार या दूसरे ऐसे पटाखों से सूक्ष्मकण और प्रदूषण फैलाने वाले हानिकारक तत्व जमीन के पास वाले वायुमंडल में रह जाते हैं, जो अधिक वायु प्रदूषण पैदा करते हैं।
वहीं रात 12 बजे के बाद हवा के बहने से भी परिणाम अच्छे देखने को मिले।