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बड़ा खुलासा: इंजीनियर ही नहीं था सरकारी दामाद!

Tue, 02 Dec 2014 05:29 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 02 Dec 2014 05:29 PM IST
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Noida chief engineer yadav singh was no engineer for most of career.

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे डेवलपमेंट अथॉरिटी का चार्ज संभाल रहा चीफ इंजीनियर यादव सिंह वाकई में यूपी का सरकारी दामाद था। इसकी तस्दीक अब तक के सबसे बड़े खुलासे ने कर दी है।

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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, कुछ दिन पहले तक तीनों मालदार अथॉरिटीज का चार्ज संभाल रहे यादव सिंह के पास कॅरियर के लंबे समय तक एक अदद डिग्री तक नहीं थी।
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यादव ने 1980 में जूनियर इंजीनियर के तौर पर नोएडा अथॉरिटी ज्वॉइन की। 1985 में उसे असिस्टेंट प्रोजेक्ट इंजीनियर के पद पर प्रमोट कर दिया गया। 1995 में एक और प्रमोशन हुआ और यादव प्रोजेक्ट इंजीनियर बन गया। हालांकि, दिचलस्प बात यह है कि इस पूरे 15 साल के कॅरियर में यादव के पास इंजीनियरिंग की डिग्री ही नहीं थी।

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ताक पर रख दिए सारे नियम

Noida chief engineer yadav singh was no engineer for most of career.

1995 में जब यादव को प्रोजेक्ट इंजीनियर बनाया गया, तो उससे तीन साल में डिग्री देने का ‌आदेश भी दिया गया। यादव ने डिग्री पेश कर दी, लेकिन इस प्रमोशन ने कई लोगों को खफा भी कर दिया।

लोगों की नाराजगी दो वजहों से थी। पहली, यादव सिंह के पास डिग्री नहीं थी और दूसरी वजह कि यादव के पहले 20 अन्य असिस्टेंट प्रोजेक्ट इंजीनियर प्रमोशन का इंतजार कर रहे थे।

नो‌एडा अथॉरिटी की भर्ती व पदोन्नति नियमावली के मुताबिक, एक जूनियर इंजीनियर को असिस्टेंट प्रोजेक्ट इंजीनियर के पद पर तभी प्रमोट किया जा सकता है जब उसके पास जूनियर इंजीनियर की पोस्ट पर 15 साल का अनुभव हो।

इसी तरह, एक अधिकारी प्रोजेक्ट इंजीनियर तभी बनता है, जब उसके पास इंजीनियरिंग की डिग्री हो। लेकिन, नोएडा अथॉरिटी में यादव के लिए सभी नियम ताक पर रख दिए गए।

सपा सरकार ने किया सस्पेंड फिर ये प्यार...

Noida chief engineer yadav singh was no engineer for most of career.

इसके बाद, यादव के दिन सुनहरे हो गए। मूल रूप से जाटव, यादव की चांदी मायावती राज में सबसे ज्यादा रही। 2002 में उसे चीफ मेंटेनेंस इंजीनियर बनाया गया और फिर 2011 में यादव को फिर नोएडा अथॉरिटी में इंजीनियर-इन-चीफ की जिम्मेदारी दे दी गई।

2012 में सपा सरकार के आते ही यादव को भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर सस्पेंड कर दिया गया। यादव को 954 करोड़ रुपये के एक घोटाले में शामिल बताया गया, लेकिन 2013 में न जाने किस वजह से यादव का सस्पेंशन खत्म हो गया।

नवंबर, 2014 में यादव पर सपा सरकार फिर मेहरबान हुई। अब यादव को यूपी की सबसे बड़ी और मालदार मानी जाने वाली नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे अथॉरिटी का चार्ज दे दिया गया।

इस पूरे मामले की जांच कर रही इनकम टैक्स की टीम सोमवार को सिर्फ एक लॉकर खोल सकी। हालांकि, जांच से जुड़े अधिकारियों की नजर एक अकाउंटेंट पर भी है जिसका नाम यादव के घर से मिली डायरी में पाया गया है।

बताया जा रहा है कि यादव की इस डायरी में यूपी के कई आला अफसरों वे नेताओं के नाम हो सकते हैं। इसके चलते, यादव की जान को भी खतरा बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, यही वजह है कि पूरे मामले की जांच की वीडियो रिकॉर्डिंग की जा रही है।

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