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दूध के काले कारोबार पर ढीला कानूनी शिकंजा
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 01 Feb 2014 09:38 AM IST
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दूध का काला कारोबार कर लोगों के स्वास्थ्य को खतरे में डालने वाले धंधेबाज बेखौफ हैं। कानून के ढीले शिकंजे के कारण ही वह मिलावटी दूध से मोटी कमाई कर रहे हैं।
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इसकी जांच के लिए जिम्मेदार विभाग ज्यादातर मामलों में सबसे हल्की धारा में कार्रवाई कर चुप्पी साध लेता है।
जिन मामलों में पीएफए एक्ट के तहत मामला दर्ज भी होता है उनमें कमजोर पैरवी के चलते सिर्फ चंद हजार का जुर्माना देकर मिलावटखोर बच निकलते हैं।
इसी को गंभीरता से लेते हुए देश की सर्वोच्च अदालत ने अब दूध में मिलावटखोरी करने वालों पर लगाम कसने के लिए उम्रकैद की सजा का प्रावधान करने की बात कही है।
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एफएसडीए से जुड़े सूत्र बताते हैं कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हुई कार्रवाई के तहत दूध में मिलावट जांचने के लिए 1250 नमूनों की सैंपलिंग की गई।
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जिले में बीते दो साल में दूध में गड़बड़ी व मिलावटखोरी की रोकथाम के तहत जिला इकाई स्तर पर हुई कार्रवाई में चालीस नमूनों को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया।
जांच में इनमें से सिर्फ नौ नमूने अधोमानक पाए गए। हालांकि किसी भी नमूने में कृत्रिम तौर पर यूरिया, डिटरजेंट अथवा अन्य खतरनाक तत्व युक्त सिंथेटिक दूध का कोई मामला सामने नहीं आया।
निगेटिव नमूनों के आधार पर एफएसडीए की तरफ से एसीजीएम व एडीएम कोर्ट में दर्ज कराए गए वादों में से अब तक पांच का ही अंतिम तौर पर निपटारा हो पाया है।
इनमें घटिया दूध बेचने के आरोपियों पर 85 हजार का जुर्माना ठोकते हुए कोर्ट ने रजौली गांव के राम विलास यादव व काकोरी के नंद कुमार को छह-छह माह की जेल की सजा भी सुनाई।
अलग सजा के प्रावधान पर एक्ट खामोशमिलावटी दूध बेचने वालों के खिलाफ अलग से सजा के प्रावधान पर एफएसडीए एक्ट 2006 पूरी तरह खामोश है।
एक्ट में सिर्फ सिर्फ अनसेफ श्रेणी में आने वाले खाद्य नमूनों पर दंड का उल्लेख है। एफएसडीए प्रशासन से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि एक्ट में सिर्फ अनसेफ श्रेणी में पाए जाने वाले खाद्य नमूनों पर ही कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।
अधोमानक व सबस्टैंडर्ड नमूनों के आरोपियों पर सिर्फ एडीएम कोर्ट स्तर से जुर्माने की व्यवस्था है। अनसेफ श्रेणी में उम्रकैद तक की सजा ऐसे अनसेफ नमूने जिनसे शारीरिक क्षति नहीं होती छह माह की जेल अथवा एक लाख जुर्माना।
शारीरिक क्षति के आरोप पर एक साल की जेल अथवा तीन लाख जुर्माना, शारीरिक स्तर पर घातक नमूने के आरोपी पर छह साल की जेल अथवा पांच लाख जुर्माना और जनहानि होने पर दस लाख का जुर्माना अथवा आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।
सजा का यह प्रावधान अनसेफ फूड श्रेणी के तहत है। एफएसडीए अधिकारी मिलावटी दूध को इसी श्रेणी में मानते हुए प्रदेश में आरोपियों पर कार्रवाई तय कराते हैं।
इतना ही नहीं एफएसडीए के नामित अधिकारी (डीओ) अपनी कमजोर वैधानिक स्थिति के कारण कोर्ट के झमेले से बचने के लिए एक्ट की सबसे हल्की धारा में ही दूध में मिलावट के वाद दर्ज कराकर धंधेबाजों को परोक्ष तौर पर बचाने का काम ही करते हैं।
मुनाफा कमाने के लिए जानलेवा मिलावट
धंधेबाज चंद मुनाफा कमाने के लिए दूध में जानलेवा स्तर तक की मिलावट करने से नहीं चूकते। इसके लिए कार्बोनेट (खाने का सोडा), फार्मलीन, यूरिया, डिर्टजेंट पाउडर, घटिया मिल्क पाउडर, हैंडपंप और तालाब का पानी मिलाकर दूध की मात्रा बढ़ाई जाती है।
एक्ट के प्रावधानों के तहत ही कार्रवाई
सिटी मजिस्ट्रेट व नोडल प्रभारी एफएसडीए पीपी पाल कहते हैं कि दूध में मिलावट करने वालों के खिलाफ प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट के आधार पर एफएसडीए एक्ट 2006 के तहत ही कार्रवाई होती है।
इसी के आधार पर ही एसीजीएम व एडीएम कोर्ट में दर्ज वादों में नामित अधिकारी को सजा दिलाने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। मिलावटखोरी की रोकथाम के लिए जिले में जल्द ही व्यापक स्तर पर खाद्य नमूनों की सैंपलिंग का कार्य नियमित तौर पर शुरू होगा।