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Lucknow News: नहीं जले चूल्हे, हर तरफ बस सिसकियां

Sun, 09 Jul 2023 11:56 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Updated Sun, 09 Jul 2023 11:56 PM IST
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No stoves lit, only sobs everywhere
रायबरेली। मंगतन का डेरा गांव के रहने वाले पांच बच्चों की पानी में डूबने से हुई मौत की घटना ने न सिर्फ को सभी को झकझोर दिया, बल्कि कभी न भूलने वाला जख्म दे दिया है। बच्चों की मौत के बाद गांव के 35 घरों के चूल्हे ठंडे पड़े रहे। उनकी जुबां पर यही शब्द थे कि यह सब कैसे हो गया। उनकी गांव पर किसी नजर लग गई।
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इस गांव के लोगों की तकदीर आज तक नहीं बदली है। कहने के लिए गांव के लोगों को पक्के आवास तो मिल गए, लेकिन रहन-सहन में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ। मेहनत मजदूरी से ही गांव के लोगों का परिवार चलता है। यहां के कई लोग ऐसे हैं, जो भीख मंगाने के साथ ही पशुओं की खरीद-फरोख्त का काम करते हैं। कई पेट पालने के लिए कई शहरों में रहते हैं। पांच बच्चों की घटना से हर कोई हैरत में है और अपने आंंसुओं को नहीं रोक पा रहा है। उनकी जुबां से यही शब्द निकल रहे हैं कि यह जो गम मिला है, वह शायद ही कभी भूल पाएंगे।
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गांव निवासी सोनू काम के सिलसिले में कानपुर मेंं थे। उनकी सिर्फ 10 वर्षीय सोनम और आठ वर्षीय बेटा अमित था, जिसकी पानी में डूबने से मौत हो गई। बेटा-बेटी की मौत से सोनू के घर की खुशियां छिन गईं। घटना की जानकारी होने पर सोनू कानपुर से गांव पहुंचा और बच्चों के शवों पर लिपटकर रो पड़ा। बोला अब बुढ़ापे का सहारा कौन बनेगा। एक बेटी और एक बेटा था, जिसे भगवान ने छीन लिया। पता नहीं हमने क्या खता थी, जो इतनी बड़ी सजा भगवान ने दी।
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गांव निवासी दीपू की आठ वर्षीय बेटी जीतू की भी तालाब में डूबने से जान चली गई। बिलख रहे दीपू ने बताया कि वह दीनशाहगौरा बाजार गए थे। जैसे ही घटना की सूचना मिली तो वह भागता हुआ गांव पहुंचा। गांव पहुंचा तो बड़ी देर हो चुकी थी और उसकी लाडली बिटिया उससे दूर जा चुकी थी। बिटिया इतनी जल्दी साथ छोड़ देगी, यह उसने कभी सोचा नहीं था।

जिस गांव के बाहर हर दिन बच्चे हंसी ठिठौली और आपस में खेलते थे, उसी स्थान पर रविवार को दफन हो गए। अंतिम संस्कार का पल भावुुक कर देना वाला था। वहां पर मौजूद सभी की आंखों से आंसू टपक रहे थे और वह अपना गम बयां नहीं कर पा रहे थे। गड्ढा खोदने वाले लोगों के हाथ कांप रहे थे और एक दूसरे को देखकर रो पड़ते। उनकी आंखों ने ऐसा मंजर शायद कभी नहीं देखा था, जो उनके सामने दिख रहा था। एक साथ पांच बच्चों के शव दफनाए गए।
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