17 लाख छात्रों की छात्रवृत्ति रुकी, सो रहे अफसर!
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सूबे में 17 लाख विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति और शुल्क की भरपाई की रकम फंस गई है। इस रकम को जारी करवाने के लिए मुख्यमंत्री की अनुमति जरूरी है, मगर अभी तक फाइल सीएम दफ्तर पहुंचने की नौबत ही नहीं आई है। संबंधित फाइल शासन के वित्त विभाग में कहीं अटकी हुई है। इससे छात्र परेशान हैं और अफसर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत वर्ष 2014-15 में 33.88 लाख छात्र पात्र थे। नियमानुसार इन सभी को 31 मार्च तक भुगतान हो जाना चाहिए। लेकिन, खाता संबंधी गड़बड़ियों के चलते 17 लाख विद्यार्थियों के खाते में धनराशि नहीं भेजी जा सकी।
पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम यानी पीएफएमएस सॉफ्टवेयर से बैंकों के सर्वर पर उपलब्ध जानकारी और ऑनलाइन आवेदन फॉर्म में दर्ज जानकारी का मिलान कराया गया तो पता चला कि बड़ी तादाद में अकाउंट नंबर ही गलत भरे गए हैं।
शुरुआत का पहला डिजिट ही छोड़ दिया गया है। यही नहीं बैंक के आईएफएस कोड के स्थान पर चेक पर दर्ज किए जाने वाले एमआईसीआर (मैग्नेटिक इंक करेक्टर रिकग्निशन) कोड दे दिया है।
इसलिए वापस कर दी गई धनराशि
पिछले वित्त वर्ष के आखिरी दो दिनों में यह खामियां पता चलने पर संबंधित विभागों में खलबली मच गई, लेकिन समय इतना कम था कि गलतियों को सुधारना मुमकिन नहीं रहा। इसलिए बची हुई धनराशि वापस करनी पड़ गई।
नए वित्तीय वर्ष में यह धनराशि तभी जारी हो सकती है, जब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अनुमति दें। इस बाबत करीब 15 दिन पहले प्रस्ताव बनाकर शासन के वित्त विभाग को भेज दिया गया। वित्त विभाग की राय मिलने के बाद संबंधित फाइल मुख्यमंत्री के सामने रखी जानी है।
सूत्रों के मुताबिक, अभी तक यह फाइल वित्त विभाग में ही कहीं पड़ी है। उधर, परेशान विद्यार्थी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, मगर उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा।
सिर्फ स्कीम के नाम पर विचार करेगा सॉफ्टवेयर
छात्रवृत्ति और शुल्क की भरपाई की रकम अलग-अलग ‘पांच हेड’ से वितरित की जाती है। पिछले वित्तीय वर्ष में एक हेड के लिए स्वीकृत धनराशि बचने पर इसे दूसरे हेड में भेजने से पीएफएमएस सॉफ्टवेयर ने इन्कार कर दिया था।
अब इसके लिए नई व्यवस्था की गई है, जिसके तहत पीएफएमएस सॉफ्टवेयर सिर्फ स्कीम के नाम का मिलान होने पर ही धनराशि हस्तांतरित करने की अनुमति देगा।
मामले पर समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव सुनील कुमार का कहना है कि संबंधित फाइल शासन के वित्त विभाग में गई हुई है।
वित्त विभाग की राय के बाद मुख्यमंत्री की औपचारिक अनुमति की आवश्यकता होगी। इस महीने के अंत तक विद्यार्थियों के खातों में धनराशि पहुंचने की संभावना है।