बिजली के लिए उपभोक्ताओं के साथ हो रहा 'खेल'
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उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने पावर कॉर्पोरेशन पर उपभोक्ताओं के साथ दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया है। कहा, विद्युत नियामक आयोग के निर्णयों को लागू करने में भी ‘खेल’ हो रहा है।
जब उपभोक्ताओं को फायदा देने वाले फैसले होते हैं तो उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। लेकिन जब उपभोक्ताओं पर भार डालने वाले निर्णय होते हैं तो उन्हें तत्काल लागू करवा दिया जाता है।
उपभोक्ता परिषद के जनहित प्रत्यावेदन पर नियामक आयोग मीटर के मूल्यों में कमी होने की वजह से नए कनेक्शन की दरों को कमी करने फैसला ले चुका है। लेकिन आज भी सूबे में कई स्थानों पर पुरानी दरों पर मीटर लगाए जा रहे हैं।
इसी तरह एमडी पेनाल्टी व अतिरिक्त फिक्स चार्ज गलत तरीके से वसूले जाने के मामले में आयोग के सुनाए फैसले का लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिल सका है।
उपभोक्ताओं की मदद करने वाले कानून भी बेकार
इतना ही नहीं महीनों बीत जाने के बाद भी लगभग 35 लाख झुग्गी-झोपड़ी व पटरी दुकानदारों के लिए नए कनेक्शन में बदलाव की अधिसूचना जारी नहीं हो सकी है। यह फाइल आज भी ऊर्जा विभाग में पड़ी है। घरेलू उपभोक्ताओं के विद्युत भार बढ़ाने वाले नए कानून, जिसमें उन्हें राहत देने के लिए यह व्यवस्था है कि जब तक तीन महीने लगातार उपभोक्ता का भार बढ़कर न आए उसे नहीं बढ़ाया जा सकता। लेकिन इसका भी पालन नहीं किया जा रहा है।
परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि परिषद अब नियामक आयोग में इसके लिए अवमानना वाद दाखिल करेगा। साथ ही दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की जाएगी।
सूबे में पहली बार ऊर्जा क्षेत्र में गरीब-अमीर सभी को बिजली कनेक्शन लेने का अधिकार मिले, इसके लिए नियमों में शिथिलता प्रदान की गई है। इसके तहत पैन कार्ड, राशन कार्ड, राष्ट्रीयकृत बैंक के खाता, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता पहचान पत्र के आधार पर कनेक्शन लिया जा सकता है। लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद इसकी अधिसूचना जारी नहीं हो सकी है।