वाणिज्य कर विभाग में 15,495 करोड़ रुपये का हिसाब-किताब लापता
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाणिज्य कर विभाग में राजस्व वसूली को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। ऑनलाइन राजस्व वसूली नोटिस जारी करने की प्रणाली ‘व्यास पोर्टल’ और मैनुअल लेखा-जोखा रखने वाले रजिस्टर ‘आर-27’ में 15,495 करोड़ रुपये का अंतर आने के बाद विभाग में हड़कंप वाले हालात हैं।
प्रदेश के 75 जिलों में से 20 बड़े जिलों में आरसी जारी कर वसूली की कार्यवाही वाणिज्य कर विभाग अपने स्तर पर करता है। बाकी 55 जिलों में डीएम के निर्देशन में राजस्व विभाग द्वारा वसूली कराई जाती है।
सूत्रों ने बताया कि वाणिज्य कर आयुक्त ने मासिक प्रगति रिपोर्ट (एमपीआर) की पड़ताल कराई तो पता चला कि प्रत्येक जोन में माह के अंत में वसूली योग्य बकाया व माह के प्रारंभ में कुल बकाया की राशि में काफी अंतर है। उन्होंने मुख्यालय स्तर से वरिष्ठ अधिकारियों की टीम भेजकर विभागीय वसूली वाले 20 जिलों में बकाया वसूली से जुड़े अभिलेखों की पड़ताल कराई। इसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
पता चला कि विभाग में जमकर मनमानी चल रही है। वसूली अधिकारी सरकारी व्यवस्था को ताक पर रखकर अपना सिस्टम चला रहे हैं और ऊपर के अधिकारी आंखें मूंदे हुए हैं। तमाम स्थानों पर आरसी, वसूली, बकाया का सही लेखा-जोखा तक नहीं रखा जा रहा।
आरसी जारी करने वाले व्यास पोर्टल व मैनुअल लेखा रिकॉर्ड करने वाले रजिस्टर आर-27 में 2,26,710 वसूली प्रमाणपत्रों का अंतर है। इसमें 15,495.82 करोड़ रुपये की रकम शामिल है। इसके बाद वाणिज्य कर आयुक्त कामिनी चौहान रतन ने अपर मुख्य सचिव वाणिज्य कर आलोक सिन्हा को प्रकरण की गंभीरता और भारी धनराशि के अंतर की जानकारी देते हुए प्रकरण की स्पेशल ऑडिट कराने की संस्तुति कर दी है।
20 जिलों में विभागीय वसूली में हेरफेर की डीएम करेंगे जांच
वाणिज्य कर आयुक्त ने बकाया वसूली संबंधी अभिलेखों व पत्रावलियों की जांच के लिए विभागीय वसूली वाले 20 जिलों के डीएम को अलग से निर्देश दिए हैं। इन जिलों के डीएम को वित्त एवं लेखा, ऑडिट व राजस्व अधिकारियों की टीमें गठित कर जांच कराकर रिपोर्ट भेजने को कहा गया है।
लीपापोती करते रहे अफसर
आयुक्त कार्यालय की ओर से वसूली खंडों में बकाया के रजिस्टर आर-3, आर-27, आर-5ए व आर-5बी की समीक्षा व जो आरसी जारी नहीं हुई हैं, उन्हें जारी करवाकर वसूली कराने के समय-समय पर निर्देश दिए गए। आर-3 व आर-27 का मिलान कर जिन मामलों में आरसी के विरुद्ध बकाया खत्म हो गया है, उन वसूली प्रमाणपत्रों को मॉड्यूल से हटाने के निर्देश दिए गए। इस पर कार्रवाई न होने पर सितंबर में 5 डिप्टी कमिश्नर (कर वसूली अधिकारी) को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई। माह के अंत में कुल वसूली योग्य बकाया व प्रारंभ में कुल बकाया में अंतर को लेकर कार्यवाही न करने पर 5 कर वसूली अधिकारियों को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि, 21 राजस्व जिलों के नोडल अधिकारियों को कठोर चेतावनी व 20 राजस्व जिलों के नोडल अधिकारियों को सचेत किया गया। इसके बाद भी अफसर लीपापोती करते रहे।
मनमानी कार्यशैली की बानगी
- बड़ी संख्या में वसूली प्रमाणपत्र व पत्रावलियां गायब हैं। किसी भी खंड में अभिलेखों का रखरखाव ठीक नहीं है।
- आर-3 व आर-27 तथा अमीन के डिमांड रजिस्टर पर मासिक या वार्षिक समरी नहीं बनाई जा रही है।
- मासिक प्रगति रिपोर्ट (एमपीआर) में भेजे जाने वाले ब्योरे अभिलेखीय आधार पर भेजे ही नहीं गए। यानी एमपीआर में मनमाने आंकड़े दर्ज किए जा रहे हैं।
- आरसी जारी करने वाले ऑनलाइन सिस्टम ‘व्यास सेंट्रल’ व एमपीआर में दिखाए जा रहे बकाया में बहुत से ऐसे हैं, जिनमें न तो आरसी है न ही उनकी पत्रावलियां।
- वर्ष 2018-19 में नॉन जीएसटी संग्रह में वसूली प्रमाणपत्रों के माध्यम से नियमित बकाया 721.72 करोड़ रुपये जमा हुए हैं, लेकिन जोनों द्वारा भेजे गए मासिक ब्योरे में यह करम 3531.61 करोड़ बताई गई।
- किसी भी स्तर के अधिकारी द्वारा कभी कोई निरीक्षण नहीं किया जा रहा है।
- प्रत्येक माह व वर्ष में कितनी आरसी जारी हुई, कितने में वसूली हुई और कितने में बाकी है, इसका कोई ब्योरा अभिलेखों में नहीं है।
- अमीनों के स्तर पर वसूली की कार्यवाही का ब्योरा दर्ज करने के लिए बनाए गए रजिस्टर को भी कोई अधिकारी नहीं देखता।
- संग्रह इकाइयों में ट्रांसपोर्टरों की बकाया से संबंधित पत्रावलियां या तो उपलब्ध नहीं हैं या अपूर्ण हैं।
- संग्रह इकाइयों में पिछले कई वर्षों से संयुक्त जांच नहीं की गई।
- आर-27 में दर्ज पुराने मामलों का मिलान ‘व्यास सेंट्रल’ पर उपलब्ध पुरानी आरसी रिपोर्ट से किया गया तो पता चला कि बहुत से पुराने बकाया के मामलों को ऑनलाइन फीड नहीं किया गया है।
- असत्यापित बहती के मामलों में जहां कर निर्धारण का अधिकार सचल दल इकाइयों को है, वहां न तो कर निर्धारण की कार्यवाही की गई न ही वसूली प्रमाणपत्र जारी किए गए।