1700 लेखपालों को झटका, नहीं होगा प्रमोशन
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लेखपालों-अमीनों और भूमि अध्याप्ति अमीनों के कानूनगो (राजस्व निरीक्षक) के पद पर प्रमोशन का मामला फिर लटक गया। यूपी लोकसेवा आयोग ने वार्षिक प्रविष्टि नहीं होने का सवाल उठाकर प्रमोशन के लिए तय डीपीसी की बैठक टाल दी। यह लगातार तीसरा मौका है जब डीपीसी की बैठक टली है। इसको लेकर लेखपालों-अमीनों में मायूसी है।
प्रदेश में बड़ी संख्या में तहसीलों में राजस्व निरीक्षक के पद खाली हैं। ये पद राजस्व निरीक्षकों के नायब तहसीलदार के पद पर प्रमोशन से खाली हुए। इससे करीब 1200 से ज्यादा लेखपाल, 500 अमीन और करीब 34 भूमि अध्याप्ति अमीन के प्रमोशन की राह खुल गई।
राजस्व परिषद ने यूपी लोक सेवा आयोग को इन पदों से राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति का प्रस्ताव भेजा था। आयोग ने तीन अगस्त को डीपीसी की बैठक तय की थी।
डीपीसी की अगली तिथि तय कराने की कार्यवाही जल्द
परिषद के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक तय तिथि पर पूरी तैयारी के साथ वे लोग आयोग गए थे। मगर, आयोग ने लेखपालों के वार्षिक इंट्री के ओरिजिनल रिकॉर्ड की बात उठाकर डीपीसी टाल दी। परिषद स्तर से अब डीपीसी की अगली तिथि तय कराने की कार्यवाही जल्द की जाएगी।
वार्षिक इंट्री का इसलिए फंसा पेच
लेखपाल संघ के अध्यक्ष अवधेश सिंह चौहान बताते हैं कि नियमानुसार तहसीलदार को हर साल वार्षिक प्रविष्टि देनी होती है। यह काम नए वित्तीय वर्ष में सितंबर तक किया जाता है। पर, शासनादेश के बावजूद कई-कई साल तक तहसीलदार इंट्री नहीं देते।
इंट्री नहीं होने पर संबंधित जिलाधिकारी एक सर्टिफिकेट देते हैं कि उस साल संबंधित के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई नहीं हुई। पर आयोग ने डीएम की ओर से जारी सर्टिफिकेट को स्वीकार नहीं किया।
हालांकि, राजस्व सेवा की दूसरी पदोन्नतियों में आयोग पहले ऐसे सर्टिफिकेट स्वीकार कर चुका है। उन्होंने कहा कि राजस्व निरीक्षकों की कमी से वरासत, सीमांकन, आय-जाति, उत्तराधिकार के काम प्रभावित हो रहे हैं।