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दो दिन पहले राज्य में बिजली दरों को लेकर हुई बढ़ोतरी को लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्विटर पर अपनी सफाई दी है।
अखिलेश ने कहा है कि ग्रामीण क्षेत्र के घरेलू उपभोक्ताओं की दरों में वृद्धि प्रस्तावित नहीं है। विद्युत दरें जो प्रस्तावित की गई हैं वह अन्य राज्यों की अपेक्षा कम है।
मुख्यमंत्री ने अपनी सफाई में यह भी कहा है कि शहरी उपभोक्ताओं के लिए 150 यूनिट तक दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। इसी तरह 50 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने वाले गरीब शहरी उपभोक्ताओं के लिए पावर कारपोरेशन ने दरों को प्रस्ताव में घटा दिया है।
सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाले निजी नलकूपों की दरों में भी पावर कारपोरेशन ने कोई वृद्धि प्रस्तावित नहीं की है। विद्युत दरों में वृद्धि का जो भी प्रस्ताव किया गया है वह आम जनता को ध्यान में रखकर किया गया है। सरकार का मानना है कि अन्य राज्यों से यूपी में बिजली सस्ती है।
गौरतलब है कि विद्युत नियामक आयोग ने नई विद्युत दरें घोषित कर दी हैं। घरेलू बिजली औसतन 12 फीसदी महंगी करने के साथ 2.32 प्रतिशत रेग्युलेटरी सरचार्ज भी बढ़ा दिया गया है।
घरेलू दरों में तीन के बजाय चार स्लैब
शहरी घरेलू दरों में तीन के बजाय चार स्लैब कर दिए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति कनेक्शन के हिसाब से नहीं बल्कि किलोवाट के हिसाब से बिल देने का प्रावधान किया गया है।
कम खर्च करने वालों को राहत और ज्यादा खपत वालों पर बढ़ा बोझ डाला गया है। कामर्शियल व औद्योगिक समेत अन्य श्रेणियों की दरों भी इजाफा करते हुए सभी श्रेणियों में औसत 8.90 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है।
दीपावली जैसे त्योहार से ठीक पहले नई विद्युत दरें घोषित होने के बाद इसका विरोध शुरू हो गया है। इसको देखते हुए मुख्यमंत्री को सफाई देनी पड़ी है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने मूल्य वृद्धि मामले की जांच अपीलीय अथॉरिटी से और प्रमुख सचिव ऊर्जा संजय अग्रवाल के कार्यकाल की जांच सीबीआई से कराने की मांग करते हुए राज्यपाल राम नाईक को ज्ञापन भेजा है।
उपभोक्ता परिषद ने चेतावनी दी है कि जल्द ही इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसकी शिकायत करेगा। राज्य उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि विद्युत नियामक आयोग ने सरकार व पावर कारपोरेशन के दबाव में जिस तरह से बढ़त की है उससे उपभोक्ता नाराज हैं।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ता परिषद सात अक्तूबर को नियामक आयोग में बिजली दर बढ़ोतरी के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगा और जब तक बिजली दरें कम नहीं हो जाती उपभोक्ता परिषद चुप बैठने वाला नहीं है।