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UP: युवा ले रहे थे पेंशन, 1.70 लाख खातों पर तत्काल रोक

Thu, 03 Dec 2015 09:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 03 Dec 2015 09:02 AM IST
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No pension for one lakh seventy thousand people.

राज्य में करीब 1.70 लाख वृद्धावस्था पेंशन खातों में रकम भेजने पर पाबंदी लगा दी गई है। जांच में ये पेंशनधारक अपात्र पाए गए। इनमें 35 साल के कई लोग भी वृद्धावस्था पेंशन उठा रहे थे। तमाम उन खातों में भी राशि भेजी जा रही थी, जिनके खाताधारकों की काफी पहले मौत हो चुकी है। शासन ने इन खातों पर तत्काल रोक लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

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राज्य सरकार 60 साल या उससे ऊपर के गरीब बुजुर्गों को पेंशन देती है। 60 से 79 वर्ष तक के बुजुर्गों को 300 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाती है, जबकि उसके बाद यह राशि 500 रुपये प्रतिमाह कर दी जाती है। 79 वर्ष तक वालों को दी जाने वाली पेंशन में 200 रुपये केंद्र और 100 रुपये राज्य सरकार का हिस्सा होता है। वहीं, उसके बाद की उम्र वालों की पेंशन की पूरी राशि का भुगतान केंद्र सरकार करती है। इस समय सूबे के 39 लाख से ज्यादा बुजुर्ग इस योजना का लाभ ले रहे हैं।
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पिछले दिनों शासन को शिकायत मिली थी कि भारी संख्या में लोग फर्जी दस्तावेज लगाकर पेंशन उठा रहे हैं। इसके बाद सभी जिलास्तरीय अधिकारियों को जांच के आदेश दिए गए।
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कमोबेश सभी जिलों में अपात्रों के लिए पेंशन की मंजूरी के मामले मिले। गलत आय प्रमाण पत्र लगाने के मामले सबसे ज्यादा मिले। यहां तक पाया गया कि जिन घरों में दुपहिया और चौपहिया वाहन हैं, उनमें भी वृद्धावस्था पेंशन दी जा रही है।

70 हजार और खातों की जांच के आदेश

No pension for one lakh seventy thousand people.

पब्लिक फाइनेंसिंग मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) ने 70 हजार पेंशनर्स के खातों में गड़बड़ियां बताते हुए इनके ब्यौरे को ‘रेड’ दिखा दिया था। उसके बाद इन खातों में राशि न भेजने का फैसला किया गया। शासन ने अब इन खातों की भी जांच कराने का निर्णय किया है।

अगर इनमें कोई खामी होगी तो उसे दुरुस्त कराया जाएगा। साथ ही जो अपात्र पाए जाएंगे, उनके खातों पर भी रोक लगा दी जाएगी।

मामले पर समाज कल्याण प्रमुख सचिव सुनील कुमार का कहना है कि फर्जी पाए जाने पर 1 लाख 69 हजार 737 खातों पर रोक लगा दी गई है। पंचायत चुनाव खत्म होने के बाद इन मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी, ताकि इसमें अगर कहीं किसी अधिकारी की मिलीभगत है तो वह भी सामने आ सके।

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