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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   no Marriage muhurat from June 29 to November 23 in 2023

चातुर्मास का आगमन: जानिए कब से लेकर कब तक नहीं हो सकेंगे विवाह सहित बाकी मांगलिक कार्य, ये काम भी हैं वर्जित

Sun, 25 Jun 2023 08:37 PM IST
ishwar ashish संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी Published by: ishwar ashish Updated Sun, 25 Jun 2023 08:37 PM IST
सार

शादी या दूसरे मांगलिक कार्य करने के लिए लोगों के पास अब बस कुछ दिन का समय शेष बचा है। इसके बाद कुछ महीनों तक विवाह सहित दूसरे मांगलिक कार्य नहीं हो सकेंगे।

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no Marriage muhurat from June 29 to November 23 in 2023
marriage विवाह - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

चातुर्मास में सृष्टि के पालनहार कहे जाने वाले भगवान विष्णु क्षीरसागर में आराम करते हैं। ऐसे में 29 जून से लेकर 23 नवंबर तक यानी 148 दिनों तक शादी-ब्याह समेत किसी भी तरह के मांगलिक कार्य नहीं होंगे। 

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ऐसी मान्यता कि श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। भगवान शिव का प्रिय सावन का महीना गुरुवार से शुरू होगा। क्षेत्र के शिवालय सफाई और रंग रोगन के बाद सज धज कर तैयार हैं। चतुर्मास का हिंदू धर्म में विशेष महत्व होता है। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक चतुर्मास आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष की एकादशी से शुरू होकर कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि तक रहता है। इस वर्ष चतुर्मास 29 जून गुरुवार से शुरू होगा। इस दिन देवशयनी एकादशी भी है। चातुर्मास 23 नवंबर को देवोत्थान एकादशी पर समाप्त होगा।
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चातुर्मास 29 जून गुरुवार से शुरू हो रहा है। इस वर्ष चातुर्मास चार नहीं बल्कि पांच माह का होगा। चातुर्मास में इस बार सावन दो माह का होगा। इसलिए चातुर्मास में सीधे एक माह का इजाफा हो रहा है। मान्यता के अनुसार पूरे महीने हर-हर महादेव और नम: शिवाय की गूंज चारों तरफ सुनाई देगी। श्रद्धालु बड़ी संख्या में शिवालयों में जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करते नजर आएंगे।
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ज्योतिषाचार्य पंडित आशुतोष पांडेय ने बताया कि समस्त मांगलिक कार्य भगवान विष्णु के जागृत अवस्था में ही किए जाते हैं। इस समय विष्णु भगवान के शयन करने से विवाह, वर वरण, कन्या वरण, गृह प्रवेश, उपनयन संस्कार, शिवजी को छोड़कर देव प्रतिष्ठा, महायज्ञ का शुभारंभ, राज्याभिषेक, कर्णवेध, मुंडन कार्यों का निषेध किया गया है। लेकिन, कुछ कार्य इस समय भी किए जाते हैं। इनमें पुंसवन, प्रसूति स्नान, इष्टिका दहन, नामकरण, अन्नप्राशन, व्यापार आरंभ किए जा सकते हैं। 

उन्होंने बताया कि 29 जून को हरिशयनी एकादशी है। इस दिन स्वाती नक्षत्र दिन में १:१० बजे तक, पश्चात विशाखा नक्षत्र, सिद्ध योग भी संपूर्ण दिन और अर्ध रात्रि के बाद 1.27 बजे तक है। इस दिन सुस्थिर नामक औदायिक योग भी है। सूर्योदय कालीन एकादशी होने से विष्णु शयनी एकादशी इसी दिन मान्य रहेगा। यह महत्वपूर्ण एकादशी है, क्योंकि इसी दिन से विवाहादि समस्त महत्वपूर्ण मांगलिक कार्य पर रोक लग जाएगी।

चतुर्मास में ये काम होता हैं वर्जित

no Marriage muhurat from June 29 to November 23 in 2023
सावन - फोटो : अमर उजाला

पंडित गया प्रसाद ने बताया कि चातुर्मास के पहले महीने सावन में हरी सब्जी, भादो में दही, आश्विन में दूध और कार्तिक में दाल नहीं खानी चाहिए। साथ ही इस दौरान स्वेच्छा से नियमित उपयोग के पदार्थों का त्याग करने का भी विधान है। चातुर्मास में पान-मसाला, सुपारी, मांस और मदिरा का सेवन भी वर्जित होता है।

चातुर्मास का है वैज्ञानिक महत्व

अनिल शास्त्री बताते हैं कि चातुर्मास का धार्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी है। वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो इन दिनों बारिश होने से हवा में नमी बढ़ जाती है। इस कारण बैक्टीरिया और कीड़े-मकोड़े ज्यादा हो जाते हैं। उनकी वजह से संक्रामक रोग सहित अन्य बीमारियां होने लगती हैं। इससे बचने के लिए इस दौरान खानपान में सावधानी रखने के साथ लोगों को संतुलित जीवन शैली अपनानी चाहिए।

सावन माह की पूजन विधि

सावन के महीने में प्रत्येक दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें। इसके बाद मंदिर में भगवान शिव के सामने घी का दीपक जलाएं। सभी देवी-देवताओं का जलाभिषेक करें। दूध और गंगाजल से शिवलिंग को स्नान कराएं। भगवान शिव को फल और फूल और बेल पत्र अर्पित कर उनकी आरती उतारें।

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