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बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग: हर घोटाले पर गठित हुई समिति पर नहीं पूरी हुई किसी की जांच
Wed, 04 Mar 2020 02:51 AM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Wed, 04 Mar 2020 02:51 AM IST
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- फोटो : amar ujala
बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में जितने घोटाले हुए उतनी जांच समितियों का गठन तो होता रहा है, पर आज तक एक भी जांच न तो पूरी हुई और न ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हुई। लिहाजा अधिकांश आरोपी अधिकारी व कर्मचारी अभी भी ‘मलाई’ काट रहे हैं।
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उदाहरण के तौर पर बाबुओं के प्रमोशन, पदोन्नति में अनियमितता, फर्जी लेटर पैड पर कर्मचारियों के तबादले और गुणवत्ता की जांच के बिना ही पोषाहार आपूर्ति जैसे घोटाले को देखा जा सकता है। इन सभी मामलों में जांच समिति तो गठित हुई, पर एक भी मामले की जांच पूरी नहीं हो पाई है। कई मामले शासन स्तर पर तो कई मामले निदेशालय स्तर पर दबे पड़े हैं।
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रोचक तथ्य यह है कि घपले-घोटाले उजागर होने के बाद विभागीय मंत्री से लेकर प्रमुख सचिव व निदेशकों तक को हटा दिया गया, लेकिन एक भी जांच पूरी नहीं हो पाई है। जबकि कई मामलों की जांच समिति का गठन तो मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर किया गया था।
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शासन स्तर से जांच समितियां गठित होती रही हैं
पोषाहार वितरण से लेकर कर्मियों के तबादले से लेकर प्रमोशन तक में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा होने पर शासन स्तर से जांच समितियां गठित होती रही हैं। किसी मामले में जांच पूरी करने के लिए एक सप्ताह तो किसी में 15 दिन की समय सीमा दी गई थी। लेकिन सभी जांच समितियों का गठन हुए छह महीने से एक साल से अधिक का समय बीत गया पर एक भी जांच रिपोर्ट न तो सरकार को भेजी गई और न ही एक भी मामले में कार्रवाई हुई।