भाजपाइयों को सुकून देने के मूड में नहीं मोदी
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भाजपा के जो सांसद सदन के सत्रावसान के बाद आराम करने की सोच रहे हैं, उन्हें इस खबर से झटका लग सकता है। पार्टी ने सांसदों के लिए काम तलाश लिया है।
इन्हें अपने क्षेत्रों का रिपोर्ट कार्ड तैयार करने का काम दिया जाएगा। इसके तहत उन्हें अपने क्षेत्र की इलाकेवार समस्याओं की जानकारी भी जुटानी होगी। साथ ही इन समस्याओं के समाधान पर सुझाव भी देना होगा।
पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ सांसदों के समूहों में कई ने क्षेत्रों में काम न होने की समस्या उठाई थी। कहा था कि प्रदेश सरकार की अड़ंगेबाजी से भी विकास कार्य कराने में दिक्कत होती है।
जमीन को बचाए रखने की कोशिश
पार्टी नेताओं की मानें तो इस तरह का फीडबैक मिलने के बाद मोदी के कान खड़े हुए। उन्हें लगा कि पार्टी सांसदों को क्षेत्रों में और सक्रिय करना जरूरी है। जिससे उनका अपने क्षेत्र के सभी हिस्सों के लोगों से संवाद व संपर्क मजबूत हो। साथ ही सरकारी मशीनरी भी दबाव में रहे। उसी के मद्देनजर यह कार्ययोजना बनाई गई है।
इस तरह होगा काम
सांसदों को अपने क्षेत्र के सभी हिस्सों की अलग-अलग समस्याओं के बारे में ब्योरा जुटाना होगा। साथ ही यह भी बताना होगा कि किस क्षेत्र में कौन सी सबसे बड़ी समस्या है, जिसका समाधान सबसे पहले होना चाहिए। सांसदों को समाधान के बारे में राय भी देनी होगी।
माना जा रहा है कि इस फैसले के पीछे भाजपा रणनीतिकारों की सोची-समझी रणनीति है। वे चाहते हैं कि सांसद अपने क्षेत्र के कुछ विशेष स्थानों तक ही सिमटकर न रह जाए। सांसद के साथ-साथ संगठन और सरकार की किरकिरी भी न हो।
असली मकसद यह
रणनीतिकारों का मानना है कि सांसदों को जब क्षेत्र के सभी इलाकों के बारे में जानकारी जुटानी है तो उन्हें वहां के लोगों के बीच जाना ही होगा।
जाने से पार्टी के स्थानीय लोगों से उनका संपर्क और बातचीत होगी ही। असल में भगवा टोली के रणनीतिकार भाजपा सांसदों के जरिये अलग तरह की कार्यसंस्कृति से जनता में यह भरोसा भरना चाहते हैं कि मोदी के नेतृत्व में न सिर्फ सरकारी तंत्र की कार्यसंस्कृति ही बदली है बल्कि जनप्रतिनिधियों के काम करने का अंदाज भी बदला है।
नहीं होने देंगे कोई गलती
भाजपा और उसकी सरकार को जनता से मिले भरपूर समर्थन के विश्वास की चिंता है। सरकार और भाजपा के जनप्रतिनिधि जनसमस्याओं के समाधान को तत्पर है।
पूरी ईमानदारी से क्षेत्र और लोगों की सेवा करना चाहते हैं। साथ ही समस्याओं के समाधान को उपलब्ध है। मोदी को पता है कि उत्तर प्रदेश में असली और एक तरह से लोकसभा चुनाव से बड़ी लडा़ई 2017 के विधानसभा चुनाव में होनी है।
जिसमें फतह पाए बगैर लोकसभा के अगले चुनाव की तैयारी करना मुश्किल होगा। इसलिए वह किसी स्तर पर कोई चूक नहीं होने देना चाहते।