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यूपी छोड़िए, 28 किमी तक भी नहीं पहुंची मदद

Mon, 06 Apr 2015 01:42 PM IST
अजीत बिसारिया, इंदुभूषण पांडेय/अमर उजाला, लख्ानऊ
अजीत बिसारिया, इंदुभूषण पांडेय/अमर उजाला, लख्ानऊ Updated Mon, 06 Apr 2015 01:42 PM IST
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No help to farmers from up goverment

लहलहाती फसल बर्बाद हो गई। खुशियों से लेकर उम्मीद तक सब कुछ लुटता रहा। सरकार से कुछ मिला भी तो सिर्फ और सिर्फ कोरा आश्वासन। ऐसे में गम बर्दाश्त नहीं हुआ तो जान दे दी। यही कहानी है राजधानी यानी सरकार से महज 28 किमी दूर स्थित बाराबंकी के किसानों की।

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एक पखवाड़े बाद भी सरकार मृतक किसानों के परिवारों को कोई मदद नहीं दे पा रही है। किसान और प्रधान चीख-चीखकर कह रहे हैं कि लेखपाल बर्बाद हुई फसलों का सर्वे करने गांव नहीं पहुंच रहे, लेकिन अफसर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। खेतों में फसलें बिछी पड़ी हैं, पर ये मानने को तैयार नहीं कि यहां कुछ खास नुकसान भी हुआ है।
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प्रभावित गांवों में न विधायक पहुंचे, न मंत्री और न कोई सांसद। लग रहा है सरकार मानो सात समंदर पार बैठी हो। नौकरशाही के कुछ नुमाइंदे पहुंचे भी तो औपचारिकता निभाने। अगर बाराबंकी का यह हाल है तो सूबे के दूर-दराज के इलाकों में मदद के बड़े-बड़े दावों की असलियत का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
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किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने दो किस्तों में 244 करोड़ रुपये जारी किए। हिदायत दी कि हर हाल में 31 मार्च तक मदद पहुंच जाए, पर हकीकत यह है कि तीन अप्रैल तक महज 90.66 करोड़ की सहायता ही बांटी जा सकी है।

वादे बहुत मगर ये है हकीकत

No help to farmers from up goverment

किसान अखिलेश ने 11 बीघा जमीन में खेती के लिए 75 हजार रुपये बैंक से कर्ज लिए थे, पर उपज के नाम पर महज 100 क्विंटल आलू हुआ। बाजार में बेचें भी तो बमुश्किल 20-25 हजार रुपये ही मिलेंगे। इसलिए घर के दालान में ही पड़ा है।
सरसवां (फतेहपुर)।

फसल पर मौसम की मार के बाद पति अखिलेश वर्मा को खो चुकी रूपा देवी को घर चलाना मुश्किल हो रहा है। बड़ा बेटा सुमित बेरोजगार है। छोटा बेटा विशाल बीए सेकंड ईयर और सूरज 12वीं का छात्र है। दोनों की पढ़ाई का खर्चा भी है।

पति की मौत के 10 दिन बाद भी सरकार से मदद के नाम पर एक धेला नहीं मिला। सवाल पूछने पर आंखें डबडबा गईं। फिर डीएम का एक पत्र दिखाती हैं और कहती हैं- बस यही मिला है।इसमें डीएम ने मुख्यमंत्री से मृतक अखिलेश के परिवार को पांच लाख रुपये की सहायता और मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से दो लाख रुपये दिए जाने की सिफारिश की है।

उन्हें राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना की भी मदद नहीं मिली जिसमें सामान्य परिस्थितियों में भी परिवार के मुखिया की मौत होने पर 30 हजार रुपये की मदद तत्काल दे दी जाती है।

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