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यूपी: उपभोक्ताओं को नहीं लगेगा महंगी बिजली का झटका, आयोग ने दरें बढ़ाने का प्रस्ताव किया नामंजूर

Wed, 11 Nov 2020 12:10 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 11 Nov 2020 12:10 PM IST
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No changes in power tarrifs in Uttar Pradesh.
घर के बाहर लगा बिजली का मीटर - फोटो : अमर उजाला

योगी सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए बिजली दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। कोविड-19 के प्रकोप को देखते हुए इस साल बिजली की मौजूदा दरें ही प्रभावी रहेंगी। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने 2020-21 का टैरिफ जारी करते हुए सभी श्रेणी की दरें यथावत रखी हैं। यही नहीं, पावर कॉर्पोरेशन की ओर से विभिन्न श्रेणी के स्लैब में परिवर्तन के प्रस्ताव को भी आयोग ने खारिज कर दिया है।

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नियामक आयोग के अध्यक्ष आरपी सिंह, सदस्य केके शर्मा व वीके श्रीवास्तव की पूर्ण पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि कोविड-19 महामारी के कारण जीविकोपार्जन, वाणिज्यिक व औद्योगिक गतिविधियों पर पड़े विपरीत प्रभाव तथा राज्य सकल घरेलू उत्पाद में अनुमानित कमी के कारण उपभोक्ताओं की भुगतान क्षमता में गिरावट को देखते हुए मौजूदा दरों को यथावत रखा गया है। इसके लिए बिजली कंपनियों के रेगुलेटरी खातों का विश्लेषण और बीते वर्षों में दरों में की गई वृद्धि को भी ध्यान में रखा गया है।

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स्मार्ट मीटर का खर्च उपभोक्ता से नहीं वसूलेंगे

राज्य विद्युत नियामक आयोग ने साफ कर दिया है कि स्मार्ट मीटर पर आने वाला कोई भी खर्च उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा। साथ ही स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं की बिजली काटने व जोड़ने के लिए वसूली जाने वाली आरसीडीसी फीस 600 रुपये से कम करके पांच किलोवाट तक 50 रुपये प्रति जॉब व पांच किलोवाट से ऊपर 100 रुपये प्रति जॉब तय कर दी है। इसके अलावा प्रीपेड उपभोक्ताओं से अब आरसीडीसी फीस नहीं वसूल की जाएगी।

नियामक आयोग के अध्यक्ष आरपी सिंह, सदस्य केके शर्मा व वीके श्रीवास्तव की पूर्ण पीठ ने प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों की ओर से 2020-21 के लिए दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्कता (एआरआर) व टैरिफ  प्रस्ताव, स्लैब परिवर्तन व 2018-19 के लिए दाखिल ट्रू-अप (अनुमोदित व वास्तविक खर्च का विवरण) याचिका पर बुधवार को अपना फैसला सुनाते हुए टैरिफ आर्डर जारी किया।

बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं के निकल रहे 13337 करोड़ रुपये का लाभ देने के मामले में फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा है कि जब तक इसका लाभ नहीं दे दिया जाता तब तक इस राशि पर 13-14 प्रतिशत सालाना कैरिंग कास्ट (ब्याज) जोड़ी जाएगी।

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